औसानेश्वर मंदिर में सावन के तीसरे सोमवार को करंट लगने से भगदड़ मच गई। हादसे में दो श्रद्धालुओं की मौत, 40 घायल हुए।
Stampede at Ausaneshwar Temple: 2 Dead, 40 Injured
औसानेश्वर मंदिर में भगदड़: सावन के तीसरे सोमवार पर दर्दनाक हादसा
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में सावन के तीसरे सोमवार को औसानेश्वर महादेव मंदिर में हुए हादसे ने श्रद्धालुओं की आस्था को झकझोर कर रख दिया। जब लोग भक्ति भाव में डूबे हुए थे और भोलेनाथ के जलाभिषेक के लिए मंदिर परिसर में कतारबद्ध खड़े थे, तब अचानक करंट फैलने से भगदड़ मच गई। इस दर्दनाक हादसे में दो श्रद्धालुओं की जान चली गई, जबकि करीब 40 लोग घायल हो गए।
यह हादसा न केवल प्रशासनिक चूक का संकेत देता है, बल्कि धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर कमी को भी उजागर करता है।
हादसे की पूरी घटना: कैसे मची भगदड़
रात से लगी थी भक्तों की कतार
हर साल की तरह इस साल भी सावन के तीसरे सोमवार को औसानेश्वर मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे। हैदरगढ़ स्थित इस प्राचीन शिव मंदिर में रात 12 बजे से ही जलाभिषेक की तैयारी में भक्त कतार में खड़े थे।
टिन शेड पर गिरी बिजली की तार
सुबह करीब तीन बजे एक अप्रत्याशित हादसा हुआ। मंदिर परिसर में धूप और बारिश से बचाव के लिए जो टिन शेड लगाया गया था, उस पर एक टूटी हुई बिजली की तार गिर गई। बताया जा रहा है कि यह तार वहां आसपास मौजूद बंदरों के दौड़ने के कारण टूटकर गिरा।
करंट फैलने से मची अफरा-तफरी
तार गिरते ही टिन शेड में करंट फैल गया। इससे डर और घबराहट का माहौल बन गया और भगदड़ की स्थिति उत्पन्न हो गई। लोग जान बचाने के लिए एक-दूसरे को धक्का देते हुए भागने लगे। इस दौरान कई श्रद्धालु गिर गए और कुछ दब भी गए।
मृत और घायल श्रद्धालुओं की जानकारी
इस हादसे में त्रिवेदीगंज के मुबारकपुर निवासी 22 वर्षीय प्रशांत की मौके पर ही मौत हो गई। दूसरे मृतक की पहचान की पुष्टि घटना के बाद हुई।
40 से अधिक श्रद्धालु घायल हुए हैं, जिनका उपचार हैदरगढ़ और त्रिवेदीगंज के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में किया जा रहा है। रायबरेली के मझीसा निवासी अर्जुन की हालत गंभीर बताई जा रही है और उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया और जांच के आदेश
जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक मौके पर पहुंचे
जैसे ही इस दुखद हादसे की जानकारी प्रशासन को मिली, जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी और पुलिस अधीक्षक अर्पित विजयवर्गीय ने घटनास्थल का दौरा किया। उन्होंने घायलों के बेहतर इलाज के निर्देश दिए और पूरे घटनाक्रम की जांच के आदेश भी दिए हैं।
प्राथमिक जांच के अनुसार बंदरों की वजह से टूटी थी तार
प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि मंदिर परिसर में काफी संख्या में बंदर रहते हैं। इन्हीं बंदरों के दौड़ने-भागने की वजह से बिजली की तार टूटकर टिन शेड पर गिर गई, जिससे यह हादसा हुआ।
औसानेश्वर मंदिर: धार्मिक आस्था का केंद्र
450 साल पुराना ऐतिहासिक मंदिर
औसानेश्वर महादेव मंदिर बाराबंकी जिले के हैदरगढ़ क्षेत्र में स्थित एक प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिर है। पुरातत्व विभाग के अनुसार यह मंदिर लगभग 450 वर्ष पुराना है और ढाई एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है।
सावन में उमड़ती है भारी भीड़
हर सावन में विशेषकर सोमवार को हजारों श्रद्धालु इस मंदिर में जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। मंदिर परिसर छोटा होने के बावजूद भीड़ का नियंत्रण कई बार प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
हरिद्वार का हादसा: एक दिन पहले मची थी भगदड़
इस दुखद घटना से ठीक एक दिन पहले उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित प्रसिद्ध मनसा देवी मंदिर में भी भगदड़ की खबर आई थी।
भीड़ नियंत्रण में विफल रहा प्रशासन
मनसा देवी मंदिर में रविवार को कांवड़ यात्रा समाप्त होने के बाद अचानक श्रद्धालुओं की संख्या में भारी बढ़ोत्तरी हो गई। प्रशासनिक तैयारियों की कमी के कारण वहां भी भगदड़ की स्थिति बन गई, जिसमें आठ लोगों की मौत और 30 से अधिक घायल हो गए।
धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा: ज़िम्मेदारी किसकी?
प्रबंधन में लापरवाही की कीमत चुकाते हैं श्रद्धालु
हर वर्ष सावन और अन्य धार्मिक अवसरों पर होने वाली दुर्घटनाएं इस ओर इशारा करती हैं कि भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था की अनदेखी अक्सर गंभीर हादसों में बदल जाती है।
औसानेश्वर मंदिर में करंट फैलने की घटना को रोका जा सकता था, अगर तारों की नियमित जांच और पशु नियंत्रण की व्यवस्था होती।
स्थानीय प्रशासन और मंदिर समितियों को सतर्क होना होगा
धार्मिक स्थलों पर भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा इंतजाम, विद्युत तारों की मरम्मत, सीसीटीवी निगरानी और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित करना नितांत आवश्यक है।
सरकार से अपेक्षाएं: श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोपरि
भविष्य के लिए सबक
औसानेश्वर मंदिर की यह घटना एक चेतावनी है कि अब धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। सरकार को न केवल पीड़ितों को मुआवजा देना चाहिए, बल्कि सुरक्षा मानकों की समीक्षा कर सख्त नियम भी लागू करने होंगे।
स्थायी समाधान की जरूरत
भीड़ नियंत्रित करने के लिए डिजिटल टोकन व्यवस्था, सीमित प्रवेश संख्या, पुलिस तैनाती और स्वचालित निगरानी प्रणाली जैसे उपाय अपनाए जाने चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोहराई न जाएं।
निष्कर्ष: श्रद्धा के स्थान पर सुरक्षा की चूक नहीं होनी चाहिए
औसानेश्वर मंदिर हादसा श्रद्धा से जुड़ी उस भावना को झकझोरता है, जिसमें श्रद्धालु निःस्वार्थ भाव से अपने आराध्य के दर्शन करने आते हैं, लेकिन व्यवस्था की लापरवाही के कारण जान गंवानी पड़ती है।
अब समय आ गया है कि राज्य सरकार, स्थानीय प्रशासन और मंदिर समिति मिलकर यह सुनिश्चित करें कि कोई श्रद्धालु सिर्फ एक दर्शन के लिए अपनी जान न गंवाए। धार्मिक आस्था का सम्मान तभी होगा, जब श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बने।
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Author: AK
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