रक्षा मंत्री का बड़ा ऐलान,आत्मनिर्भरता की ओर अब बढ़ेगा भारत…

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज रक्षा क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण कई एलान किए हैं। रक्षा मंत्री ने कहा कि रक्षा मंत्रालय अब ‘आत्मनिर्भर भारत’ की पहल को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है और रक्षा उत्पादन के स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने के लिए रक्षा मंत्रालय 101 से अधिक वस्तुओं पर आयात प्रतिबंध लगाएगा।
https://platform.twitter.com/widgets.jsThe Ministry of Defence is now ready for a big push to #AtmanirbharBharat initiative. MoD will introduce import embargo on 101 items beyond given timeline to boost indigenisation of defence production.
— Rajnath Singh (@rajnathsingh) August 9, 2020
अहम एलान:-
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आत्मनिर्भर भारत के लिए पांच स्तंभों अर्थात्, अर्थव्यवस्था, अवसंरचना, प्रणाली, जनसांख्यिकी और मांग के आधार पर भारत के लिए एक विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा की जिसका नाम ‘आत्मनिर्भर भारत’ है।
इसे ध्यान में रखते हुए, रक्षा मंत्रालय ने 101 वस्तुओं की एक सूची तैयार की है, जिसके आयात पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। यह रक्षा में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है।
https://platform.twitter.com/widgets.jsTaking cue from that evocation, the Ministry of Defence has prepared a list of 101 items for which there would be an embargo on the import beyond the timeline indicated against them. This is a big step towards self-reliance in defence. #AtmanirbharBharat
— Rajnath Singh (@rajnathsingh) August 9, 2020
https://platform.twitter.com/widgets.jsThe list also includes, wheeled Armoured Fighting Vehicles (AFVs) with indicative import embargo date of December 2021, of which the Army is expected to contract almost 200 at an approximate cost of over Rs 5,000 crore. #AtmanirbharBharat
— Rajnath Singh (@rajnathsingh) August 9, 2020
इन 101 वस्तुओं में सिर्फ आसान वस्तुएं ही शामिल नहीं हैं बल्कि कुछ उच्च तकनीक वाले हथियार सिस्टम भी हैं जैसे आर्टिलरी गन, असॉल्ट राइफल्स, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, एलसीएच रडार और कई अन्य आइटम हैं, जो हमारी रक्षा सेवाओं की जरूरतों को पूरा करने के लिए जरूरी हैं।
यह निर्णय भारतीय रक्षा उद्योग को खुद के डिजाइन और विकास क्षमताओं का उपयोग करके या फिर डीआरडीओ द्वारा विकसित तकनीकों को अपनाकर सशस्त्र बलों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए हथियारों के निर्माण का एक बड़ा अवसर प्रदान करेगा।
भारत के भीतर विभिन्न गोला-बारूद और उपकरणों के विनिर्माण के लिए भारतीय उद्योग की वर्तमान और भविष्य की क्षमताओं का आकलन करने के लिए सशस्त्र बलों, सार्वजनिक और निजी उद्योग सहित सभी हितधारकों के साथ कई दौर की चर्चाएं हुईं, जिसके बाद रक्षा मंत्रालय द्वारा इस सूची को तैयार किया गया है।
अप्रैल 2015 से अगस्त 2020 के बीच लगभग 3.5 लाख करोड़ रुपये की अनुमानित लागत पर ऐसी सेवाओं की लगभग 260 योजनाओं को त्रि-सेवाओं द्वारा अनुबंधित किया गया था। ऐसा अनुमान है कि अगले छह से सात साल के भीतर लगभग चार लाख करोड़ रुपये के अनुबंध घरेलू उद्योग पर किए जाएंगे।
https://platform.twitter.com/widgets.jsAlmost 260 schemes of such items were contracted by the Tri-Services at an approximate cost of Rs 3.5 lakh crore between April 2015 and August 2020. It is estimated that contracts worth almost Rs 4 lakh crore will be placed upon the domestic industry within the next 6 to 7 years.
— Rajnath Singh (@rajnathsingh) August 9, 2020
लगभग 1,30,000 करोड़ रुपये की वस्तुएं सेना और वायुसेना के लिए अनुमानित हैं, जबकि नौसेना के लिए लगभग 1,40,000 करोड़ रुपये की वस्तुओं का अनुमान लगाया गया है।
https://platform.twitter.com/widgets.jsOf these, items worth almost Rs 1,30,000 crore each are anticipated for the Army and the Air Force while items worth almost Rs 1,40,000 crore are anticipated by the Navy over the same period. #AtmanirbharBharat
— Rajnath Singh (@rajnathsingh) August 9, 2020
आयात पर प्रतिबंध (एम्बार्गो) को 2020 से 2024 के बीच लागू करने की योजना है। हमारा उद्देश्य भारतीय रक्षा उद्योग को सशस्त्र बलों की आवश्यकताओं के बारे में बताना है ताकि वे स्वदेशीकरण के लक्ष्य को हासिल करने के लिए बेहतर रूप से तैयार हो जाएं।
इस दिशा में सभी आवश्यक कदमों को सुनिश्चित करने के लिए निगेटिव इंपोर्ट सूची के अनुसार उपकरणों की समय-सीमा पूरी की जाएगी, जिसके लिए रक्षा सेवाओं द्वारा उद्योग को संचालित के लिए एक समन्वित तंत्र शामिल होगा।
आयात के लिए इस तरह के अन्य उपकरणों को सभी हितधारकों के परामर्श से डीएमए द्वारा पहचाना जाएगा। इसका एक यथोचित नोट भी डीएपी में बनाया जाएगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सूची की कोई भी वस्तु भविष्य में आयात के लिए प्रोसिड न हो।
रक्षा मंत्रालय ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार से हथियारों को खरीदने के लिए बनाए गए 2020-21 के बजट में भी परिवर्तन किया है। चालू वित्त वर्ष में घरेलू पूंजीगत खरीद के लिए लगभग 52,000 करोड़ रुपये के साथ एक अलग बजट बनाया गया है।
Author: AK
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