बिहार ने केंद्रीय बजट 2026 से पहले 5 प्रतिशत तक कर्ज लेने, सेस-सरचार्ज में हिस्सेदारी और बाढ़ राहत पैकेज की मांग की है ताकि विकास योजनाएं जारी रह सकें।
Union Budget 2026: Bihar Seeks Higher Borrowing Limit
परिचय
केंद्रीय बजट 2026 से पहले बिहार सरकार ने अपनी वित्तीय जरूरतों को लेकर केंद्र सरकार के सामने बड़ा प्रस्ताव रखा है। राज्य के वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने साफ शब्दों में कहा है कि अगर बिहार को तेजी से आगे बढ़ाना है, तो उसे अधिक संसाधनों की जरूरत पड़ेगी। यही वजह है कि बिहार ने अपने सकल राज्य घरेलू उत्पाद यानी GSDP Bihar के मुकाबले कर्ज लेने की सीमा बढ़ाने, सेस और सरचार्ज में हिस्सा देने और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष पैकेज की मांग की है। यह मांग केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि इसके पीछे बिहार की सामाजिक और आर्थिक हकीकत छिपी हुई है।
बिहार को अधिक कर्ज क्यों चाहिए
बिहार देश के उन राज्यों में शामिल है जहां आबादी ज्यादा है, लेकिन प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत से काफी कम है। राज्य सरकार का मानना है कि अगर उसे स्कूल, अस्पताल, सड़क, रोजगार और सामाजिक योजनाओं में निवेश करना है, तो मौजूदा संसाधन पर्याप्त नहीं हैं।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में बिहार का अनुमानित जीएसडीपी 10.97 लाख करोड़ रुपये है। इसके मुकाबले राज्य का कुल लोक ऋण लगभग 3.53 लाख करोड़ रुपये है, जो जीएसडीपी का करीब 32 प्रतिशत बनता है। यह अनुपात कई अन्य राज्यों की तुलना में ज्यादा नहीं है, इसलिए बिहार सरकार को लगता है कि 5 प्रतिशत तक कर्ज लेने की अनुमति मिलनी चाहिए।
तीन प्रतिशत से पांच प्रतिशत तक का गणित
अभी नियम के अनुसार राज्य सरकारें अपने जीएसडीपी का अधिकतम तीन प्रतिशत तक ही कर्ज ले सकती हैं। बिहार सरकार चाहती है कि इस सीमा को दो प्रतिशत और बढ़ाकर पांच प्रतिशत किया जाए।
इससे क्या फायदा होगा
अगर बिहार को अतिरिक्त दो प्रतिशत कर्ज लेने की छूट मिल जाती है, तो उसे हजारों करोड़ रुपये अतिरिक्त मिल सकते हैं। यह पैसा राज्य सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, सड़क और उद्योग जैसे क्षेत्रों में लगा सकती है। इससे न सिर्फ विकास की गति तेज होगी, बल्कि रोजगार भी पैदा होंगे।
सेस और सरचार्ज में हिस्सेदारी की मांग
केंद्र सरकार कई तरह के कर वसूलती है, जिनमें से कुछ कर राज्यों के साथ साझा किए जाते हैं, लेकिन सेस और सरचार्ज इसमें शामिल नहीं होते। पिछले कुछ वर्षों में केंद्र के कुल कर राजस्व में सेस और सरचार्ज का हिस्सा बढ़कर करीब 13.6 प्रतिशत हो गया है।
बिहार को नुकसान कैसे होता है
चूंकि सेस और सरचार्ज राज्यों के साथ साझा नहीं किए जाते, इसलिए बिहार जैसे गरीब और विकासशील राज्यों को उनका पूरा संवैधानिक हिस्सा नहीं मिल पाता। अगर इन्हें विभाज्य कोष में शामिल कर लिया जाए, तो बिहार को हर साल हजारों करोड़ रुपये अतिरिक्त मिल सकते हैं। यही कारण है कि Bihar budget demand में यह मुद्दा खास तौर पर उठाया गया है।
बाढ़ और आपदा के लिए विशेष पैकेज
बिहार का बड़ा हिस्सा हर साल बाढ़ से प्रभावित होता है। कोसी, गंडक और बागमती जैसी नदियां अक्सर तबाही लाती हैं। इससे खेती, घर, सड़क और उद्योग सब पर असर पड़ता है।
नई तकनीक की जरूरत
बिहार सरकार ने केंद्र से अनुरोध किया है कि बाढ़ और सूखे से निपटने के लिए सैटेलाइट, जीआईएस मैपिंग और रियल टाइम मॉनिटरिंग जैसी आधुनिक तकनीकों पर आधारित विशेष पैकेज दिया जाए। इससे समय रहते चेतावनी दी जा सकेगी और नुकसान कम होगा।
सात निश्चय और विकास की रफ्तार
बिहार सरकार ने हाल ही में सात निश्चय के तीसरे चरण की शुरुआत की है। इसका उद्देश्य राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क और रोजगार जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निवेश करना है।
विकास दर का लक्ष्य
वित्तीय वर्ष 2024-25 में बिहार की विकास दर 13 प्रतिशत से ज्यादा रही है। सरकार चाहती है कि यह रफ्तार बनी रहे। इसके लिए केंद्र से अतिरिक्त वित्तीय सहायता जरूरी मानी जा रही है।
ब्याज मुक्त ऋण की सीमा बढ़ाने की मांग
केंद्र सरकार राज्यों को कुछ हद तक ब्याज मुक्त ऋण देती है, जिससे वे विकास परियोजनाओं में निवेश कर सकें। अभी इसकी सीमा 50 हजार करोड़ रुपये है।
बिहार की अपेक्षा
बिहार सरकार चाहती है कि इस सीमा को बढ़ाकर एक लाख करोड़ रुपये किया जाए, ताकि ज्यादा राज्यों को ज्यादा मदद मिल सके। इससे बिहार को भी अपनी योजनाओं के लिए सस्ता धन मिल पाएगा।
कृषि और उद्योग में निवेश का महत्व
बिहार की बड़ी आबादी खेती पर निर्भर है। अगर आधुनिक तकनीक जैसे ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ब्लॉकचेन का इस्तेमाल खेती में किया जाए, तो पैदावार और किसानों की आमदनी दोनों बढ़ सकती हैं।
रोजगार सृजन का रास्ता
इसके साथ ही राज्य में उद्योगों की स्थापना से लाखों युवाओं को रोजगार मिल सकता है। बिहार के पास पानी और श्रम दोनों की भरपूर उपलब्धता है, बस जरूरत है निवेश की।
केंद्र के लिए क्यों अहम है बिहार
बिहार देश की राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों में अहम स्थान रखता है। यहां की आबादी बड़ी है और युवाओं की संख्या भी ज्यादा है। अगर बिहार का विकास होता है, तो पूरे देश की अर्थव्यवस्था को फायदा होगा।
राष्ट्रीय दृष्टि से महत्व
इसीलिए Union Budget 2026 में बिहार की मांगों को गंभीरता से लेना केंद्र सरकार के लिए भी फायदेमंद साबित हो सकता है।
आगे क्या हो सकता है
केंद्र सरकार को अब तय करना है कि वह बिहार की कितनी मांगों को मानती है। अगर पांच प्रतिशत तक कर्ज लेने की अनुमति मिल जाती है और सेस-सरचार्ज में हिस्सेदारी बढ़ती है, तो बिहार के पास विकास के लिए बड़ी रकम होगी।
निष्कर्ष
बिहार ने बजट 2026 से पहले जो मांगें रखी हैं, वे केवल आर्थिक नहीं बल्कि सामाजिक विकास से भी जुड़ी हुई हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बाढ़ से सुरक्षा जैसे मुद्दों पर पैसा खर्च करना जरूरी है। Bihar borrowing limit बढ़ाने और अतिरिक्त सहायता देने से राज्य की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और लाखों लोगों के जीवन में सुधार आएगा। अब यह देखना होगा कि केंद्र सरकार इन अपेक्षाओं पर कितना खरा उतरती है और बिहार को कितना सहारा देती है।
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Author: AK
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