रोसरा (बिहार) एक ऐसी दुनिया में, जहां प्रौद्योगिकी अवसरों और भविष्य दोनों को परिभाषित करती है, दुबई के 17 वर्षीय छात्र तेजस्व पाठक यह दिखा रहे हैं कि बदलाव लाने के लिए उम्र नहीं, संकल्प मायने रखता है। दुबई के NLCS इंटरनेशनल स्कूल में ग्रेड 11 के छात्र तेजस्व ने मार्च 2024 में शुरू की अपनी पहल “कोड विद्या (Code Vidya)” के ज़रिए अब तक बिहार के 1,450 से अधिक वंचित छात्रों को डिजिटल शिक्षा से जोड़ दिया है।
ग्रामीण बिहार में तकनीकी शिक्षा की नई सुबह
तेजस्व ने KCS फाउंडेशन इंडिया के सहयोग से बिहार के रोसरा (समस्तीपुर) में एक आधुनिक कंप्यूटर लैब की स्थापना की, जिसमें 20 इंटरनेट-सक्षम कंप्यूटर और विश्वसनीय बिजली व्यवस्था है। यह प्रयोगशाला अब ग्रामीण छात्रों के लिए सीखने का केंद्र बन चुकी है।
उन्होंने स्थानीय स्तर पर 25 शिक्षकों को ऑनलाइन प्रशिक्षण देकर कंप्यूटिंग, डिजिटल संचार और शिक्षा में ChatGPT जैसे एआई टूल्स के उपयोग की जानकारी दी। यही शिक्षक अब स्थानीय डिजिटल एंबेसडर बनकर जिले के स्कूलों और शिक्षण केंद्रों में बच्चों को कोडिंग और डिजिटल साक्षरता सिखा रहे हैं।
तेजस्व नियमित रूप से साप्ताहिक वर्चुअल सत्र लेकर शिक्षकों और छात्रों को मार्गदर्शन देते हैं। उन्होंने इस वर्ष बिहार का दौरा कर परियोजना की प्रगति का मूल्यांकन किया और स्थानीय समुदाय से मुलाकात की। उनके भाई देवव्रत पाठक ने भी इस पहल में सक्रिय रूप से योगदान दिया है।
छोटे सपनों से बड़ी उड़ान तक
कोड विद्या के प्रभाव स्पष्ट हैं। जो बच्चे पहले कंप्यूटर माउस तक नहीं चला पाते थे, वे अब आत्मविश्वास से टाइपिंग, इंटरनेट ब्राउज़िंग और बेसिक कोडिंग सीख रहे हैं। ग्रामीण शिक्षकों ने भी अब अपनी कक्षाओं में एआई-आधारित शिक्षण पद्धतियों का उपयोग शुरू किया है।
एक स्थानीय छात्रा के पिता ने कहा, “हम सोचते थे कि कंप्यूटर सिर्फ शहर के बच्चों के लिए हैं, अब हमारे बच्चे भी सीख रहे हैं और सपने देख रहे हैं।”
वैश्विक स्तर पर पहचान बना रहा है ‘कोड विद्या’
KCS फाउंडेशन इंडिया के संस्थापक डॉ. पंकज झा ने कहा —“तेजस्व का नेतृत्व दिखाता है कि कैसे तकनीकी समझ, दूरदृष्टि और निरंतर प्रयास एक छोटे से विचार को टिकाऊ शिक्षा आंदोलन में बदल सकते हैं।”
“तेजस्व का नेतृत्व दिखाता है कि कैसे तकनीकी समझ, दूरदृष्टि और निरंतर प्रयास एक छोटे से विचार को टिकाऊ शिक्षा आंदोलन में बदल सकते हैं।”
उन्होंने बताया कि कोड विद्या की यह पहल यूनेस्को के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) —
SDG 4 (गुणवत्तापूर्ण शिक्षा), SDG 8 (सभ्य कार्य और आर्थिक विकास),
SDG 10 (असमानता में कमी) और SDG 17 (लक्ष्यों के लिए साझेदारी) — से सीधा जुड़ाव रखती है।
आने वाले कदम: विस्तार और नवाचार की दिशा में
इस पहल की सफलता को देखते हुए अब पड़ोसी जिलों में मॉडल को दोहराने की योजना बन रही है। कोड विद्या का उद्देश्य अधिक प्रयोगशालाएं स्थापित करना, शिक्षक प्रशिक्षण नेटवर्क का विस्तार करना और उन्नत डिजिटल कोर्स मॉड्यूल तैयार करना है।
तेजस्व पाठक कहते हैं —
“हर बच्चे को अपने भविष्य को कोड करने का मौका मिलना चाहिए। तकनीक को सशक्त बनाना चाहिए, अलग नहीं करना।”
उनकी यह सोच “कोड विद्या” को सिर्फ एक शैक्षिक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन बनाती है — जो यह साबित करता है कि करुणा, उद्देश्य और नवाचार से युवा भी समाज में गहरा परिवर्तन ला सकते हैं।
Bihar News: Young coder from Bihar becomes an example of change: Grade 11 student Tejasv Pathak connects 1,450 underprivileged students to digital education through ‘Code Vidya’
Author: AK
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