
देश के चुनाव आयुक्तों के नाम तय हो चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अध्यक्षता में आज की हुई बैठक के बाद ज्ञानेश कुमार और सुखविर सिंह संधू को नए चुनाव आयुक्त के रूप में चुन लिया गया है।
कौन हैं ज्ञानेश कुमार और सुखविर सिंह संधू
बता दें कि ज्ञानेश कुमार 1988 बैच के केरल कार्डर के आईएएस ऑफीसर हैं। कुछ दिनों पहले ही सहकारिता मंत्रालय से रिटायर हुए हैं। इससे पहले ज्ञानेश कुमार गृह मंत्रालय में कश्मीर डिविजन के जॉइंट सेक्रेटरी थे। ज्ञानेश कुमार ने जम्मू कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश में बदलने में मुख्य भूमिका निभाई है। उनके कार्यकाल के दौरान ही राज्य में धारा 370 हटाया गया था। गृह मंत्रालय से पदोन्नति पाकर ज्ञानेश कुमार को एडिशनल सेक्रेटरी बनाया गया था।
वहीं सुखबीर सिंह संधू पंजाब से ताल्लुक रखते हैं। एसएस संधू 1988 बैच के उत्तराखण्ड कैडर के आईएएस अधिकारी हैं। जनवरी 2024 तक वह उत्तराखण्ड राज्य से मुख्य सचिव रहें। संधू जुलाई 2021 में राज्य के मुख्य सचिव बनाए गए थे।
इन नामों पर भी हुए चर्चा
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी के मुताबिक इस बैठक में उत्पल कुमार सिंह, प्रदीप कुमार त्रिपाठी, ज्ञानेश कुमार, इंदीवीर पांडेय, सुखबीर सिंह, गंगाधर राहत के नामों पर चर्चा की गई।
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी का आरोप, नहीं मानते इसे चुनावी प्रक्रिया को सही
कांग्रेस नेता और समिति के सदस्य अधीर रंजन चौधरी ने बताया कि आज दो इलेक्शन कमिश्नर के चयन की मीटिंग हुई। चुनाव केलिए पद रिक्त नहीं होना चाहिए, हम यह मानते हैं। इस समिति में पीएम नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री अमित शाह, अर्जुनराम मेघवाल और अधीर रंजन चौधरी शामिल थे। अधीर रंजन चौधरी ने आरोप लगाते हुए कहा कि मैंने पहले ही एक शॉर्टलिस्ट मांगा था। मतलब छोटी सूची हमें सौंपी जाए। मुझे जो सूची दी गई थी, उसमें 212 नाम ते। हमारी कमेटी में पीएम मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल हैं। यानि सरकार की बहुमत है। यानी सरकार के मुताबिक ही चुनाव आयुक्त का चयन होगा।
अधीर रंजन चौधरी ने आगे कहा कि चुनाव आयुक्तों के चयन की इस प्रक्रिया को मैं मान्यता नहीं देता हूं। मैंने बारी से डीसेंट नोट दिया है। मैंने कहा, मैं नहीं मानता, लोकतंत्र के इतने बड़े पद, इतने कद्दावर नेता का नाम मेरे हाथ में औपचारिकता है। मुझे 212 नाम दिए गए थे। आखिरी के 10 मिनट में 6 नाम दिए गए। यही डिटेंस नोट मैंने दिया। अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि वे चुनाव आयुक्तों के चयन की इस प्रक्रिया को नहीं मानते हैं और मान्यता नहीं देते हैं।
अपडेट जारी है…..
Author: AK
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