‘अब की बार, मोदी सरकार’ और ‘मिले सुर मेरा तुम्हारा’ जैसे यादगार अभियानों के जनक एड गुरु पीयूष पांडे का निधन। जानिए उनके जीवन और करियर की प्रेरणादायक कहानी।

Ad Guru Piyush Pandey Passes Away: The Mind Behind “Ab Ki Baar Modi Sarkar” and “Mile Sur Mera Tumhara”
‘अब की बार, मोदी सरकार’ का नारा देने वाले एड गुरु पीयूष पांडे का निधन: मिले सुर मेरा तुम्हारा से ब्रांड इंडिया तक का सफर
परिचय: एक रचनात्मक युग का अंत
भारतीय विज्ञापन जगत के सबसे रचनात्मक, संवेदनशील और प्रभावशाली दिमागों में से एक पीयूष पांडे अब इस दुनिया में नहीं रहे।
उनका नाम भारतीय विज्ञापन के उस स्वर्ण युग से जुड़ा है जिसने आम आदमी की भाषा को ब्रांड की भाषा बना दिया।
‘मिले सुर मेरा तुम्हारा’ से लेकर ‘अब की बार, मोदी सरकार’ तक, उन्होंने हर प्रोजेक्ट में भावनाओं और भारतीयता को गहराई से जोड़ा।
उनके निधन की खबर से विज्ञापन जगत, मीडिया उद्योग और उनके चाहने वालों में शोक की लहर है।
पीयूष पांडे कौन थे: एक साधारण शुरुआत से विज्ञापन के सितारे तक
1955 में जयपुर के एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे पीयूष पांडे नौ भाई-बहनों में से एक थे।
उनके परिवार में रचनात्मकता की गहरी जड़ें थीं — उनकी बहन ईला अरुण प्रसिद्ध गायिका और अभिनेत्री हैं, जबकि उनके भाई प्रसून पांडे जाने-माने फिल्म और विज्ञापन निर्देशक हैं।
उनके पिता एक बैंक में कार्यरत थे, लेकिन घर का माहौल हमेशा कला, संगीत और रचनात्मक सोच से भरा रहता था।
कॉलेज के दिनों में पीयूष क्रिकेटर बनना चाहते थे। उन्होंने राजस्थान की ओर से क्रिकेट भी खेला। लेकिन किस्मत ने उनके लिए कुछ और लिखा था — एक ऐसा रास्ता, जो आने वाले दशकों में भारतीय विज्ञापन की परिभाषा बदल देगा।
विज्ञापन जगत में एंट्री: ओगिल्वी से शुरू हुआ सफर
पीयूष पांडे ने 1982 में Ogilvy & Mather (ओगिल्वी इंडिया) से अपने विज्ञापन करियर की शुरुआत की।
इससे पहले वे चाय चखने वाले (Tea Taster) और निर्माण मजदूर के रूप में भी काम कर चुके थे।
जब उन्होंने विज्ञापन उद्योग में कदम रखा, तब यह क्षेत्र अंग्रेज़ी और विदेशी सोच से भरा हुआ था।
लेकिन पीयूष पांडे ने इस इंडस्ट्री में हिंदी और भारतीय भावनाओं को केंद्र में रखकर क्रांति ला दी।
उन्होंने बताया कि एक अच्छा विज्ञापन वही है जो “दिल से निकले और दिल तक पहुंचे।”
उनके विज्ञापनों में भारतीयता की खुशबू और रिश्तों की सादगी हमेशा झलकती रही।
मिले सुर मेरा तुम्हारा: एक गीत जो बन गया भारत की पहचान
1988 में दूरदर्शन पर प्रसारित हुआ प्रतिष्ठित गीत ‘मिले सुर मेरा तुम्हारा’ भारत की एकता का प्रतीक बन गया।
पीयूष पांडे इस गीत की कॉन्सेप्ट और निर्माण टीम के अहम सदस्य थे।
इस गीत ने भारतीय विविधता को एक धागे में पिरोया — अलग-अलग भाषाओं, संस्कृतियों और भावनाओं को जोड़ते हुए।
आज भी यह गीत सुनते ही भारत की आत्मा झलकती है।
यह सिर्फ एक टेलीविजन प्रोजेक्ट नहीं था, बल्कि एक भावनात्मक आंदोलन था — जिसे पीयूष पांडे ने अपने विज़न से संभव किया।
अब की बार, मोदी सरकार: राजनीतिक विज्ञापन का नया अध्याय
2014 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए तैयार किया गया नारा “अब की बार, मोदी सरकार” इतिहास का हिस्सा बन गया।
यह सिर्फ एक प्रचार वाक्य नहीं था — यह एक ब्रांडिंग मास्टरस्ट्रोक था जिसने भारतीय राजनीति में विज्ञापन की भूमिका को नई ऊँचाई दी।
इस नारे की सादगी, लय और प्रभावशीलता ने हर तबके के लोगों के बीच इसे यादगार बना दिया।
यह विचार भी पीयूष पांडे की रचनात्मक सोच का नतीजा था — जिसमें राजनीति को जनता की भाषा में पेश किया गया।
ब्रांड्स को मानवीय चेहरा देने वाले एड गुरु
पीयूष पांडे ने भारतीय ब्रांड्स को एक पहचान दी — जो केवल प्रोडक्ट नहीं बल्कि भावनाएं बन गए।
उनके कुछ प्रतिष्ठित विज्ञापन आज भी भारतीय पॉप कल्चर का हिस्सा हैं:
- फेविकोल: “ये फेविकोल का जोड़ है, टूटेगा नहीं!” — यह टैगलाइन आज एक कहावत बन गई है।
- कैडबरी डेयरी मिल्क: “कुछ खास है…” — इस लाइन ने भारतीय मिठास को नया स्वाद दिया।
- एशियन पेंट्स: “हर खुशी में रंग लाए” — जिसने त्योहारों और रंगों को भावनाओं से जोड़ा।
- Hutch (अब Vodafone): “You and I in this beautiful world” — जिसने तकनीक को मानवता से जोड़ा।
हर विज्ञापन में उनकी खास पहचान थी — सरल शब्द, गहरी भावना और भारतीय जीवन का स्पर्श।
रचनात्मकता से नेतृत्व तक: Ogilvy के ग्लोबल चेयरमैन
चार दशकों तक ओगिल्वी के साथ जुड़े रहने के बाद, पीयूष पांडे कंपनी के ग्लोबल चीफ क्रिएटिव ऑफिसर बने — यह सम्मान किसी भारतीय को पहली बार मिला था।
उनकी सोच थी कि “क्रिएटिविटी सिर्फ विचार नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है।”
उन्होंने सैकड़ों युवा क्रिएटिव प्रोफेशनल्स को मार्गदर्शन दिया, जो आज उद्योग में उनके आदर्श माने जाते हैं।
सोहेल सेठ ने जताया शोक: ‘अब जन्नत में भी गूंजेगा मिले सुर मेरा तुम्हारा’
विज्ञापन विशेषज्ञ और लेखक सोहेल सेठ ने एक्स (Twitter) पर पीयूष पांडे के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया।
उन्होंने लिखा —
“मेरे सबसे प्यारे दोस्त पीयूष पांडे जैसे प्रतिभाशाली व्यक्ति के निधन से मैं बेहद दुखी हूं। भारत ने एक महान विज्ञापन हस्ती ही नहीं, बल्कि एक सच्चे देशभक्त को खोया है। अब जन्नत में भी गूंजेगा ‘मिले सुर मेरा तुम्हारा’।”
उनका यह संदेश पूरे उद्योग की भावनाओं को दर्शाता है — एक ऐसे व्यक्ति के प्रति सम्मान जिसने विज्ञापन को कला का रूप दिया।
पुरस्कार और सम्मान: रचनात्मकता का वैश्विक मान्यता
- Padma Shri (2016): विज्ञापन और मीडिया क्षेत्र में योगदान के लिए।
- Clio Lifetime Achievement Award: अंतरराष्ट्रीय मंच पर रचनात्मकता की पहचान।
- Indian Advertising Hall of Fame: भारतीय विज्ञापन इतिहास में उनकी स्थायी जगह का प्रतीक।
इन पुरस्कारों ने केवल उनकी उपलब्धियों को नहीं, बल्कि उनकी सोच को अमर कर दिया।
एक इंसान के रूप में पीयूष पांडे
जो लोग उन्हें करीब से जानते थे, वे कहते हैं — “पीयूष पहले इंसान थे, फिर विज्ञापन गुरु।”
वे हमेशा अपनी टीम को प्रेरित करते, सभी को बराबरी का सम्मान देते और कहते —
“विज्ञापन में दिल लगाओ, तभी काम अमर होगा।”
उनका जीवन सादगी, मेहनत और भारतीय संस्कृति के प्रति गहरे लगाव का उदाहरण था।
निष्कर्ष: भारतीय विज्ञापन की आत्मा अमर रहेगी
पीयूष पांडे ने विज्ञापन को सिर्फ व्यापार का साधन नहीं, बल्कि भावनाओं का पुल बनाया।
उन्होंने दिखाया कि एक अच्छा विचार किसी भाषा का नहीं, बल्कि दिल की भाषा का होता है।
उनके जाने से भारतीय विज्ञापन जगत में जो शून्य पैदा हुआ है, उसे भरना असंभव है।
लेकिन उनके बनाए शब्द, संगीत और विचार — आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करते रहेंगे।
‘अब की बार, मोदी सरकार’ का नारा देने वाले और ‘मिले सुर मेरा तुम्हारा’ से देश की एकता को आवाज़ देने वाले पीयूष पांडे हमेशा हमारे दिलों में रहेंगे — एक सच्चे भारतीय और सच्चे रचनाकार के रूप में।
पीयूष पांडे, Piyush Pandey death, अब की बार मोदी सरकार, मिले सुर मेरा तुम्हारा, Ogilvy India, भारतीय विज्ञापन, एड गुरु, Piyush Pandey career
यह भी पढ़े: TRAI ने जारी किए नए सिम कार्ड Rule, अब नहीं करवाना पड़ेगा महंगा रिचार्ज, यहां देखें पूरी डिटेल्स
Author: AK
! Let us live and strive for freedom ! Freelance Journalist ! Politics ! News Junky !












