
देश की प्रसिद्ध शास्त्रीय गायिका डॉ. प्रभा अत्रे का शनिवार को निधन हो गया। 92 साल की आयु में उन्होंने पुणे में अंतिम सांस ली। दिल का दौरा पड़ने के बाद उन्हें पुणे के दिनानाथ मंगेशकर अस्पताल लेकर गए थे, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दिया। डॉ प्रभा के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत तमाम नेताओं ने श्रद्धांजलि दी है। दिग्गज गायिका हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के किराना घराने से जुड़ी थीं। संगीत के क्षेत्र में योगदान के लिए उन्हें भारत सरकार द्वारा तीनों प्रतिष्ठित पद्म पुरस्कारों से भी सम्मानित किया था। गायिका प्रभा अत्रे ने किराना घराना के सुरेश बाबू माने और हीराबाई बड़ोदकर से क्लासिकल म्यूजिक सीखा था। शास्त्रीय गायिका होने के अलावा वह एक लेखिका भी थीं। विज्ञान और विधि में स्नातक प्राप्त अत्रे ने संगीत में डॉक्टरेट की उपाधि हासिल की थीं। 13 सितंबर, 1932 को पुणे में जन्मीं प्रभा अत्रे की बचपन से ही म्यूजिक का शौक का था। इसी शौक को उन्होंने आगे बढ़ाया और कई बड़े-बड़े पुरस्कार अपने नाम किए। प्रभा अत्रे को साल 1990 में उन्हें पद्मश्री, साल 2002 में पद्म भूषण और साल 2022 में पदम विभूषण से सम्मानित किया गया। इनके अलावा भी उन्होंने कई पुरस्कार अपने नाम किए। वह एक राइटर भी रहीं। उन्होंने सिंगल स्टेज में 11 किताबें रिलीज की, जो एक वर्ल्ड रिकॉर्ड है। अत्रे ने अपने करियर के शुरुआत में स्टेज सिंगिंग एक्ट्रेस के रूप में काम किया। उन्होंने मराठी थिएटर क्लासिक्स में भी भूमिकाएं निभाईं थी, जिनमें ‘संशय-कल्लोल’, ‘मानापमान’, ‘सौभद्रा’ और ‘विद्याहरण’ जैसे संगीत नाटक शामिल थे।
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Author: AK
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