
देश में एक बार फिर दक्षिण बनाम उत्तर भारतीय को लेकर सियासी जंग शुरू हो गई है। पिछले दिनों तमिलनाडु डीएमके सांसद दयानिधि के एक बयान पर उत्तर बनाम दक्षिण की राजनीति गरमा गई है। उन्होंने कहा कि यूपी-बिहार के लोग सिर्फ हिंदी सीखते हैं। इसके बाद वो तमिलनाडु मजदूरी करने के लिए आते हैं। वो शौचालय और सड़कों की सफाई जैसे काम करते हैं। तमिलनाडु के मूल निवासी सुंदर पिचाई का उदाहरण देते हुए मारन ने कहा कि वह अब गूगल के प्रमुख हैं और अगर उन्होंने हिंदी सीखी होती, तो वह विनिर्माण क्षेत्र में श्रमिक के रूप में काम कर रहे होते। वीडियो में वह यह कहते सुनाई देते हैं कि चूंकि तमिलनाडु के बच्चे शिक्षित होते हैं तथा अच्छी अंग्रेजी सीखते हैं, इसलिए उन्हें आइटी क्षेत्र में रोजगार और अच्छा वेतन मिलता है। इससे पहले सेंथिल कुमार के बयान पर भी बवाल मच चुका है। इस पर बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने कहा कि डीएमके नेता का ऐसा कुछ कहना अशोभनीय है क्योंकि डीएमके सामाजिक न्याय में विश्वास करती है। तेजस्वी ने कहा, अगर डीएमके सांसद ने जातिगत बुराइयों को उजागर किया होता, अगर उन्होंने बताया होता कि केवल कुछ सामाजिक समूहों के लोग ही ऐसी खतरनाक नौकरियां लेते हैं, तो इसका कोई मतलब होता, लेकिन बिहार और यूपी की पूरी आबादी के बारे में अपमानजनक बातें करना निंदनीय है। उन्होंने कहा, हमारा मानना है कि लोगों को देश के अन्य हिस्सों से आने वाले लोगों के प्रति सम्मानजनक होना चाहिए। हम डीएमके को एक ऐसी पार्टी के रूप में देखते हैं जो हमारे सामाजिक न्याय के आदर्श को साझा करती है। इसके नेताओं को ऐसी बातें कहने से बचना चाहिए जो आदर्श के विपरीत हों।
वहीं मारन के इस बयान पर तमिलनाडु भाजपा के अध्यक्ष के अन्नामलाई ने तगड़ा पलटवार किया है। अन्नामलाई ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट कर लिखा कि ‘डीएमके सांसद ने यूपी बिहार के हमारे दोस्तों को लेकर जो बयान दिया है, उसे लेकर डीएमके का कहना है कि वह वीडियो पुराना है, लेकिन इससे ये तथ्य नहीं बदल सकता कि डीएमके बंटवारे के सिद्धातों पर बनी पार्टी है और आज भी इसके नेता ऐसी भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं?’ के अन्नामलाई ने डीएमके नेता टीआरबी राजा के पुराने ट्वीट भी सोशल मीडिया पर पोस्ट किए। जिनमें राजा ने यूपी बिहार के लोगों को लिए अपमानजनक बातें लिखीं थी। अन्नामलाई ने इन ट्वीट को लेकर भी डीएमके पर निशाना साधा। डीएमके सांसद मारन के बयान पर भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि घमंडिया गठबंधन देश में नफरत फैला रहा है और इसके नेता परेशान होकर ऐसे बयान दे रहे हैं। भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने भी मारन के बयान पर निशाना साधते हुए कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि विपक्षी गठबंधन देश को बांटने की कोशिश कर रहा है। तमिलनाडु में भाजपा के नेताओं ने भी डीएमके नेताओं पर उत्तर भारतीयों के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। तमिलनाडु के सरकारी स्कूलों में हिंदी नहीं पढ़ाई जाती है। वहां 90 के दशक तक इन स्कूलों में हिंदी के शिक्षक होते थे। बाद में इस विषय को हटा लिया गया। हालांकि, भाषा विकल्प के रूप में हिंदी आज भी है। केंद्र सरकार नई शिक्षा नीति लाने जा रही है, जिसमें तीन भाषाओं को सीखने का प्रावधान है। तमिलनाडु की डीएमके सरकार इसका भी विरोध कर रही है।
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Author: AK
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