बिहार के गयाजी में पितृपक्ष मेले का शुभारंभ। लालू प्रसाद यादव परिवार संग विष्णुपद मंदिर पहुंचे और पितरों की शांति हेतु पिंडदान किया।
Lalu Yadav Performs Pind Daan at Gaya Pitrapaksha Mela 2025
गयाजी पितृपक्ष मेला 2025: लालू यादव ने परिवार संग किया पिंडदान
परिचय
बिहार का गया जिला हिंदू धर्मावलंबियों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां हर साल पितृपक्ष मेला आयोजित होता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु अपने पितरों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना के लिए पिंडदान करने आते हैं। इस बार 6 सितंबर से शुरू होकर 21 सितंबर तक चलने वाले मेले में देश-विदेश से श्रद्धालु उमड़े हुए हैं। इसी क्रम में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और बहू राजश्री यादव भी पूरे परिवार सहित गयाजी पहुंचे और विष्णुपद मंदिर में पिंडदान किया।


पितृपक्ष मेले का महत्व
मोक्ष की पवित्र धरती गया
गया को मोक्षभूमि माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि यहां पिंडदान करने से पूर्वजों को मुक्ति मिलती है और उनकी आत्मा को शांति प्राप्त होती है। यही कारण है कि यहां हर साल पितृपक्ष के दौरान लाखों लोग जुटते हैं।
15 दिवसीय धार्मिक आयोजन
पितृपक्ष मेला 15 दिनों तक चलता है। इस दौरान श्रद्धालु फल्गु नदी और विष्णुपद मंदिर जैसे पवित्र स्थलों पर पिंडदान करते हैं। कहा जाता है कि यहां किया गया तर्पण और पिंडदान सबसे अधिक फलदायी माना जाता है।
लालू प्रसाद यादव का पितृकर्म
स्वास्थ्य के बावजूद आस्था
राजद सुप्रीमो लालू यादव का स्वास्थ्य ठीक नहीं है, फिर भी वे अपनी इच्छा शक्ति और आस्था के बल पर गयाजी पहुंचे। तेजस्वी यादव ने बताया कि उनके पिता ने विष्णुपद मंदिर आकर भगवान विष्णु के दर्शन करने और पितरों की शांति हेतु पिंडदान करने की इच्छा प्रकट की थी।
पारंपरिक विधि से अनुष्ठान
लालू यादव ने परिवार सहित विष्णुपद मंदिर के 16 वेदी स्थल पर पिंडदान किया। इस दौरान पूरा अनुष्ठान मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष शंभूलाल विट्ठल के नेतृत्व में हुआ।
नेताओं की उपस्थिति और संदेश
विधायक कुमार सर्वजीत का बयान
बोधगया के विधायक कुमार सर्वजीत ने कहा कि लालू यादव का पूरे परिवार के साथ पितृपक्ष मेला आना और भगवान विष्णु के दरबार में पिंडदान करना यह दर्शाता है कि धर्म और राजनीति मिलकर समाज को भाईचारे और एकता का संदेश देते हैं।
सामाजिक सद्भाव पर जोर
उन्होंने कहा कि पवित्र विष्णुपद मंदिर और भगवान बुद्ध की धरती से यही संदेश जाता है कि हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सभी धर्म आपस में भाई-भाई हैं।
लालू यादव के राजनीतिक कटाक्ष
प्रधानमंत्री मोदी पर टिप्पणी
पिंडदान के बाद लालू यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जब भी पीएम मोदी गया आते हैं तो केवल राजनीतिक सभाएं कर लौट जाते हैं, जबकि उन्हें विष्णुपद मंदिर और भगवान बुद्ध की धरती पर आकर शांति और सद्भाव का संदेश लेना चाहिए।
जनता के लिए संदेश
लालू यादव ने यह भी कहा कि उनका पूरा परिवार बिहार और पूरे देश की खुशहाली और शांति के लिए प्रार्थना करता है।
गयाजी में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
देश-विदेश से आए श्रद्धालु
हर साल की तरह इस बार भी गयाजी में लाखों श्रद्धालु पहुंचे हैं। भारत के विभिन्न राज्यों के अलावा नेपाल, म्यांमार, श्रीलंका और थाईलैंड से भी बड़ी संख्या में लोग यहां पिंडदान के लिए आए हैं।
धार्मिक पर्यटन का केंद्र
पितृपक्ष मेला न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि यह बिहार के पर्यटन को भी नई ऊंचाई देता है। होटलों और धर्मशालाओं में श्रद्धालुओं की भीड़ देखी जा रही है।
विष्णुपद मंदिर का धार्मिक महत्व
पौराणिक मान्यता
गया का विष्णुपद मंदिर सबसे पवित्र स्थलों में से एक है। मान्यता है कि यहीं पर भगवान विष्णु ने राक्षस गयासुर का वध किया था और उनके पांव का निशान आज भी मंदिर में मौजूद है।
पितृकर्म का केंद्र
यह मंदिर पितृकर्म और पिंडदान के लिए प्रमुख स्थल है। श्रद्धालु यहां आकर अपने पितरों की आत्मा के मोक्ष के लिए प्रार्थना करते हैं।
पितृपक्ष मेला 2025 की विशेषताएं
- मेला 6 से 21 सितंबर 2025 तक चलेगा।
- अनुमानित 15 से 20 लाख श्रद्धालु गयाजी पहुंचेंगे।
- सुरक्षा और सुविधा के लिए प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए हैं।
- कई बड़े राजनेता और प्रसिद्ध हस्तियां भी यहां पिंडदान कर रही हैं।
- स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन को इससे बड़ा सहारा मिलता है।
सामाजिक और सांस्कृतिक संदेश
पितरों का सम्मान
पितृपक्ष मेला हमें यह सिखाता है कि अपने पूर्वजों को याद करना और उनकी आत्मा की शांति के लिए कर्मकांड करना भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है।
भाईचारे की परंपरा
लालू यादव का परिवार सहित पिंडदान करना इस बात का प्रतीक है कि समाज के हर वर्ग को अपने धर्म और परंपरा से जुड़े रहना चाहिए।
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Author: AK
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