ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर सख्त बयान देकर दुनिया में हलचल मचा दी है। अमेरिका, चीन और रूस के बीच आर्कटिक क्षेत्र में नई भू-राजनीतिक जंग तेज हो गई है।
Trump Eyes Greenland: Global Tensions Rise
परिचय
अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कभी-कभी ऐसे बयान सामने आ जाते हैं जो पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लेते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का हालिया बयान कुछ ऐसा ही है। उन्होंने ग्रीनलैंड को लेकर जिस तरह से कहा कि “चाहे प्यार से या ताकत से, हम कब्जा करके रहेंगे”, उसने यूरोप से लेकर एशिया तक चिंता बढ़ा दी है। यह सिर्फ एक द्वीप पर नियंत्रण की बात नहीं है, बल्कि इसके पीछे आर्कटिक क्षेत्र में बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धा, खनिज संसाधनों की दौड़ और सैन्य रणनीति जुड़ी हुई है। सवाल यह है कि आखिर ग्रीनलैंड इतना महत्वपूर्ण क्यों हो गया है और ट्रंप की नजर वेनेजुएला के बाद अब किस देश पर है।
TRUMP: "If we don't do it, Russia or China will take over Greenland, and we're not going to have Russia or China as a neighbor. Okay?"
— Fox News (@FoxNews) January 9, 2026
"I would like to make a deal the easy way. But if we don't do it the easy way, we're going to do it the hard way."
"I'm a fan of Denmark…but,… pic.twitter.com/xDuqtD4yKT
ग्रीनलैंड क्या है और क्यों है इतना अहम
ग्रीनलैंड दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है और यह डेनमार्क का स्वायत्त क्षेत्र है। भौगोलिक रूप से यह उत्तरी ध्रुव के काफी करीब है, जिसे आर्कटिक क्षेत्र कहा जाता है। यह इलाका बर्फ से ढका जरूर है, लेकिन इसके नीचे खनिजों और प्राकृतिक संसाधनों का विशाल भंडार छिपा हुआ है।
खनिज और ऊर्जा संसाधन
ग्रीनलैंड में रेयर अर्थ मिनरल्स, यूरेनियम, तेल और गैस जैसे संसाधन पाए जाते हैं। आज की तकनीकी दुनिया में रेयर अर्थ मिनरल्स का उपयोग मोबाइल, इलेक्ट्रिक कार, सोलर पैनल और रक्षा उपकरणों में किया जाता है। चीन इन खनिजों का सबसे बड़ा उत्पादक है, और अमेरिका चाहता है कि वह इस क्षेत्र में चीन पर निर्भर न रहे। इसी वजह से Greenland geopolitics अब वैश्विक रणनीति का केंद्र बन गया है।
ट्रंप का बयान और उसका अर्थ
डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कहा है कि वह ग्रीनलैंड को लेकर पीछे हटने वाले नहीं हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला है। उनके मुताबिक अगर अमेरिका ग्रीनलैंड पर नियंत्रण नहीं करता, तो रूस या चीन वहां अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा सकते हैं।
चीन और रूस का डर
US China Russia Arctic की प्रतिस्पर्धा पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है। चीन आर्कटिक को “पोलर सिल्क रोड” के रूप में देखता है, जबकि रूस वहां पहले से सैन्य अड्डे और आइसब्रेकर्स बना चुका है। ट्रंप का मानना है कि अगर अमेरिका इस दौड़ में पीछे रह गया, तो उसकी वैश्विक ताकत कमजोर पड़ जाएगी।
वेनेजुएला के बाद अब ग्रीनलैंड क्यों
हाल ही में अमेरिका ने वेनेजुएला के तेल क्षेत्र में अपनी रणनीति मजबूत की थी। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि ऊर्जा और संसाधनों पर नियंत्रण से ही कोई देश सुपरपावर बना रह सकता है। वेनेजुएला के बाद अब उनकी नजर ग्रीनलैंड पर है, जहां खनिज और रणनीतिक स्थिति दोनों अमेरिका के लिए फायदेमंद हो सकते हैं।
डेनमार्क की कड़ी प्रतिक्रिया
ग्रीनलैंड भले ही स्वायत्त हो, लेकिन वह डेनमार्क के अंतर्गत आता है। डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने ट्रंप के बयान पर कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने साफ कहा है कि अगर कोई भी देश ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की कोशिश करेगा तो डेनमार्क की सेना जवाब देगी।
नाटो और यूरोप की चिंता
डेनमार्क नाटो का सदस्य है। अगर अमेरिका ग्रीनलैंड पर जबरदस्ती करता है, तो यह NATO के भीतर गंभीर संकट पैदा कर सकता है। यूरोपीय देश इसे अपनी संप्रभुता पर सीधा हमला मान सकते हैं।
ग्रीनलैंड के लोगों की राय
ग्रीनलैंड की आबादी करीब 56 हजार है। वहां के लोग अपनी संस्कृति और स्वायत्तता को लेकर बेहद संवेदनशील हैं। वे चाहते हैं कि उनके संसाधनों का उपयोग उनके विकास के लिए हो, न कि किसी बाहरी ताकत के फायदे के लिए।
आर्थिक विकास बनाम स्वतंत्रता
कुछ लोग मानते हैं कि अगर अमेरिका निवेश करता है तो रोजगार और बुनियादी ढांचा बेहतर होगा। लेकिन ज्यादातर नागरिक अपनी पहचान और राजनीतिक अधिकार खोने से डरते हैं।
आर्कटिक क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा
आर्कटिक क्षेत्र अब सिर्फ बर्फ का इलाका नहीं रहा। जलवायु परिवर्तन के कारण यहां बर्फ पिघल रही है, जिससे नए समुद्री मार्ग खुल रहे हैं। इससे व्यापार और सैन्य रणनीति दोनों बदल रहे हैं।
Donald Trump Greenland जैसे बयान इसी बदलती भू-राजनीति का हिस्सा हैं। अमेरिका, रूस और चीन तीनों इस इलाके में अपनी मौजूदगी बढ़ाना चाहते हैं।
अमेरिका की विदेश नीति में बदलाव
Trump foreign policy हमेशा आक्रामक रही है। चाहे वह व्यापार युद्ध हो या विदेशों में सैन्य दबाव, ट्रंप अपने हितों को सबसे ऊपर रखते हैं। ग्रीनलैंड पर उनकी नजर इसी नीति का विस्तार है।
क्या सच में अमेरिका ग्रीनलैंड पर कब्जा कर सकता है
कानूनी और कूटनीतिक रूप से यह बेहद मुश्किल है। ग्रीनलैंड डेनमार्क का हिस्सा है और किसी भी तरह का कब्जा अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन होगा। लेकिन ट्रंप के बयान यह दिखाते हैं कि अमेरिका कूटनीतिक दबाव, आर्थिक प्रलोभन या सैन्य ताकत का इस्तेमाल करने से भी पीछे नहीं हट सकता।
दुनिया के लिए इसका क्या मतलब
अगर ग्रीनलैंड को लेकर तनाव बढ़ता है, तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा। यूरोप और अमेरिका के रिश्ते बिगड़ सकते हैं, जबकि चीन और रूस को इसका फायदा मिल सकता है। Arctic resources पर नियंत्रण की यह लड़ाई आने वाले दशकों में और भी तेज हो सकती है।
निष्कर्ष
ट्रंप का ग्रीनलैंड को लेकर दिया गया बयान सिर्फ एक राजनीतिक बयान नहीं है, बल्कि यह आने वाले समय की वैश्विक शक्ति संघर्ष की झलक देता है। अमेरिका, चीन और रूस के बीच आर्कटिक क्षेत्र में बढ़ती होड़ दुनिया की राजनीति को नई दिशा दे रही है। डेनमार्क और ग्रीनलैंड के लोगों के लिए यह उनकी संप्रभुता और भविष्य का सवाल है, जबकि अमेरिका के लिए यह राष्ट्रीय सुरक्षा और संसाधनों पर नियंत्रण का मुद्दा बन गया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह टकराव किस दिशा में जाता है और दुनिया इसे कैसे संभालती है।
यह भी पढ़े: TRAI ने जारी किए नए सिम कार्ड Rule, अब नहीं करवाना पड़ेगा महंगा रिचार्ज, यहां देखें पूरी डिटेल्स
Donald Trump Greenland, Greenland geopolitics, US China Russia Arctic, Trump foreign policy, Denmark Greenland, Arctic resources
Author: AK
! Let us live and strive for freedom ! Freelance Journalist ! Politics ! News Junky !
Share this:
- Click to share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp
- Post
- Click to share on Telegram (Opens in new window) Telegram
- Share on Tumblr
- Click to email a link to a friend (Opens in new window) Email
- Click to share on Reddit (Opens in new window) Reddit
- Click to print (Opens in new window) Print
- Click to share on Mastodon (Opens in new window) Mastodon
- Click to share on Nextdoor (Opens in new window) Nextdoor
- Click to share on Threads (Opens in new window) Threads













