हरिपुरधार में हुए सिरमौर बस हादसे में 14 लोगों की मौत के पीछे खराब सड़क, कीचड़ और पैराफिट की कमी जैसे कारण सामने आए हैं।
Sirmaur Bus Accident: Who Is Responsible for 14 Deaths?

परिचय
हिमाचल प्रदेश का सिरमौर जिला अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है, लेकिन दुर्भाग्य से यह इलाका बार-बार भीषण सड़क हादसों के लिए भी सुर्खियों में रहता है। हाल ही में श्रीरेणुकाजी विधानसभा क्षेत्र के हरिपुरधार में हुआ बस हादसा इसका ताजा उदाहरण है, जिसमें 14 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। यह हादसा सिर्फ एक वाहन दुर्घटना नहीं, बल्कि वर्षों से उपेक्षित सड़क व्यवस्था और कमजोर सुरक्षा इंतजामों की भयावह तस्वीर है। सवाल यह है कि आखिर इस त्रासदी का असली जिम्मेदार कौन है – बस चालक, वाहन मालिक, या वह सिस्टम जिसने इन सड़कों को मौत का रास्ता बना दिया।
हरिपुरधार बस हादसा कैसे हुआ
वीरवार शाम करीब तीन बजे हरिपुरधार मार्ग पर एक निजी जीत कोच बस अचानक संतुलन खो बैठी और करीब 400 मीटर गहरी खाई में जा गिरी। इस दुर्घटना में बस में सवार 14 यात्रियों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों और शुरुआती जांच में यह सामने आया कि हादसे वाली जगह पर सड़क बेहद खराब थी।
कीचड़ और गड्ढों ने बढ़ाया खतरा
बताया जा रहा है कि उस समय इलाके में पाला पड़ा हुआ था, जिससे सड़क पर पानी जम गया था और कीचड़ बन गया। सड़क पर पहले से ही गहरे गड्ढे मौजूद थे। जैसे ही बस उस हिस्से पर पहुंची, टायर फिसल गए और चालक के पास बस को नियंत्रित करने का कोई मौका नहीं बचा।
पैराफिट न होना बना जानलेवा
हादसे वाली जगह पर सड़क किनारे पैराफिट या सुरक्षा दीवार नहीं थी। अगर मजबूत पैराफिट होती, तो फिसलने के बाद भी बस खाई में गिरने से रुक सकती थी। यही कारण है कि विशेषज्ञों का मानना है कि यह दुर्घटना पूरी तरह टाली जा सकती थी।
क्या बस या चालक की गलती थी
इस हादसे के बाद सबसे पहले लोगों के मन में यह सवाल उठा कि कहीं बस के दस्तावेज या उसकी फिटनेस में कोई कमी तो नहीं थी। लेकिन क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी ने स्पष्ट किया कि बस के सभी कागजात पूरी तरह सही थे।
बस के दस्तावेज पूरी तरह वैध
- बस नंबर: HP64-6667
- परमिट वैध: 8 जुलाई 2029 तक
- फिटनेस: 14 फरवरी 2026 तक
- इंश्योरेंस: 12 फरवरी 2026 तक
- सीटिंग कैपेसिटी: 39 यात्री
इससे साफ है कि Haripurdhar bus crash का कारण बस या उसके कागजात नहीं, बल्कि सड़क की हालत और सुरक्षा व्यवस्था की कमी थी।
सिरमौर जिले में सड़क हादसों का भयावह रिकॉर्ड
सिरमौर में यह कोई पहला हादसा नहीं है। पिछले दो दशकों में यहां दर्जनों भीषण दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें सैकड़ों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।
कुछ बड़े हादसों की सूची
- वर्ष 2000, डिंगर किन्नर: बारात की बस खाई में गिरने से 46 मौतें
- 2013, द्राबला: निजी बस दुर्घटना में 21 मौतें
- 2014, टिंबी: 19 लोग मारे गए
- 2018, जलाल पुल: बस नदी में गिरने से 10 मौतें
- 2019, खडकोली: स्कूल बस दुर्घटना में 8 बच्चे मरे
- 2021, कोटी उतरऊ: बरात की गाड़ी गिरने से 10 मौतें
इन आंकड़ों से साफ है कि Sirmaur road accidents कोई अपवाद नहीं, बल्कि लगातार चल रही त्रासदी है।
पहाड़ी सड़कों की खराब हालत
सिरमौर और आसपास के पहाड़ी इलाकों में सड़कें बेहद संकरी, टूटी-फूटी और बिना सुरक्षा दीवारों के बनी हुई हैं। कई जगहों पर ड्रेनेज की सुविधा नहीं है, जिससे बारिश या बर्फबारी के बाद सड़क पर पानी और कीचड़ जमा हो जाता है।
क्यों खतरनाक हैं ये सड़कें
- पहाड़ी ढलान
- तीखे मोड़
- गहरे गड्ढे
- पैराफिट का अभाव
इन्हीं कारणों से अक्सर बस fell into gorge जैसी खबरें सामने आती हैं।
प्रशासनिक दावों की पोल
हर बड़े हादसे के बाद प्रशासन और सरकार सड़क सुरक्षा को लेकर बड़े-बड़े दावे करती है। कहा जाता है कि सड़कों की मरम्मत होगी, पैराफिट लगाए जाएंगे और ड्राइवरों को प्रशिक्षित किया जाएगा। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। हरिपुरधार का हादसा दिखाता है कि ये दावे सिर्फ कागजों तक सीमित हैं।
क्या इस हादसे को रोका जा सकता था
विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का मानना है कि अगर समय रहते सड़क की मरम्मत कर दी जाती, गड्ढे भर दिए जाते और सुरक्षा दीवारें लगाई जातीं, तो यह हादसा नहीं होता। साफ है कि Himachal road safety की अनदेखी ने 14 लोगों की जान ले ली।
आगे क्या किया जाना चाहिए
इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कुछ ठोस कदम जरूरी हैं।
जरूरी उपाय
- सभी पहाड़ी सड़कों पर मजबूत पैराफिट
- नियमित सड़क मरम्मत
- बेहतर ड्रेनेज सिस्टम
- तेज मोड़ों पर चेतावनी बोर्ड
- बस चालकों की नियमित ट्रेनिंग
निष्कर्ष
हरिपुरधार में हुआ सिरमौर बस हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि व्यवस्था की विफलता का नतीजा है। 14 लोगों की मौत के पीछे खराब सड़कें, कीचड़, गड्ढे और सुरक्षा इंतजामों की कमी जिम्मेदार है। जब तक इन समस्याओं का समाधान नहीं किया जाएगा, तब तक Sirmaur bus accident जैसी घटनाएं दोहराती रहेंगी। यह समय है कि सरकार और प्रशासन सिर्फ मुआवजा देने के बजाय जमीनी स्तर पर सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता दें, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसा दर्द न झेलना पड़े।
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Author: AK
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