
आज बात करेंगे कोलकाता की उस ट्रेनी महिला डॉक्टर की, जो अब इस दुनिया में नहीं है लेकिन बंगाल के साथ पूरे देश भर में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर नई इबारत लिख गई। मौत के बाद ट्रेनी डॉक्टर पश्चिम बंगाल जैसे प्रदेश में महिलाओं और लड़कियों में एक नई अलख जगा गई । पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने सियासी करियर में पहली बार खराब दौर देखा। इस घटना के बाद ममता की कुर्सी भी हिल गई । समूचे राज्य के लोगों का गुस्सा ममता सरकार के प्रति अभी भी बना हुआ है। ट्रेनी डॉक्टर के साथ रेप और मर्डर के बाद बंगाल के साथ पूरा देश गुस्सा में दिखाई दिया। विशेष तौर पर मेडिकल से जुड़े डॉक्टर और कर्मचारियों ने देशभर में विरोध-प्रदर्शन किए। कोलकाता के लाल बाजार में सड़कों पर जूनियर डॉक्टर धरना कर रहे हैं और कोलकाता की निर्भया के लिए न सिर्फ न्याय की मांग कर रहे हैं, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। लोगों का आक्रोश देखकर ममता सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एंटी रेप बिल लाने का वादा किया। राज्य में इस बिल को पेश करने के लिए विशेष सत्र बुलाया गया है। हालांकि ऐसा पहली बार नहीं है कि किसी राज्य की सरकार ने रेप और महिलाओं-बच्चों के खिलाफ गंभीर अपराध के लिए ऐसे बिल पेश किए हो, इससे पहले भी 2 राज्यों ने ऐसे बिल लाने का प्रयास किया है। आंध्र प्रदेश ने साल 2019 में दिशा बिल लाने की कोशिश की थी और महाराष्ट्र ने साल 2020 में शक्ति बिल लाने की मुहिम छेड़ी थी, लेकिन बिल को मंजूरी नहीं मिली। मंगलवार 3 सितंबर को बंगाल विधानसभा के दो दिवसीय विशेष सत्र के आखिरी दिन आज ममता बनर्जी सरकार एंटी रेप बिल पेश किया। इसमें रेप के दोषियों के लिए 10 दिनों के भीतर फांसी की सजा सुनिश्चित करने का प्रावधान है। इसका नाम अपराजिता वीमेन एंड चाइल्ड (पश्चिम बंगाल आपराधिक कानून व संशोधन) बिल 2024 है। साथ ही मामले की जांच 36 दिन में पूरी करने कहा गया है। बिल पारित करने के लिए 2 सितंबर से दो दिन विशेष विधानसभा सत्र बुलाया गया है। माना जा रहा है कि विधानसभा में ये बिल आज ही पास हो जाएगा। भाजपा नेता सुकांत मजूमदार ने रविवार को कहा कि हमने फैसला किया है कि ममता बनर्जी के इस विधेयक का समर्थन करेंगे। कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में 8-9 अगस्त की रात 31 साल की ट्रेनी डॉक्टर का रेप-मर्डर हुआ था। 9 अगस्त की सुबह डॉक्टर की बॉडी मिली थी। इसके बाद देशभर के डॉक्टर सड़क पर उतर आए थे। सुप्रीम कोर्ट की अपील के बाद कई अस्पतालों के डॉक्टरों ने हड़ताल कैंसिल कर दी। हालांकि बंगाल में प्रदर्शन जारी है। इसी घटना के बाद ममता सरकार एंटी रेप बिल ला रही है। डॉक्टरों को कसाई कहने के बयान पर विवाद बढ़ने के बाद तृणमूल कांग्रेस की नेता अरुंधति मैत्रा ने सफाई दी है। उन्होंने कहा कि डॉक्टर हमारे लिए भगवान हैं। लेकिन आम लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सरकारी अस्पतालों में लोगों को इलाज में दिक्कत आ रही है। हमारी मुख्यमंत्री उन्हें बार-बार आश्वासन दे रही हैं कि वे अपना काम बेहतर तरीके से करें। सरकार उनकी मांगों पर गौर कर रही हैं। लेकिन उनमें मानवता नहीं है। वे अभी भी प्रदर्शन कर रहे हैं और ऐसे में स्थानीय लोगों को इलाज में दिक्कत हो रही है। बता दें कि कोलकाता रेप केस का मामला इस समय सीबीआई के हाथ में है और सीबीआई मामले की हर परत को खोल रही है और जांच कर रही है। सोमवार, 2 सितंबर को सीबीआई ने मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष को भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है।
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Author: AK
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