बुध, फ़रवरी 25, 2026

Trump Tariffs Impact: ट्रंप टैरिफ का असर, EU बोला– भारत अब बेहद जरूरी

Trump Tariffs Impact: EU Says India Is Crucial

अमेरिकी टैरिफ दबाव के बीच भारत को मिला यूरोपीय संघ का समर्थन। EU ने भारत को रणनीतिक और आर्थिक रूप से बेहद जरूरी साझेदार माना।

Trump Tariffs Impact: EU Says India Is Crucial


भूमिका: बदलती वैश्विक राजनीति में भारत की बढ़ती अहमियत

दुनिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था एक बार फिर बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति ने वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता बढ़ा दी है। ऐसे समय में भारत एक बार फिर वैश्विक मंच पर एक भरोसेमंद और जरूरी साझेदार के रूप में उभरता दिख रहा है। इसका ताजा उदाहरण यूरोपीय संघ (EU) का वह बयान है, जिसमें भारत को रणनीतिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बताया गया है।

यूरोपीय संघ की विदेश मामलों और सुरक्षा नीति की उच्च प्रतिनिधि काजा कल्लास ने साफ कहा है कि मौजूदा अस्थिर और खतरनाक वैश्विक माहौल में भारत और यूरोप का साथ आना दोनों के लिए फायदेमंद है। यह बयान सिर्फ कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि बदलते वैश्विक शक्ति संतुलन का संकेत है।


अमेरिका के टैरिफ और वैश्विक व्यापार पर असर

ट्रंप की टैरिफ नीति क्या है?

डोनल्ड ट्रंप अपने पहले कार्यकाल के दौरान “अमेरिका फर्स्ट” नीति के तहत कई देशों पर भारी टैरिफ लगाए थे। अब एक बार फिर उनके टैरिफ संबंधी बयानों और नीतियों ने वैश्विक बाजारों में चिंता बढ़ा दी है। इन टैरिफ का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार, सप्लाई चेन और निवेश पर पड़ता है।

यूरोप की चिंता क्यों बढ़ी?

यूरोपीय संघ को डर है कि अगर अमेरिका फिर से आक्रामक टैरिफ नीति अपनाता है, तो उसका असर यूरोपीय उद्योगों और निर्यात पर पड़ेगा। खासकर स्टील, ऑटोमोबाइल, टेक्नोलॉजी और ग्रीन एनर्जी सेक्टर पर इसका प्रभाव हो सकता है। ऐसे में EU को ऐसे साझेदारों की जरूरत है जो स्थिर, लोकतांत्रिक और भरोसेमंद हों।


भारत और यूरोपीय संघ के रिश्तों में नया मोड़

काजा कल्लास का अहम बयान

यूरोपीय संसद को संबोधित करते हुए काजा कल्लास ने कहा कि भारत अब यूरोप की आर्थिक मजबूती के लिए बेहद जरूरी हो गया है। उन्होंने माना कि भारत और EU ऐसे समय में करीब आ रहे हैं, जब नियमों पर आधारित वैश्विक व्यवस्था दबाव में है।

उनका यह बयान इस बात का संकेत है कि यूरोपीय संघ भारत के साथ सिर्फ व्यापार ही नहीं, बल्कि सुरक्षा, तकनीक और वैश्विक शासन के मुद्दों पर भी गहरा सहयोग चाहता है।

दो बड़े लोकतंत्रों की साझेदारी

भारत और यूरोपीय संघ दोनों ही लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास रखते हैं। काजा कल्लास ने कहा कि आज के दौर में दो बड़े लोकतंत्रों का एक-दूसरे के साथ मजबूती से खड़ा होना जरूरी है, ताकि अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र चार्टर और बहुपक्षीय व्यवस्था को बचाया जा सके।


गणतंत्र दिवस 2026 और EU-India Summit की अहमियत

मुख्य अतिथि बनने की तैयारी

2026 के गणतंत्र दिवस समारोह में यूरोपीय संघ की शीर्ष नेतृत्व के मुख्य अतिथि बनने की संभावना है। यह अपने आप में भारत-EU रिश्तों की गहराई को दर्शाता है। इससे पहले भी भारत ने अपने रणनीतिक साझेदारों को गणतंत्र दिवस पर आमंत्रित कर मजबूत संदेश दिया है।

16वीं EU-India Summit से उम्मीदें

गणतंत्र दिवस के बाद 16वीं EU-India Summit आयोजित की जाएगी। इस शिखर सम्मेलन से कई बड़े समझौतों की उम्मीद है, जो आने वाले वर्षों में दोनों पक्षों के रिश्तों की दिशा तय करेंगे।


भारत और EU के बीच संभावित तीन बड़ी डील

1. भारत-EU व्यापार समझौता

सबसे अहम मुद्दा भारत और यूरोपीय संघ के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) है। 27 जनवरी को इस पर बातचीत पूरी होने की उम्मीद है। इस समझौते से बाजार खुलेंगे, व्यापारिक बाधाएं कम होंगी और निवेश को बढ़ावा मिलेगा।

किन सेक्टरों को होगा फायदा?

  • क्लीन टेक्नोलॉजी
  • फार्मास्यूटिकल्स
  • सेमीकंडक्टर
  • ऑटोमोबाइल और मैन्युफैक्चरिंग

यह डील भारत को वैश्विक सप्लाई चेन में और मजबूत बनाएगी।

2. सुरक्षा और रक्षा साझेदारी

EU और भारत के बीच सुरक्षा और रक्षा सहयोग पर भी हस्ताक्षर होने की संभावना है। इसमें समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी सहयोग और साइबर सुरक्षा जैसे अहम मुद्दे शामिल होंगे।

3. मोबिलिटी और लोगों की आवाजाही

दोनों पक्ष श्रमिकों, छात्रों, शोधकर्ताओं और उच्च कुशल पेशेवरों की आवाजाही को आसान बनाने के लिए एक व्यापक ढांचे पर काम कर रहे हैं। इससे भारत के युवाओं और प्रोफेशनल्स को यूरोप में नए अवसर मिल सकते हैं।


भारत को क्यों मिल रहा है वैश्विक समर्थन?

मजबूत अर्थव्यवस्था और बाजार

भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। विशाल उपभोक्ता बाजार, युवा आबादी और बढ़ता मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर भारत को आकर्षक बनाता है।

संतुलित विदेश नीति

भारत ने हमेशा संतुलित विदेश नीति अपनाई है। चाहे अमेरिका हो, यूरोप, रूस या एशिया—भारत सभी के साथ संवाद और सहयोग पर जोर देता है। यही वजह है कि मौजूदा वैश्विक तनाव के दौर में भारत एक भरोसेमंद साझेदार माना जा रहा है।

नियम आधारित वैश्विक व्यवस्था का समर्थन

भारत अंतरराष्ट्रीय कानून और बहुपक्षीय संस्थाओं में विश्वास करता है। यह दृष्टिकोण यूरोपीय संघ के मूल्यों से मेल खाता है, जिससे दोनों के बीच स्वाभाविक साझेदारी बनती है।


ट्रंप के टैरिफ से भारत को कैसे फायदा?

सप्लाई चेन का भारत की ओर झुकाव

अगर अमेरिका और चीन या अमेरिका और यूरोप के बीच व्यापार तनाव बढ़ता है, तो कई कंपनियां अपने उत्पादन और निवेश के लिए भारत को विकल्प के रूप में देख सकती हैं।

निवेश और निर्यात के नए अवसर

टैरिफ युद्ध के कारण वैश्विक कंपनियां ऐसे देशों की तलाश में हैं, जहां स्थिर नीतियां और बड़ा बाजार हो। भारत इस कसौटी पर खरा उतरता है, जिससे उसे निवेश और निर्यात दोनों में फायदा मिल सकता है।


भविष्य की तस्वीर: भारत-EU साझेदारी कितनी अहम?

आने वाले वर्षों में भारत और यूरोपीय संघ की साझेदारी वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभा सकती है। जलवायु परिवर्तन, डिजिटल टेक्नोलॉजी, रक्षा, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग दोनों के लिए फायदेमंद रहेगा।

काजा कल्लास का यह कहना कि “भारत बेहद जरूरी हो गया है” सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि बदलते वैश्विक समीकरणों की सच्चाई है। अमेरिका के टैरिफ दबाव, रूस-यूक्रेन युद्ध और चीन की बढ़ती भूमिका के बीच भारत और EU का करीब आना एक नए वैश्विक संतुलन की ओर इशारा करता है।


निष्कर्ष

अमेरिकी टैरिफ की अनिश्चितता के बीच भारत का कद वैश्विक मंच पर और ऊंचा हुआ है। यूरोपीय संघ का खुला समर्थन इस बात का प्रमाण है कि भारत अब सिर्फ एक उभरती अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि वैश्विक स्थिरता और सहयोग का अहम स्तंभ बन चुका है। आने वाले समय में भारत-EU रिश्ते न सिर्फ दोनों के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

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Author: AK

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