गुरु, अप्रैल 2, 2026

कांग्रेस ने मोदी सरकार पर संविधान की कॉपी से समाजवादी-धर्मनिरपेक्ष शब्द हटाने के लगाए आरोप, कानून मंत्री ने दी सफाई

18 सितंबर से मोदी सरकार के द्वारा बुलाए गए संसद के विशेष सत्र में कांग्रेस और भाजपा के बीच कई मुद्दों पर बहस का दौर जारी है। मंगलवार को मोदी सरकार ने नए संसद में महिला आरक्षण बिल पेश किया था। जिसके बाद कांग्रेस ने कहा यह बिल हमारा है। महिला आरक्षण बिल का श्रेय लेने के लिए मोदी सरकार और कांग्रेस के बीच दावे किए जा रहे हैं। वहीं इस बार संसद के विशेष सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सदन में अभी तक दो बार लंबी स्पीच भी दे चुके हैं। वहीं कांग्रेस पार्टी की ओर से पश्चिम बंगाल के बहरामपुर से सांसद अधीर रंजन चौधरी ने मोर्चा संभाला हुआ है। कांग्रेस सांसद चौधरी ने मंगलवार को नई संसद भवन में अपनी स्पीच में भाषण सरकार पर नया आरोप लगाया है।

“Socialist, Secular” Missing In Constitution’s New Copies

बता दें कि एक दिन पहले नए संसद भवन के उद्घाटन के दौरान राजनेताओं को संविधान की नई कॉपियां दी गई । इसके बाद लोकसभा में कांग्रेस सांसद ने कहा है कि जो नई कॉपियां दी गईं, उनमें समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष शब्द नहीं हैं।अधीर ने कहा, ‘हम जानते हैं ये शब्द 1976 में एक संशोधन के बाद जोड़े गए थे, लेकिन अगर आज कोई हमें संविधान देता है और उसमें ये शब्द नहीं हैं, तो यह चिंता की बात है।

“Socialist, Secular” Missing In the Constitution’s New Copies

अधीर रंजन ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि भाजपा की मंशा संदिग्ध है। ये बड़ी चतुराई से किया गया है। यह मेरे लिए चिंता का विषय है। मैंने इस मुद्दे को उठाने की कोशिश की, लेकिन मुझे इस मुद्दे को उठाने का मौका नहीं मिला। जब मैं इसे पढ़ रहा था, मुझे ये दो शब्द नहीं मिले। मैंने इन्हें अपने आप जोड़ा, मैंने इसे राहुल गांधी को भी दिखाया। हम संशोधन क्यों करते हैं? यह हमारे संविधान को बदलने की जानबूझकर की गई कोशिश को दर्शाता है।

वहीं कांग्रेस के इस आरोप के बाद केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन मेघवाल ने कहा, ‘जब संविधान अस्तित्व में आया, तब समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष शब्द नहीं थे। ये शब्द संविधान के 42वें संशोधन में जोड़े गए। बता दें कि विशेष सत्र के दूसरे दिन नए संसद परिसर में लोकसभा में अपने भाषण के दौरान कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा था कि किसी को भी ‘इंडिया’ और ‘भारत’ के बीच अनावश्यक दरार पैदा करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। भारत के संविधान के अनुसार दोनों में कोई अंतर नहीं है।

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AK
Author: AK

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