बुध, फ़रवरी 4, 2026

Will US Impose 500% Tariff on India? भारत पर 500% टैरिफ का खतरा? रूस से तेल खरीद पर US की सख्ती

Will US Impose 500% Tariff on India Over Russian Oil?

रूस से तेल खरीद पर अमेरिका की सख्ती बढ़ी। ट्रंप प्रशासन के 25% टैरिफ के बाद भारत की नीति बदली। अब 500% टैरिफ की आशंका क्या है?

Will US Impose 500% Tariff on India Over Russian Oil?


भूमिका: क्या भारत पर मंडरा रहा है 500% टैरिफ का खतरा?

अंतरराष्ट्रीय राजनीति और वैश्विक अर्थव्यवस्था में ऊर्जा नीति हमेशा से सबसे संवेदनशील मुद्दों में से एक रही है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद यह और भी ज्यादा चर्चा में आ गई है। इसी कड़ी में अब भारत और अमेरिका के रिश्तों को लेकर एक नई बहस शुरू हो गई है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के हालिया बयान ने हलचल मचा दी है, जिसमें उन्होंने दावा किया कि अमेरिका द्वारा लगाए गए 25 प्रतिशत टैरिफ के दबाव में भारत ने रूस से तेल की खरीद लगभग बंद कर दी है। इसके साथ ही यह संकेत भी दिए गए हैं कि भविष्य में रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक का भारी टैरिफ लगाया जा सकता है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या भारत पर सचमुच इतना बड़ा टैरिफ बम फूट सकता है।


अमेरिका का नया रुख और ट्रंप प्रशासन की रणनीति

डोनल्ड ट्रंप प्रशासन की व्यापार और विदेश नीति हमेशा से सख्त रुख के लिए जानी जाती रही है। ट्रंप ने अपने कार्यकाल में “अमेरिका फर्स्ट” नीति को आगे बढ़ाते हुए कई देशों पर टैरिफ लगाए थे। अब एक बार फिर वही रणनीति चर्चा में है।

यूक्रेन युद्ध के बाद बदली वैश्विक तेल राजनीति

यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद पश्चिमी देशों ने रूस पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए। इसका उद्देश्य रूस की अर्थव्यवस्था को कमजोर करना और युद्ध को रोकने के लिए दबाव बनाना था। इन प्रतिबंधों के कारण यूरोप और अमेरिका ने रूसी तेल और गैस से दूरी बना ली। लेकिन इसी दौरान भारत और चीन जैसे देशों ने रियायती दरों पर रूसी क्रूड ऑयल खरीदना शुरू किया।

भारत के लिए यह एक व्यावहारिक फैसला था। सस्ता तेल मिलने से घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद मिली। लेकिन अमेरिका को यह नीति रास नहीं आई।


स्कॉट बेसेंट का बयान और भारत का उदाहरण

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में भारत का उदाहरण देते हुए कहा कि ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए 25 प्रतिशत टैरिफ के बाद भारत ने रूसी तेल की खरीद काफी हद तक कम कर दी है। उनके अनुसार, यह दिखाता है कि अमेरिकी दबाव किस तरह देशों को अपनी नीति बदलने पर मजबूर कर सकता है।

क्या भारत ने सच में खरीद बंद कर दी?

भारत सरकार की ओर से इस दावे पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। हालांकि यह सच है कि हाल के महीनों में रूस से तेल आयात के आंकड़ों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। भारत ने हमेशा यह कहा है कि उसकी ऊर्जा नीति पूरी तरह बाजार की परिस्थितियों और राष्ट्रीय हितों पर आधारित है।


500 प्रतिशत टैरिफ का प्रस्ताव: कितना गंभीर है मामला?

अमेरिका में एक नया प्रस्तावित बिल चर्चा में है, जिसे सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने पेश किया है। इस बिल के तहत रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर कम से कम 500 प्रतिशत तक का टैरिफ लगाया जा सकता है।

IEPA कानून और ट्रंप की ताकत

स्कॉट बेसेंट के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप को इस तरह के कदम उठाने के लिए सीनेट की मंजूरी की अनिवार्यता नहीं है। वे International Emergency Economic Powers Act (IEPA) के तहत सीधे कार्रवाई कर सकते हैं। हालांकि सीनेट इस बिल को पास करके ट्रंप को और व्यापक अधिकार देना चाहती है।

यह बात भारत सहित कई देशों के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि 500 प्रतिशत टैरिफ किसी भी देश के लिए आर्थिक रूप से बेहद नुकसानदायक हो सकता है।


असली निशाना: चीन और यूरोप

हालांकि बयानबाजी में भारत का नाम लिया गया है, लेकिन अमेरिकी प्रशासन का असली गुस्सा चीन और यूरोप पर ज्यादा दिखता है।

चीन पर अमेरिका की नाराजगी

चीन इस समय रूसी तेल का सबसे बड़ा खरीदार माना जाता है। अमेरिका का आरोप है कि चीन रियायती दामों पर रूसी तेल खरीदकर मॉस्को को आर्थिक मदद पहुंचा रहा है, जिससे यूक्रेन युद्ध को जारी रखने में रूस को ताकत मिल रही है।

यूरोप की दोहरी नीति पर सवाल

अमेरिका का यह भी कहना है कि यूरोप चार साल बाद भी किसी न किसी रूप में रूसी ऊर्जा खरीद रहा है। बेसेंट ने इसे “अपने ही खिलाफ युद्ध को फाइनेंस करने” जैसा बताया। इस संदर्भ में भारत को एक उदाहरण के रूप में पेश किया गया कि कैसे दबाव डालकर नीति बदलाई जा सकती है।


भारत की ऊर्जा नीति: मजबूरी या रणनीति?

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता देश है। उसकी ऊर्जा जरूरतें बहुत बड़ी हैं और वह अपनी 80 प्रतिशत से अधिक तेल जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है।

सस्ते तेल की जरूरत

रूस से सस्ता तेल खरीदने का भारत का फैसला पूरी तरह आर्थिक था। वैश्विक बाजार में जब तेल की कीमतें बढ़ रही थीं, तब रूसी क्रूड ने भारत को राहत दी। इससे न सिर्फ सरकार को बल्कि आम उपभोक्ताओं को भी फायदा हुआ।

भारत का स्पष्ट तर्क

भारत ने कई बार कहा है कि वह किसी एक देश के इशारे पर अपनी ऊर्जा नीति नहीं बदल सकता। भारत के लिए सबसे जरूरी है कि उसकी जनता को सस्ती और सुरक्षित ऊर्जा मिले। यही वजह है कि भारत ने हमेशा “रणनीतिक स्वायत्तता” की नीति अपनाई है।


भारत-अमेरिका संबंधों पर असर

भारत और अमेरिका के रिश्ते पिछले कुछ वर्षों में काफी मजबूत हुए हैं। रक्षा, टेक्नोलॉजी, व्यापार और इंडो-पैसिफिक रणनीति में दोनों देश एक-दूसरे के करीबी साझेदार बन चुके हैं।

क्या टैरिफ से रिश्ते बिगड़ेंगे?

अगर अमेरिका सचमुच 500 प्रतिशत टैरिफ जैसे कदम उठाता है, तो इससे भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर गंभीर असर पड़ सकता है। भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार महंगा हो जाएगा, जिससे दोनों देशों को नुकसान होगा।

कूटनीतिक संतुलन की जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत इस मुद्दे पर कूटनीतिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश करेगा। भारत न तो अमेरिका को नाराज करना चाहता है और न ही अपनी ऊर्जा सुरक्षा से समझौता।


आगे की राह: भारत के सामने विकल्प

भारत के पास कुछ विकल्प मौजूद हैं, जिनके जरिए वह इस दबाव को संतुलित कर सकता है।

ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण

भारत पहले से ही मध्य पूर्व, अमेरिका और अफ्रीका जैसे क्षेत्रों से तेल आयात करता है। भविष्य में वह अपने स्रोतों को और विविध बना सकता है, ताकि किसी एक देश पर निर्भरता कम हो।

नवीकरणीय ऊर्जा पर जोर

सरकार सौर और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोतों पर भी तेजी से निवेश कर रही है। लंबी अवधि में यह रणनीति भारत की ऊर्जा निर्भरता को कम कर सकती है।


निष्कर्ष: क्या भारत पर गिरेगा 500% टैरिफ का बम?

फिलहाल 500 प्रतिशत टैरिफ का खतरा एक संभावित चेतावनी की तरह देखा जा रहा है। यह साफ है कि अमेरिका रूस को आर्थिक रूप से कमजोर करने के लिए हर संभव दबाव बनाना चाहता है। भारत का नाम लेकर उदाहरण दिया गया है, लेकिन असली लड़ाई चीन और यूरोप के साथ ज्यादा दिखती है।

भारत के लिए यह समय सावधानी और संतुलन का है। उसे अपनी ऊर्जा जरूरतों, आर्थिक हितों और कूटनीतिक रिश्तों के बीच सही तालमेल बैठाना होगा। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि अमेरिका अपनी धमकी को कितना आगे बढ़ाता है और भारत इस चुनौती का कैसे जवाब देता है।

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Author: AK

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