
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 74वें जन्मदिवस पर केंद्र की भाजपा सरकार ने अपने तीसरे कार्यकाल के 100 दिन का रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने पेश किया। मंगलवार को इस रिपोर्ट कार्ड को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने पेश किया। इस मौके पर केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव भी मौजूद रहे। गृहमंत्री शाह ने कहा कि देश 60 साल में पहली बार राजनीतिक स्थिरता और अपनी मजबूत विदेश नीति को देख रहा है। शाह ने इस दौरान जनगणना जातिगत जनगणना और एक राष्ट्र एक चुनाव पर भी दिल की बात कही। बता दें कि सरकार के कार्यकाल के दौरान एक देश एक चुनाव लागू करने की योजना है। साथ ही मणिपुर में शांति के लिए वे मैतेई और कुकी दोनों समुदायों से बात कर रहे हैं। तीसरे कार्यकाल के 100 दिन में मोदी सरकार ने 15 लाख करोड़ की योजनाएं शुरू कीं, टैक्स राहत दी और किसानों के खाते में 3 लाख करोड़ रुपए पहुंचाए। 100 दिन में 15 लाख करोड़ रुपए की योजनाएं शुरू की हैं। 14 स्तंभों में बांटा है। इन्फ्रास्ट्र्क्चर में 3 लाख करोड़ की परियोजनाएं शुरू कीं। बधावन में मेगा पोर्ट बनेगा। वाराणसी में लाल बहादुर शास्त्री इंटरनेशनल एयरपोर्ट, पश्चिम बंगाल में बागडोगरा, बिहार में बिहटा एयरपोर्ट, अगत्ती मिनिकॉय में नई एयर स्ट्रिप बनाकर पर्यटन को बढ़ावा दिया गया है। बेंगलुरु मेट्रो, पुणे मेट्रो, ठाणे इंटीग्रेटेड रिंग मेट्रो और कई मेट्रो प्रोजेक्ट भी लॉन्च किए गए हैं।

हालांकि कुछ ऐसे मौके भी तीसरे कार्यकाल के 100 दिनों में आए जब सरकार को अपने कदम पीछे भी खींचने पड़े। गृहमंत्री ने कहा कि नए कानूनों में इस तरह के प्रावधान किए गए हैं। जातिगत जनगणना के बारे में शाह ने कहा कि जब भी इसके बारे में घोषणा करेंगे। सभी चीजें सार्वजनिक की जाएंगी। वक्फ बोर्ड मामले में कुछ मुस्लिम संगठनों द्वारा मस्जिद के बाहर क्यूआर कोड चिपकाकर वक्फ बिल को रोकने वाले प्रयास के एक सवाल में उन्होंने कहा कि यह सारा काम देखने का जिम्मा संसदीय समिति को है। कुछ लोगों ने समिति से भी शिकायत की हैं। वह इस बारे में टिप्पणी नहीं कर सकते। वन नेशन, वन इलेक्शन वाले मामले में उन्होंने कहा कि इसी सरकार के कार्यकाल में हम इसे लागू कर देंगे। नक्सल प्रभावित इलाकों के लिए भी उन्होंने ढेर सारी योजनाओं के बारे में बताया। चुनाव नतीजों के बाद मोदी की लोकप्रियता को लेकर सवाल खड़े किए गए। इन नतीजों के बाद पहली बार राज्यों के चुनाव होने जा रहे हैं। पहला चुनाव हरियाणा और जम्मू-कश्मीर का है उसके बाद तीन और राज्यों के चुनाव होने वाले हैं। इन राज्यों में भी बेहतर प्रदर्शन करने का दबाव है। 5 अक्टूबर को होने वाले हरियाणा के चुनाव और नवंबर में संभावित महाराष्ट्र के चुनावों में बीजेपी के सामने सत्ता बचाने की चुनौती है। कई सर्वे में हरियाणा में बीजेपी की स्थिति चुनाव में ठीक नहीं बताई जा रही है। वहीं महाराष्ट्र में सहयोगी दलों के साथ पार्टी कैसे आगे बढ़ेगी इस पर भी नजर है। जनवरी और फरवरी तक होने वाले झारखंड और दिल्ली के चुनावों में भी बीजेपी के सामने बड़ी चुनौती है। भले ही इन चुनाव नतीजों का असर सरकार के ऊपर कुछ नहीं पड़ेगा लेकिन नतीजों को अपने-अपने तरीके से राजनीतिक दल पेश करेंगे।
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Author: AK
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