बुध, फ़रवरी 4, 2026

Bihar Unveils Largest Shivling in Motihari: बिहार में विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग स्थापित

World’s Largest Shivling Installed in Bihar

बिहार के मोतिहारी में विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग की ऐतिहासिक स्थापना हुई। सीएम नीतीश सहित पूरी सरकार ने पूजा-अर्चना की। जानें पूरा विवरण।

World’s Largest Shivling Installed in Bihar


परिचय

बिहार की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को एक नया गौरवपूर्ण अध्याय मिल गया है। मोतिहारी जिले के कैथवलिया स्थित विराट रामायण मंदिर परिसर में विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग की स्थापना के साथ ही राज्य आध्यात्मिक पर्यटन के मानचित्र पर और भी मजबूती से उभर आया है। इस ऐतिहासिक अवसर पर न केवल हजारों श्रद्धालु पहुंचे, बल्कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पूरी बिहार सरकार के साथ स्वयं भगवान शिव के दर्शन करने आए। पुष्पवर्षा, वैदिक मंत्रोच्चार और हर-हर महादेव के जयघोष के बीच यह आयोजन बिहार के धार्मिक इतिहास में एक यादगार पल बन गया।


बिहार में विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग: ऐतिहासिक क्षण

शनिवार का दिन बिहार के लिए विशेष महत्व लेकर आया। पूर्वी चंपारण जिले के मोतिहारी में स्थापित यह विशाल शिवलिंग न केवल आकार में अद्वितीय है, बल्कि इसकी आध्यात्मिक महत्ता भी अत्यंत गहरी है। जैसे ही हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा हुई, पूरा मंदिर परिसर भक्ति और श्रद्धा के रंग में रंग गया।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, दोनों उपमुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और अन्य वरिष्ठ अधिकारी इस कार्यक्रम में उपस्थित रहे। यह दृश्य इस बात का प्रमाण था कि यह आयोजन केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।


विराट रामायण मंदिर की बढ़ती महिमा

मंदिर परिसर का आध्यात्मिक वातावरण

विराट रामायण मंदिर पहले से ही बिहार के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। अब यहां भगवान शिव का यह भव्य स्वरूप स्थापित होने से इसकी प्रतिष्ठा और बढ़ गई है। मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रों की गूंज, मंगल गीतों की स्वर लहरियां और भक्तों की श्रद्धा ने वातावरण को पूर्णतः आध्यात्मिक बना दिया।

श्रद्धालुओं की भारी भीड़

इस आयोजन को देखने और इसमें भाग लेने के लिए बिहार के विभिन्न जिलों से हजारों श्रद्धालु पहुंचे। महिलाएं मंगल गीत गाते हुए, युवक हर-हर महादेव का नारा लगाते हुए और बुजुर्ग श्रद्धा से नतमस्तक होकर भगवान शिव का आशीर्वाद लेने आए।


सहस्त्र शिवलिंगम: एक अद्भुत कृति

एक ही पत्थर से बनी अनोखी संरचना

यह शिवलिंग तमिलनाडु के महाबलीपुरम में काले ग्रेनाइट पत्थर से तैयार किया गया है। इसे तैयार करने में लगभग दस वर्षों का समय लगा। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें 1008 छोटे शिवलिंग की आकृतियां उकेरी गई हैं, इसी कारण इसे “सहस्त्र शिवलिंगम” कहा जाता है।

आकार और वजन

  • लंबाई: 33 फीट
  • गोलाई: 33 फीट
  • वजन: लगभग 210 मीट्रिक टन

यह आंकड़े अपने आप में इसकी विशालता को दर्शाते हैं और इसे विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग बनाते हैं।


धार्मिक मान्यता और आध्यात्मिक महत्व

शास्त्रीय विश्वास

शास्त्रों के अनुसार इस शिवलिंग पर जलाभिषेक और पूजा करने से 1008 शिवलिंग की पूजा का फल प्राप्त होता है। माना जाता है कि इससे मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

माघ कृष्ण चतुर्दशी का महत्व

शिवलिंग की स्थापना माघ महीने की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को की गई, जिसे भगवान शिव की उत्पत्ति से जोड़ा जाता है। इसलिए इस दिन का चयन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जाता है।


मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की उपस्थिति का संदेश

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का इस कार्यक्रम में पूरे मंत्रिमंडल के साथ उपस्थित होना यह दर्शाता है कि बिहार सरकार धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण और विकास को गंभीरता से ले रही है। यह आयोजन न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि बिहार के पर्यटन विकास की दिशा में भी एक बड़ा कदम है।


प्रशासनिक व्यवस्था और सुरक्षा इंतजाम

भीड़ प्रबंधन की तैयारी

श्रद्धालुओं की भारी संख्या को देखते हुए मोतिहारी प्रशासन ने विशेष व्यवस्था की थी। प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग, सात ड्रॉप गेट और ट्रैफिक पुलिस की तैनाती की गई थी, ताकि आवागमन सुचारु रहे।

सुरक्षा व्यवस्था

कार्यक्रम स्थल और आसपास के क्षेत्रों में पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया था। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से यातायात नियमों का पालन करने की अपील की, ताकि आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।


बिहार के लिए धार्मिक पर्यटन का नया केंद्र

रोजगार और स्थानीय विकास

इस प्रकार के बड़े धार्मिक आयोजन से स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलते हैं। होटल, परिवहन, दुकानें और अन्य सेवाएं बढ़ती हैं, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है।

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान

“Bihar Shivling” और “विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग” जैसे शब्द अब केवल धार्मिक नहीं, बल्कि पर्यटन और सांस्कृतिक पहचान के भी प्रतीक बनते जा रहे हैं। आने वाले समय में यह स्थल देश-विदेश के श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करेगा।


युवाओं और नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा

आज की युवा पीढ़ी के लिए यह आयोजन अपनी संस्कृति और परंपराओं से जुड़ने का एक सशक्त माध्यम है। इससे उन्हें अपनी जड़ों को समझने और भारतीय आध्यात्मिक विरासत पर गर्व करने का अवसर मिलता है।


भविष्य की योजनाएं और संभावनाएं

विराट रामायण मंदिर परिसर में आगे और भी धार्मिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के आयोजन की योजना है। इससे यह क्षेत्र बिहार के प्रमुख तीर्थ स्थलों में शामिल हो सकता है और राज्य के समग्र विकास में योगदान देगा।


निष्कर्ष

मोतिहारी में विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग की स्थापना बिहार के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय है। यह केवल एक धार्मिक घटना नहीं, बल्कि सांस्कृतिक गौरव, पर्यटन विकास और सामाजिक एकता का प्रतीक है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की उपस्थिति और हजारों श्रद्धालुओं की भागीदारी ने इस आयोजन को अविस्मरणीय बना दिया। आने वाले वर्षों में यह स्थल निश्चय ही बिहार की पहचान को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।

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AK
Author: AK

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