बुध, फ़रवरी 4, 2026

Uttarakhand News: उत्तराखंड में भारी बारिश से 54 सड़कें बंद, दो राष्ट्रीय राजमार्ग ठप

Uttarakhand Rains Block 54 Roads, Two National Highways Shut

उत्तराखंड में भारी बारिश से जोशीमठ-मलारी और घटियाबगड़-लिपुलेख हाईवे सहित 54 सड़कें बंद, चुनाव दल और यात्रियों को भारी दिक्कतें।

Uttarakhand Rains Block 54 Roads, Two National Highways Shut

उत्तराखंड में बारिश का कहर: दो राष्ट्रीय राजमार्ग समेत 54 सड़कें बंद

उत्तराखंड एक बार फिर भारी बारिश और भूस्खलन की चपेट में है। मानसून के कारण पहाड़ी जिलों में मूसलाधार बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। ताजा जानकारी के अनुसार, राज्य के विभिन्न हिस्सों में दो राष्ट्रीय राजमार्ग और कुल 54 सड़कें भूस्खलन और मलबा गिरने के कारण बंद हो गई हैं। इससे न केवल स्थानीय लोगों को भारी परेशानी हो रही है, बल्कि जोशीमठ से निकली मतदान टीमें भी अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच सकीं।

राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (State Emergency Operation Centre) ने बताया है कि चमोली और पिथौरागढ़ जिलों में स्थित दो प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग पूरी तरह से बंद हो चुके हैं। यह संकट सिर्फ यातायात का नहीं, बल्कि स्थानीय प्रशासन, यात्रियों और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर भी गंभीर असर डाल रहा है।


जोशीमठ-मलारी-नीती हाईवे: भारी चट्टान गिरने से अवरुद्ध

भापकुंड के पास मलबा गिरा, मतदान टीमें फंसीं

चमोली जिले में स्थित जोशीमठ-मलारी-नीती राष्ट्रीय राजमार्ग राज्य का एक महत्वपूर्ण मार्ग है, जो सीमावर्ती क्षेत्रों को मुख्य शहरों से जोड़ता है। यह मार्ग भापकुंड के पास भारी चट्टान और मलबा गिरने से पूरी तरह अवरुद्ध हो गया है।

इससे जोशीमठ से पंचायत चुनाव के लिए रवाना हुई 11 पोलिंग पार्टियां शाम तक मतदान स्थलों तक नहीं पहुंच सकीं। स्थानीय प्रशासन ने मतदान दलों को वैकल्पिक मार्ग से पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन भारी मलबा हटाने में समय लग रहा है।

यह घटना न केवल प्रशासनिक स्तर पर चुनौती पेश कर रही है, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को भी बाधित कर रही है, जो एक गंभीर चिंता का विषय है।


घटियाबगड़-लिपुलेख-गुंजी राष्ट्रीय राजमार्ग भी बंद

पिथौरागढ़ जिले में सड़कें बनीं जानलेवा

पिथौरागढ़ जिले में घटियाबगड़-लिपुलेख-गुंजी राष्ट्रीय राजमार्ग किलोमीटर 11 के पास लमारी क्षेत्र में अवरुद्ध हो गया है। यह मार्ग भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) और तीर्थयात्रियों के लिए प्रमुख कनेक्टिविटी है।

लिपुलेख दर्रे के पास स्थित यह मार्ग कैलाश मानसरोवर यात्रा और सीमा चौकियों तक पहुंचने के लिए बेहद अहम है। मार्ग बंद होने से न केवल सामरिक गतिविधियों पर असर पड़ा है, बल्कि सीमा पर तैनात जवानों के लिए भी आपूर्ति बाधित हो गई है।


राज्य भर में सड़कें बंद, सामान्य जनजीवन प्रभावित

जिलावार स्थिति

राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तराखंड के 11 जिलों में सड़कों की स्थिति इस प्रकार है:

  • उत्तरकाशी: 5 सड़कें बंद
  • टिहरी: 6 सड़कें बंद
  • रुद्रप्रयाग: 7 सड़कें बंद
  • पिथौरागढ़: 9 सड़कें बंद
  • पौड़ी: 11 सड़कें बंद
  • चमोली: 10 सड़कें बंद
  • देहरादून: 3 सड़कें बंद
  • नैनीताल, बागेश्वर, अल्मोड़ा: 1-1 सड़क बंद

इस प्रकार कुल मिलाकर 54 सड़कें अभी भी बंद हैं, जिनमें से कई मार्गों पर यातायात पूर्णतः ठप हो चुका है।


स्थानीय लोगों और यात्रियों को भारी मुश्किलें

रोजमर्रा की जरूरतें भी प्रभावित

राज्य की सड़कों की यह स्थिति केवल यात्रा तक सीमित नहीं है। गांवों में जरूरी सामान की आपूर्ति, मरीजों का अस्पताल पहुंचना, बच्चों का स्कूल जाना और व्यवसायिक गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि सड़क बंद होने से दवाइयां और राशन तक नहीं पहुंच पा रहा है। प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए प्रशासन की तैयारी पर सवाल उठ रहे हैं।


बारिश और भूस्खलन का बढ़ता खतरा

मौसम विभाग की चेतावनी

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अगले तीन दिनों तक राज्य के कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। खासकर पौड़ी, चमोली, रुद्रप्रयाग और टिहरी में भूस्खलन और बादल फटने की संभावना जताई गई है।

इस बीच राज्य सरकार ने अलर्ट जारी करते हुए स्कूलों को बंद रखने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है।


क्या कर रही है राज्य सरकार?

राहत कार्यों में तेजी

राज्य सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में PWD (लोक निर्माण विभाग), BRO (सीमा सड़क संगठन) और आपदा राहत बलों को तैनात किया है। जेसीबी और अन्य मलबा हटाने वाली मशीनें मौके पर भेजी गई हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि मतदान से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी जाए और पोलिंग पार्टियों को सुरक्षित मतदान केंद्रों तक पहुंचाया जाए।

दीर्घकालीन योजना की जरूरत

विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तराखंड जैसे भू-संवेदनशील राज्य में दीर्घकालिक बुनियादी ढांचे की योजना बनाना बेहद जरूरी है। केवल राहत कार्यों से समाधान नहीं होगा, बल्कि स्थायी और मजबूत सड़कें, ड्रेनेज सिस्टम और समय पर चेतावनी प्रणाली विकसित करनी होगी।


निष्कर्ष: पहाड़ की चुनौती, सड़कों की जरूरत

उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां कठिन जरूर हैं, लेकिन यहां के लोगों की जरूरतें, विकास और सुरक्षा को अनदेखा नहीं किया जा सकता। बार-बार भूस्खलन और बारिश से सड़कें बंद होना एक सामान्य घटना नहीं, बल्कि एक दीर्घकालीन आपदा प्रबंधन विफलता का संकेत है।

सरकार को चाहिए कि वह तात्कालिक राहत कार्यों के साथ-साथ स्थायी समाधान, पारदर्शी योजना और तकनीकी निवेश पर ध्यान दे। पहाड़ों में मजबूत सड़कें न केवल आवागमन का जरिया हैं, बल्कि जीवनरेखा हैं, जिन्हें सुरक्षित रखना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।


उत्तराखंड बारिश 2025, जोशीमठ मलारी हाईवे बंद, घटियाबगड़ लिपुलेख सड़क, उत्तराखंड सड़कें बंद, भूस्खलन से सड़कें प्रभावित

AK
Author: AK

! Let us live and strive for freedom ! Freelance Journalist ! Politics ! News Junky !

Relates News

Discover more from DW Samachar

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading