शनि, अप्रैल 11, 2026

Jehanabad News: वैश्य महासभा सम्मेलन को लेकर राजनीति गरमाई, समाज के भीतर दिखी आपसी दरार

जहानाबाद,21 सितम्बर आगामी विधानसभा चुनाव से पहले वैश्य समाज के भीतर राजनीतिक खींचतान खुलकर सामने आने लगी है। 21 सितम्बर को प्रस्तावित वैश्य महासभा सम्मेलन को लेकर जहाँ कुछ लोग इसे समाज की एकजुटता और राजनीतिक ताक़त दिखाने का मंच मान रहे हैं, वहीं दूसरी ओर समाज के ही एक वर्ग ने इसका विरोध दर्ज कराया है। विरोध करने वालों का आरोप है कि इस सम्मेलन को एनडीए दलों के नेताओं ने हाइजैक कर लिया है, जबकि वैश्य समाज हर राजनीतिक पार्टी में अपनी उपस्थिति और हिस्सेदारी रखता है।

विरोध करने वाले प्रतिनिधियों का कहना है कि सम्मेलन यदि वास्तव में समाज का कार्यक्रम है, तो उसमें कांग्रेस, राजद, वाम दलों और अन्य राजनीतिक दलों से जुड़े वैश्य समाज के नेताओं व कार्यकर्ताओं को भी आमंत्रित किया जाना चाहिए था। लेकिन इस आयोजन में केवल जेडीयू और बीजेपी के नेताओं व मंत्रियों को ही तवज्जो दी गई है। ऐसे में यह सम्मेलन वैश्य महासभा के नाम पर आयोजित होने के बजाय सीधे-सीधे एनडीए का कार्यक्रम प्रतीत हो रहा है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जताया विरोध

जहानाबाद में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विशाल गुप्ता, अविनाश कुमार गुप्ता, सोनू केशरी, संजय गुप्ता और गोपाल शाह वर्मा सहित अन्य लोगों ने खुलकर कार्यक्रम का विरोध जताया। उन्होंने कहा कि “हम वैश्य महासभा सम्मेलन का बहिष्कार करेंगे। हालांकि सम्मेलन स्थल पर पहुँचकर हम अपनी आवाज अवश्य बुलंद करेंगे, ताकि यह संदेश जाए कि वैश्य समाज किसी एक राजनीतिक दल की बपौती नहीं है।”

विरोधियों का कहना है कि समाज की एकता तभी सार्थक होगी जब सभी दलों से जुड़े वैश्य नेताओं को एक मंच पर लाकर चुनाव के समय उनके योगदान और राजनीतिक हिस्सेदारी पर चर्चा हो। उनका तर्क है कि चुनाव के दौरान यह आकलन भी हो सकेगा कि किस दल ने समाज को कितना प्रतिनिधित्व दिया है और भविष्य में किस पार्टी से अधिक उम्मीद की जा सकती है।

राजनीतिक निहितार्थ
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि इस विवाद ने वैश्य समाज के भीतर आपसी दरार को उजागर कर दिया है। वैश्य समाज परंपरागत रूप से चुनावों में निर्णायक भूमिका निभाता रहा है, लेकिन यदि आंतरिक मतभेद गहराए तो इसका सीधा असर चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है। विरोध जताने वालों का कहना है कि एकपक्षीय आयोजन से समाज की एकजुटता को धक्का लगेगा और विभिन्न दलों में सक्रिय वैश्य नेता व कार्यकर्ता उपेक्षित महसूस करेंगे।

अब देखने वाली बात यह होगी कि आगामी दिनों में यह विरोध कितना व्यापक रूप लेता है और क्या आयोजक समिति इस नाराज़गी को दूर करने के लिए कोई पहल करती है। फ़िलहाल इतना तय है कि सम्मेलन शुरू होने से पहले ही वैश्य समाज की राजनीति गरमा चुकी है और समाज के भीतर खींचतान खुलकर सामने आ गई है।

Jehanabad News: Politics heats up over Vaishya Mahasabha conference, rift visible within society

AK
Author: AK

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