रवि, अप्रैल 12, 2026

Bihar Highway Land Scam: मुजफ्फरपुर-बरौनी फोर लेन परियोजना संकट में

English Bihar Highway Land Scam Muzaffarpur-Barauni Four Lane Project in Danger

बिहार में मुजफ्फरपुर-बरौनी फोर लेन परियोजना पर संकट। हाईवे की जमीन की अवैध खरीद-बिक्री और अतिक्रमण से एनएचएआई ने जताई चिंता।

English: Bihar Highway Land Scam: Muzaffarpur-Barauni Four Lane Project in Danger


बिहार में हाईवे की जमीन पर घोटाला, मुजफ्फरपुर-बरौनी फोर लेन परियोजना खतरे में

प्रस्तावना

बिहार में विकास कार्यों और बुनियादी ढांचे की योजनाओं पर अक्सर विवाद और बाधाओं की खबरें आती रहती हैं। हाल ही में सामने आया मुजफ्फरपुर-बरौनी फोर लेन प्रोजेक्ट का मामला भी कुछ ऐसा ही है। जिस जमीन पर राष्ट्रीय राजमार्ग (National Highway) का निर्माण होना था, उसी जमीन की अवैध बिक्री और दाखिल-खारिज किए जाने की खबर ने पूरे जिले में हलचल मचा दी है। यह सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि एक बड़े घोटाले की ओर इशारा करता है।


मुजफ्फरपुर-बरौनी फोर लेन का महत्व

मुजफ्फरपुर और बरौनी के बीच बनने वाला NH-28 फोर लेन बिहार के लिए बेहद अहम है।

  • यह मार्ग उत्तर बिहार को पटना और दक्षिण बिहार से जोड़ता है।
  • इससे औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता।
  • किसानों और व्यापारियों के लिए परिवहन आसान हो जाता।

लेकिन इस परियोजना पर अतिक्रमण और अवैध जमीन बिक्री के कारण काम अटकता नजर आ रहा है।


हाईवे की जमीन पर अवैध बिक्री और निर्माण

जमीन खरीद-बिक्री का खेल

खबरों के अनुसार, मुशहरी अंचल में हाईवे के लिए अधिग्रहित जमीन न सिर्फ बेची जा रही है बल्कि उसका दाखिल-खारिज भी किया जा रहा है।

  • अतरदह मौजे से लेकर रामदयालु और कच्ची पक्की इलाके तक बड़ी संख्या में लोगों ने NHAI की जमीन पर घर और कॉम्प्लेक्स बना लिए हैं।
  • यह सब स्थानीय भू-माफिया और प्रशासन की मिलीभगत से संभव हो रहा है।

अतिक्रमण से परियोजना पर असर

अवैध निर्माण के चलते सड़क चौड़ीकरण का कार्य बाधित है।

  • परियोजना निदेशक ने कई बार जिला प्रशासन को पत्र लिखकर अतिक्रमण हटाने की मांग की।
  • फरवरी में भी अतिक्रमण की तस्वीरें भेजकर कार्रवाई का आग्रह किया गया था।

मुआवजा पहले ही दिया जा चुका था

दिलचस्प तथ्य यह है कि इस जमीन का अधिग्रहण 1963-64 में ही किया जा चुका था।

  • सरकार ने उस समय सभी किसानों और रैयतों को मुआवजा भी दे दिया था।
  • यानी अब कोई व्यक्ति इस जमीन पर न मालिकाना हक जताता है और न ही उसकी खरीद-बिक्री वैध हो सकती है।

फिर भी भू-माफिया ने लोगों को गुमराह कर यह जमीन बेचना शुरू कर दिया।


प्रशासनिक उदासीनता और विवाद

सीओ का बयान

मुशहरी के अंचलाधिकारी (CO) महेंद्र प्रताप शुक्ला का कहना है कि यह मामला उनके संज्ञान में नहीं था।
लेकिन सवाल उठता है कि बिना अंचल अधिकारी की संलिप्तता या जानकारी के, जमीन का दाखिल-खारिज कैसे संभव हुआ?

डीएम को लिखे गए पत्र

NHAI के परियोजना निदेशक आशुतोष सिन्हा ने जिले के डीएम को कई बार पत्र लिखकर स्थिति से अवगत कराया।

  • पत्र में कहा गया कि लगातार शिकायतों के बावजूद जमीन की बिक्री रुक नहीं रही।
  • अतिक्रमणकारियों को वैधता देने के लिए दाखिल-खारिज भी किया जा रहा है।

भू-माफिया का खेल और अवैध कब्जा

बिहार में भू-माफियाओं का नेटवर्क काफी मजबूत माना जाता है।

  • सरकारी जमीन, मठ-मंदिर की जमीन और स्वास्थ्य केंद्र की जमीन तक को बेचने की घटनाएं सामने आती रही हैं।
  • हाल ही में कुढ़नी और कांटी इलाके में भी सरकारी विभाग की जमीन की बिक्री के मामले दर्ज हुए थे।

मुजफ्फरपुर-बरौनी हाईवे की जमीन पर भी इन्हीं माफियाओं ने अपना कब्जा जमा लिया है।


परियोजना पर संकट

अगर जमीन पर अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो:

  1. फोर लेन निर्माण अधर में लटक जाएगा।
  2. निवेश और औद्योगिक विकास पर असर पड़ेगा।
  3. यातायात जाम और दुर्घटनाओं की समस्या बनी रहेगी।
  4. केंद्र सरकार की योजनाएं बाधित होंगी।

एनएचएआई की चिंता

NHAI का कहना है कि इस परियोजना के लिए हर इंच जमीन जरूरी है।

  • रामदयालु नगर के पास रेलवे ओवरब्रिज (ROB) के साथ सड़क का गोलाकार प्रारूप प्रस्तावित है।
  • यदि जमीन पर कब्जा हटाया नहीं गया तो यह निर्माण संभव नहीं होगा।

जनता पर असर

इस विवाद का सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा।

  • रोज़ यात्रा करने वाले लोगों को जाम और खराब सड़कों की परेशानी झेलनी होगी।
  • नए रोजगार और व्यावसायिक अवसर धीमे पड़ जाएंगे।
  • जनता के टैक्स से बनने वाली परियोजनाएं अधूरी रह जाएंगी।

समाधान और आगे का रास्ता

कठोर कार्रवाई जरूरी

  • जिला प्रशासन को तुरंत जमीन की नापी और सत्यापन करना चाहिए।
  • अतिक्रमणकारियों पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
  • भू-माफियाओं के खिलाफ FIR दर्ज कर गिरफ्तारी की जानी चाहिए।

पारदर्शिता लाना जरूरी

  • जमीन अधिग्रहण और भुगतान प्रक्रिया को डिजिटल और पारदर्शी बनाना चाहिए।
  • स्थानीय स्तर पर शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करना जरूरी है।

निष्कर्ष

मुजफ्फरपुर-बरौनी फोर लेन प्रोजेक्ट बिहार के विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। लेकिन हाईवे की जमीन पर अवैध बिक्री और अतिक्रमण इस परियोजना को खतरे में डाल रहा है। अगर समय रहते कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह न केवल एक बड़ा घोटाला साबित होगा बल्कि बिहार की जनता के विकास और सुविधा पर भी पानी फेर देगा।


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Author: AK

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