जहानाबाद कृषि विज्ञान केन्द्र, जहानाबाद द्वारा 08 से 12 सितम्बर 2025 तक आयोजित पाँच दिवसीय “कृषि सखी प्रशिक्षण कार्यक्रम” का सफल समापन हुआ। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य महिलाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें अपने-अपने गाँवों में किसानों के बीच प्राकृतिक खेती के प्रचार-प्रसार का दूत बनाना था।
प्राकृतिक खेती वर्तमान समय की महती आवश्यकता मानी जा रही है। यह खेती न केवल कम लागत वाली है बल्कि पर्यावरण हितैषी और टिकाऊ भी है। इस पृष्ठभूमि में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम ने प्रतिभागियों को व्यावहारिक एवं सैद्धांतिक दोनों स्तरों पर समृद्ध किया।
22 कृषि सखियों की भागीदारी
इस प्रशिक्षण में जहानाबाद जिले की 12 और अरवल जिले की 10 कृषि सखियों ने भाग लिया। पाँच दिनों तक विशेषज्ञों ने व्याख्यान, समूह चर्चा और प्रयोगात्मक सत्रों के माध्यम से प्रशिक्षणार्थियों को गहन जानकारी दी।
समापन सत्र में निर्देश
कार्यक्रम के समापन अवसर पर वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान, कृषि विज्ञान केन्द्र, जहानाबाद ने अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि प्रत्येक कृषि सखी अपने गाँव जाकर कम से कम 125 किसानों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण देगी। उन्होंने इसे “ग्राम स्तर पर प्राकृतिक खेती मिशन को मजबूत करने का निर्णायक कदम” बताया।
अधिकारियों का संदेश
इस अवसर पर जिला कृषि पदाधिकारी सुश्री सम्भावना ने कहा—
“आने वाले समय में प्राकृतिक खेती मील का पत्थर साबित होगी। कृषि सखियाँ किसानों को रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों से अवगत कराएँ और उन्हें प्राकृतिक खेती की ओर प्रेरित करें।”
वहीं सहायक निदेशक (मृदा विज्ञान) एवं नोडल अधिकारी – प्राकृतिक खेती सुश्री स्वेता ने कहा कि कृषि सखियाँ गाँव-गाँव तक पहुँचने वाला मुख्य माध्यम होंगी। उन्होंने बताया कि जिले में 750 किसानों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है और इसे पूरा करने में कृषि सखियों की अहम भूमिका होगी।
मास्टर ट्रेनर्स की भूमिका
मास्टर ट्रेनर डॉ. वाजिद हसन ने प्रतिभागियों को प्राकृतिक खेती में उपयोग होने वाले प्रमुख इनपुट जैसे बीजामृत, नीमास्त्र, घन जीवामृत, अग्न्यास्त्र और अमृत जल तैयार करने की विधियाँ सिखाईं। उन्होंने प्रयोगात्मक तरीके से इन तकनीकों का प्रदर्शन कर कृषि सखियों को आत्मनिर्भर बनाने पर बल दिया।
साथ ही, मास्टर ट्रेनर सुश्री वर्षा कुमारी ने पाँच दिनों तक मौखिक एवं व्यवहारिक दोनों माध्यमों से प्रशिक्षण प्रदान किया। उन्होंने हर चरण को विस्तार से समझाया और व्यावहारिक अभ्यास कराकर प्रशिक्षणार्थियों में आत्मविश्वास जगाया।
प्रशिक्षण की विशेषताएँ
इस पाँच दिवसीय कार्यक्रम की खास बातें थीं—
- प्राकृतिक खेती की परिकल्पना, आवश्यकता और लाभों पर विशेष चर्चा।
- विभिन्न जैविक घोलों एवं मिश्रणों की निर्माण प्रक्रिया का व्यवहारिक प्रशिक्षण।
- मिट्टी की उर्वरता बनाए रखते हुए किसानों की लागत घटाने पर जोर।
- कृषि सखियों को “प्रशिक्षक” के रूप में तैयार करना, ताकि वे गाँव-गाँव जाकर किसानों को प्रशिक्षित कर सकें।
विशेष उपस्थिति
समापन सत्र में डॉ. दिनेश महतो, डॉ. निराला, श्री गणपति सहित कृषि विज्ञान केन्द्र के अन्य कर्मी भी मौजूद रहे। इन सभी ने अपने विचार रखे और प्रशिक्षण की उपयोगिता पर प्रकाश डाला।
निष्कर्ष
यह पाँच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम कृषि सखियों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुआ। अब ये सखियाँ अपने-अपने गाँवों में जाकर किसानों को प्राकृतिक खेती की विधियों से परिचित कराएँगी। इससे एक ओर जहाँ किसानों की आय बढ़ेगी, वहीं दूसरी ओर मिट्टी, जल और पर्यावरण संरक्षण में भी उल्लेखनीय योगदान मिलेगा।
कृषि विज्ञान केन्द्र, जहानाबाद की यह पहल ग्रामीण कृषि विकास और प्राकृतिक खेती मिशन को नई दिशा प्रदान करने वाला मील का पत्थर मानी जा रही है।
Jehanabad News: Five-day Krishi Sakhi training program concluded, natural farming will get a new dimension
Author: AK
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