मोदी–पुतिन की हालिया सेल्फी पर अमेरिकी सांसदों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। जानें कैसे यह तस्वीर भारत–अमेरिका रिश्तों, ट्रेड पॉलिसी और वैश्विक साझेदारी पर नए सवाल खड़े करती है।
US Lawmakers React to Modi–Putin Selfie and Challenges in India–US Ties

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की हालिया मुलाकात न केवल कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रही, बल्कि वैश्विक राजनीति में भी इसका व्यापक प्रभाव दिखाई दिया। दोनों नेताओं की कार में ली गई सेल्फी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहसों को जन्म दिया। यह केवल एक साधारण तस्वीर नहीं थी; इसके राजनीतिक और रणनीतिक संकेत कहीं अधिक गहरे थे। खासतौर पर अमेरिका में, जहां सांसदों ने इस सेल्फी को ट्रंप प्रशासन की नीतियों के संदर्भ में एक बड़ा राजनीतिक संदेश बताया।
अमेरिकी सांसद सिडनी कामलागर-डोव और प्रमिला जयपाल की प्रतिक्रियाओं ने इस मुद्दे को और भी प्रमुख बना दिया। उनकी टिप्पणियों ने यह स्पष्ट किया कि भारत–अमेरिका संबंध वर्तमान दौर में कई चुनौतियों और उतार–चढ़ाव से गुजर रहे हैं, जिनका सीधा संबंध राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की हालिया नीतियों से भी है।
नीचे इस पूरे मुद्दे का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत है, जिसमें यह समझाया गया है कि एक तस्वीर कैसे दो वैश्विक शक्तियों के रिश्तों पर राजनीतिक बहस को फिर से जीवित कर देती है।
मोदी–पुतिन सेल्फी ने क्यों खड़ी की वैश्विक चर्चा
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की कार यात्रा के दौरान ली गई सेल्फी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई। इस तस्वीर ने दुनिया को यह याद दिलाया कि भारत और रूस के बीच दशकों पुरानी साझेदारी अब भी मजबूत है। यह उस समय की बात है जब वैश्विक राजनीति में अमेरिका और चीन के बीच शक्ति संतुलन और रूस पर लगाए गए प्रतिबंध जैसे मुद्दे प्रमुख थे।
अमेरिकी सांसदों ने इस सेल्फी में एक गहरी रणनीतिक तस्वीर देखी। उनके अनुसार, यह केवल दोस्ती की झलक नहीं है, बल्कि एक ऐसा संदेश है जो बताता है कि भारत अपनी विदेश नीति को स्वतंत्र रूप से संचालित करता है और किसी एक ध्रुव पर निर्भर नहीं रहना चाहता।
अमेरिकी सांसद सिडनी कामलागर-डोव की प्रतिक्रिया
सिडनी कामलागर-डोव ने एक कार्यक्रम के दौरान इस तस्वीर को “हजारों शब्द कहने वाली कहानी” बताया। उन्होंने यह भी कहा कि पुतिन और मोदी की यह अनौपचारिक और गर्मजोशी भरी मुलाकात इस बात का संकेत है कि भारत रूस के साथ अपने रिश्ते को बेहद महत्व देता है।
कामलागर-डोव के अनुसार, यह स्थिति अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप द्वारा अपनाई गई “दबाव डालने वाली नीतियों” की एक कीमत है। उनका मत था कि ट्रंप प्रशासन की अनिश्चित और आक्रामक नीतियों ने भारत–अमेरिका संबंधों को कमजोर किया है। उन्होंने यह बात भी जोड़ी कि प्रधानमंत्री मोदी और पुतिन की यह तस्वीर अमेरिका को यह आईना दिखाती है कि उसकी विदेश नीति के फैसलों ने उसके अहम साझेदारों को दूरी बनाने पर मजबूर किया है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत जैसे वैश्विक साझेदार को सार्वजनिक रूप से अपमानित करना या उसकी नीतियों को लेकर अत्यधिक दबाव बनाना अमेरिका की कूटनीतिक गलतियों में आता है। यह टिप्पणी भारत–अमेरिका रिश्तों पर गहरा सवाल उठाती है।
भारत–अमेरिका साझेदारी पर नुकसान की चिंता
सिडनी कामलागर-डोव ने यह स्पष्ट किया कि अमेरिका को अब अपने रिश्तों को मजबूत करने के लिए नए सिरे से मेहनत करनी होगी। उनके अनुसार, यह जरूरी है कि अमेरिका भारत जैसे लोकतांत्रिक साझेदारों के साथ मिलकर विकास, सुरक्षा और वैश्विक नेतृत्व पर आधारित विश्वासपूर्ण रिश्ता बनाए।
अमेरिकी सांसद ने जोर दिया कि वर्तमान सरकार द्वारा किए गए नुकसानों को कम करने और दोनों देशों की साझेदारी को पटरी पर लाने के लिए बहुत कार्य करना बाकी है।
प्रमिला जयपाल की चिंता—ट्रेड बैरियर और इमिग्रेशन नीति
इसी कार्यक्रम में अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल ने भारत–अमेरिका आर्थिक संबंधों को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर चिंता जताई। उनके अनुसार, हालिया ट्रेड बैरियर, इमिग्रेशन पॉलिसी और टैरिफ की समस्याएँ न केवल व्यापारियों बल्कि उपभोक्ताओं को भी प्रभावित कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि दोनों आर्थिक महाशक्तियों के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ने से अप्रत्याशित परिणाम सामने आ सकते हैं। जयपाल ने अमेरिकी टैरिफ को भारतीय अर्थव्यवस्था पर नुकसानदायक बताया और कहा कि अमेरिका द्वारा लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ ने भारत की निर्यात क्षमता को काफी प्रभावित किया है।
2025 में लगे टैरिफ और बढ़ते तनाव
अगस्त 2025 में अमेरिका ने भारतीय सामानों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया था। इसका कारण था भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते ट्रेड विवाद और भारत द्वारा रूस से तेल खरीदने को लेकर उठी अमेरिकी चिंताएँ।
ट्रंप प्रशासन की हालिया चेतावनियों ने इस तनाव को और बढ़ाने का काम किया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्थिति यदि संभाली न गई तो दोनों देशों के बीच व्यापारिक टकराव और गहराया जा सकता है, जिससे आर्थिक साझेदारी को गंभीर नुकसान होगा।
मोदी–पुतिन मुलाकात का व्यापक संदेश
इस यात्रा और सेल्फी का व्यापक संदेश यह था कि भारत अपनी बहुपक्षीय विदेश नीति पर कायम है। न तो वह किसी एक देश के दबाव में झुकना चाहता है और न ही अपनी सामरिक आवश्यकताओं से समझौता करेगा।
भारत–रूस संबंध हमेशा से रक्षा, ऊर्जा, तकनीक और कूटनीति के क्षेत्र में मजबूत रहे हैं। इसलिए रूस की यह यात्रा भारत के लिए महत्वपूर्ण थी—चाहे वैश्विक राजनीति इसे किसी भी तरह देखे।
निष्कर्ष—एक तस्वीर, कई संदेश
मोदी–पुतिन की सेल्फी ने सिर्फ सोशल मीडिया पर चर्चा नहीं चलाई, बल्कि विश्व राजनीति में भी हलचल पैदा की। इसने अमेरिका को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि उसकी नीतियाँ किस हद तक उसके पुराने और नए साझेदारों को प्रभावित कर रही हैं।
भारत–अमेरिका संबंध आज भी महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इन्हें बेहतर बनाने के लिए दोनों देशों को परस्पर सम्मान, व्यापारिक संतुलन और कूटनीतिक समझ की जरूरत है। यह तस्वीर बताती है कि भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति और बहुध्रुवीय वैश्विक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ रहा है।
मोदी–पुतिन सेल्फी, India-US relations, ट्रंप नीति, US lawmakers India, India Russia ties
यह भी पढ़े: TRAI ने जारी किए नए सिम कार्ड Rule, अब नहीं करवाना पड़ेगा महंगा रिचार्ज, यहां देखें पूरी डिटेल्स
Author: AK
! Let us live and strive for freedom ! Freelance Journalist ! Politics ! News Junky !
Share this:
- Click to share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp
- Post
- Click to share on Telegram (Opens in new window) Telegram
- Share on Tumblr
- Click to email a link to a friend (Opens in new window) Email
- Click to share on Reddit (Opens in new window) Reddit
- Click to print (Opens in new window) Print
- Click to share on Mastodon (Opens in new window) Mastodon
- Click to share on Nextdoor (Opens in new window) Nextdoor
- Click to share on Threads (Opens in new window) Threads













