जहानाबाद भारत के मुख्य न्यायाधीश पर हुआ हमला सिर्फ एक व्यक्ति पर हमला नहीं, बल्कि भारतीय संविधान, न्यायपालिका की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा प्रहार है। इस घटना ने देशभर में आक्रोश और चिंता की लहर पैदा कर दी है।
समाज के बुद्धिजीवी, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने इस कृत्य की कटु शब्दों में निंदा करते हुए कहा है कि जब देश का सर्वोच्च न्यायिक अधिकारी भी सुरक्षित नहीं है, तो यह लोकतंत्र की सेहत पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।
बीते 11 वर्षों से देश की राजनीति में धर्म और जाति के नाम पर समाज को बाँटने का प्रयास किया जा रहा है। इसी माहौल में जब एक दलित पृष्ठभूमि से आए मुख्य न्यायाधीश ने संविधान, मानवाधिकार और समानता की बात की, तो उन पर हमला होना अत्यंत शर्मनाक और निंदनीय है।
स्थानीय बुद्धिजीवियों का कहना है कि यह हमला सिर्फ एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि डॉ. भीमराव आंबेडकर की विचारधारा और उनके द्वारा रचित संविधान की आत्मा पर वार है। दलित न्यायाधीश पर हमला, उस मानसिकता को उजागर करता है जो आज भी जातिवाद, अहंकार और असहिष्णुता से ग्रसित है।
नागरिक समाज ने मांग की है कि इस घटना की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।
साथ ही यह भी अपील की गई है कि मीडिया, बुद्धिजीवी वर्ग और आम जनता खुलकर न्यायपालिका की स्वतंत्रता और गरिमा की रक्षा के लिए आगे आएं। “यह हमला केवल मुख्य न्यायाधीश पर नहीं, बल्कि भारत के प्रत्येक नागरिक के न्याय के अधिकार पर हमला है। न्यायपालिका पर प्रहार लोकतंत्र को कमजोर करने की साज़िश है, जिसे देश कभी बर्दाश्त नहीं करेगा।”
देशभर में इस घटना की व्यापक निंदा के साथ, नागरिकों ने एक सुर में कहा — संविधान सर्वोपरि है, और उसकी रक्षा के लिए हर आवाज़ उठनी चाहिए।
Jehanabad News: Strongly condemn the attack on the Dalit Chief Justice, saying – this is a direct attack on the Constitution and democracy
Author: AK
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