उत्तराखंड में गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब तक देश की सबसे बड़ी रोपवे परियोजना शुरू होगी। इससे धार्मिक पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।
Uttarakhand’s Biggest Ropeway Project: Easy Access to Hemkund Sahib
प्रस्तावना
भारत में धार्मिक पर्यटन हमेशा से लोगों की आस्था और संस्कृति का अहम हिस्सा रहा है। उत्तराखंड, जिसे देवभूमि कहा जाता है, में हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इन्हीं धार्मिक स्थलों में से एक है हेमकुंड साहिब, जो सिख धर्म का पवित्र तीर्थ स्थल है। लेकिन यहां तक पहुंचने का सफर बेहद कठिन और जोखिमभरा होता है। अब इस चुनौती को आसान बनाने के लिए उत्तराखंड में देश की सबसे बड़ी रोपवे परियोजना की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। यह रोपवे गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब तक बनेगा, जिससे श्रद्धालुओं की यात्रा न केवल सुरक्षित बल्कि सुविधाजनक भी हो जाएगी।
परियोजना की मुख्य विशेषताएँ
लंबाई और लागत
- प्रस्तावित रोपवे की कुल लंबाई लगभग 12.4 किलोमीटर होगी।
- इस परियोजना की अनुमानित लागत 2,730.13 करोड़ रुपये तय की गई है।
- इसे भारत की अब तक की सबसे बड़ी रोपवे परियोजना कहा जा रहा है।
सरकारों के बीच समझौता
- इस परियोजना के लिए केंद्र और उत्तराखंड सरकार के बीच लगभग 7,000 करोड़ रुपये के निवेश का समझौता हुआ है।
- इसके लिए राष्ट्रीय राजमार्ग लॉजिस्टिक्स एवं निर्माण लिमिटेड और राज्य सरकार के बीच संयुक्त विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) का गठन होगा।
हेमकुंड साहिब का महत्व
हेमकुंड साहिब सिख धर्म के लिए अत्यंत पवित्र तीर्थ स्थल है। समुद्र तल से लगभग 4,632 मीटर (15,200 फीट) की ऊंचाई पर स्थित यह स्थल श्रद्धालुओं के लिए आस्था और विश्वास का प्रतीक है।
- यहां तक पहुंचने के लिए तीर्थयात्रियों को पैदल कठिन चढ़ाई करनी पड़ती है।
- रास्ता ऊबड़-खाबड़ और खतरनाक है, जिससे बुजुर्गों और बीमार लोगों को विशेष कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
- रोपवे निर्माण से यह यात्रा सभी उम्र के श्रद्धालुओं के लिए आसान हो जाएगी।
मुख्यमंत्री धामी का बयान
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास हो रहे हैं।
- यह रोपवे परियोजना केवल एक परिवहन साधन नहीं, बल्कि आस्था और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक होगी।
- निर्माण कार्य में पर्यावरणीय मानकों और जनभावनाओं का पूरा ध्यान रखा जाएगा।
सिख संगठनों की प्रतिक्रिया
गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के अध्यक्ष एस. नरिंदर जीत सिंह बिंद्रा के नेतृत्व में विभिन्न सिख संगठनों ने मुख्यमंत्री धामी से मुलाकात की और प्रधानमंत्री मोदी तथा राज्य सरकार का आभार जताया।
बिंद्रा ने कहा:
- हेमकुंड साहिब तक पहुंचना अब तक बहुत कठिन और जोखिमभरा था।
- रोपवे निर्माण से लाखों श्रद्धालुओं की यात्रा सरल और सुरक्षित होगी।
- यह परियोजना स्थानीय लोगों के लिए भी आर्थिक और सामाजिक समृद्धि का मार्ग खोलेगी।
धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
पर्यटन का नया आयाम
रोपवे बनने के बाद उत्तराखंड धार्मिक पर्यटन का एक और बड़ा केंद्र बन जाएगा।
- हेमकुंड साहिब आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
- इससे स्थानीय होटल, दुकानें, परिवहन और अन्य सेवाओं की आय में बढ़ोतरी होगी।
चारधाम यात्रा से जुड़ाव
उत्तराखंड पहले से ही चारधाम यात्रा—केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री—के लिए प्रसिद्ध है।
- हेमकुंड साहिब रोपवे इस श्रृंखला में नया आयाम जोड़ेगा।
- राज्य की छवि एक धार्मिक पर्यटन हब के रूप में और मजबूत होगी।
पर्यावरण और विकास का संतुलन
परियोजना के निर्माण में पर्यावरणीय मानकों का पालन करना बेहद जरूरी है, क्योंकि यह इलाका संवेदनशील हिमालयी क्षेत्र में आता है।
- राज्य सरकार ने भरोसा दिलाया है कि निर्माण के दौरान प्राकृतिक संतुलन का पूरा ध्यान रखा जाएगा।
- आधुनिक तकनीक के उपयोग से पर्यावरणीय क्षति को न्यूनतम रखने की योजना है।
स्थानीय लोगों के लिए फायदे
रोपवे परियोजना केवल धार्मिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह स्थानीय लोगों के लिए भी बड़े फायदे लेकर आएगी।
- रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
- पर्यटन से जुड़ी सेवाओं में स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ेगी।
- क्षेत्र की आर्थिक प्रगति और सामाजिक विकास को गति मिलेगी।
चुनौतियाँ और संभावनाएँ
हर बड़ी परियोजना की तरह इस रोपवे के सामने भी कुछ चुनौतियाँ हैं—
- पहाड़ी इलाके में निर्माण कार्य कठिन और जोखिमभरा होगा।
- पर्यावरणीय मंजूरी और स्थानीय लोगों की सहमति आवश्यक होगी।
- मौसम की मार भी निर्माण कार्य को प्रभावित कर सकती है।
लेकिन इन चुनौतियों के बावजूद यह परियोजना धार्मिक और आर्थिक दृष्टि से अत्यधिक लाभकारी सिद्ध हो सकती है।
निष्कर्ष
उत्तराखंड में देश की सबसे बड़ी रोपवे परियोजना न केवल श्रद्धालुओं की आस्था को सम्मान देने का काम करेगी, बल्कि यह क्षेत्र की आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक उन्नति का मार्ग भी प्रशस्त करेगी। गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब तक यह रोपवे भारत के धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाई देगा।
इस परियोजना से करोड़ों श्रद्धालु बिना कठिनाई के हेमकुंड साहिब तक पहुंच सकेंगे और स्थानीय लोगों को रोज़गार और व्यवसाय के नए अवसर मिलेंगे। यह पहल केवल उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व की बात है।
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Author: AK
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