गुरु, अप्रैल 2, 2026

टूट गई परंपरा: नहीं बन पाई सहमति, 72 सालों में पहली बार लोकसभा अध्यक्ष का होगा चुनाव, एनडीए ने ओम बिड़ला और कांग्रेस ने के. सुरेश को उतारा मैदान में

मोदी सरकार के लिए तीसरे कार्यकाल में संसद भवन में अपने पहले और दूसरे टर्म की अपेक्षा इस बार परिस्थितियां इतनी आसान नहीं होने वाली हैं। इस बार कांग्रेस समेत विपक्षी दल शुरू से ही केंद्र सरकार पर हावी होते दिखाई दे रहे हैं। विपक्ष के आक्रामक तेवरों को देखकर लग रहा है कि इस बार पीएम मोदी के लिए कई फैसले लेना और सरकार चलाना मुश्किल भरा होने वाला है। सोमवार, 24 जून से शुरू हुए लोकसभा के पहले सत्र विपक्ष ने अपने इरादे जाहिर कर दिए हैं।

Om Birla from the NDA and K Suresh from the INDIA file nominations for the Speaker’s post

18वीं लोकसभा के पहले सत्र का मंगलवार को दूसरा दिन है। लोकसभा स्पीकर को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव बढ़ गया है। एनडीए प्रत्याशी ओम बिरला के खिलाफ इंडिया ब्लॉक ने भी अपना उम्मीदवार उतार दिया है। पहली बार स्पीकर पद के लिए चुनाव होगा। 26 जून को सुबह 11 बजे स्पीकर पद के लिए वोटिंग होगी। संसद भवन में लोकसभा अध्यक्ष पद के लिए ओम बिरला के पक्ष में एनडीए के नेताओं ने 10 सेट में नामांकन दाखिल किया। इस दौरान भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्‌डा, गृह मंत्री अमित शाह और एनडीए के अन्य नेता मौजूद थे।

वहीं, विपक्षी की ओर से कांग्रेस सांसद के. सुरेश ने लोकसभा अध्यक्ष पद के लिए बिरला के खिलाफ 3 सेट में नामांकन दाखिल किया।कांग्रेस के संगठन महासचिव के सी वेणुगोपाल और द्रमुक नेता टीआर बालू लोकसभा अध्यक्ष के पद के लिए राजग उम्मीदवार का समर्थन करने से इनकार करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के कार्यालय से बाहर आ गए। वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि सरकार ने उपाध्यक्ष पद विपक्ष को देने की प्रतिबद्धता नहीं जताई। बता दें कि पिछली बार ओम बिरला ही लोकसभा के स्पीकर थे, जबकि के. सुरेश आठ बार के सांसद रह चुके हैं। केवल स्पीकर पद को लेकर ही नहीं इससे पहले प्रोटेम स्पीकर के पद को लेकर भी सरकार और विपक्ष के बीच विवाद देखा गया था। जब सरकार ने भर्तृहरि महताब को प्रोटेम स्पीकर बना दिया था। विपक्ष का आरोप था कि सरकार ने के. सुरेश की वरिष्ठता को नजरअंदाज किया है। इसी के साथ देश में बीते 72 साल से चली आ रही परंपरा टूट गई।

दरअसल, अब तक लोकसभा में अध्यक्ष सर्वसम्मति से ही चुना जाता रहा है। पिछली बार भी ऐसा ही हुआ था। हालांकि, इस बार दोनों ओर से उम्मीदवारों के नामांकन के साथ ही सर्वसम्मति से इस पद पर होने वाली निर्वाचन की बीते 17 लोकसभा से जारी परंपरा टूट गई ।नामांकन से पहले राहुल गांधी ने कहा- कांग्रेस अध्यक्ष के पास स्पीकर के समर्थन के लिए राजनाथ सिंह का फोन आया था। विपक्ष ने साफ कहा है कि हम स्पीकर को समर्थन देंगे, लेकिन विपक्ष को डिप्टी स्पीकर का पद मिलना चाहिए। राजनाथ सिंह ने दोबारा फोन करने की बात कही थी, हालांकि अब तक कॉल नहीं आया। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि पहले उपाध्यक्ष कौन होगा ये तय करें फिर अध्यक्ष के लिए समर्थन मिलेगा, इस प्रकार की राजनीति की हम निंदा करते हैं। स्पीकर किसी सत्तारूढ़ पार्टी या विपक्ष का नहीं होता है वो पूरे सदन का होता है, वैसे ही उपाध्यक्ष भी किसी पार्टी या दल का नहीं होता है पूरे सदन का होता है। किसी विशिष्ट पक्ष का ही उपाध्यक्ष हो ये लोकसभा की किसी परंपरा में नहीं है। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि ये किसी पक्ष का चुनाव नहीं होता, स्पीकर का पद पूरे सदन के लिए होता है। आजादी के बाद से मुझे नहीं याद कि इस तरीके से पद को लेकर चुनाव हो। जिस तरीके से विपक्ष की इस बार भूमिका रही है और शर्तों के साथ जिस तरीके से विपक्ष सामने आया है कि डिप्टी स्पीकर का पद पर सहमति करें। हम सब उस पर चर्चा के लिए तैयार थे पर उसके बावजूद उस पर अड़ना मुझे नहीं लगता कि ये उचित है। फिलहाल जीत सुनिश्चित है, उसमें कहीं कोई शंका की बात नहीं है।

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Author: AK

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