
सितंबर महीना बीतने को है लेकिन मानसून अभी भी कई राज्यों में मुसीबत बना हुआ है। पड़ोसी राष्ट्र नेपाल, बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में बारिश ने भारी तबाही मचाई है। इन दिनों सबसे बुरे हाल बिहार के हैं। बारिश के बाद बिहार के कई जिलों में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। मौसम विभाग के मुताबिक अभी तीन-चार दिन बिहार में बारिश का मौसम बना रहेगा। नेपाल में कई दिनों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश का असर बिहार पर भी पड़ा है। नेपाल में बारिश के कारण 56 साल बाद कोसी नदी रिकॉर्ड तोड़ने वाली है। नेपाल से भी 5 लाख 93 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे गंडक बराज में पानी 5 लाख क्सूसेक तक पहुंच जाएगा। गंडक के आसपास जिलों के निचले इलाकों के लोगों को सतर्क रहने की अपील की गई है। बगहा, बेतिया, गोपालगंज, छपरा आदि जिलों में बाढ़ की संभावना है। बिहार का शोक कही जाने कोसी नदी तिब्बत से निकलती है जो चीन और नेपाल होते हुए भारत पहुंचती है। नदियों में उफान से 6 तटबंध और एक सुरक्षा बांध ध्वस्त हो गए हैं। बगहा शहर में बाढ़ का पानी घुस गया है जिसके चलते लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।




वहीं जोगबनी में ट्रैक पर पानी चढ़ गया है जिसकी वजह से छह घंटे तक ट्रेनों का परिचालन बाधित रहा। नेपाल में लगातार वर्षा से बिहार में नदियों ने रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। दरभंगा जिले के किरतपुर प्रखंड के भुभोल गांव के समीप कोसी नदी का पश्चिमी तटबंध करीब 10 मीटर की दूरी में रविवार की देर रात टूट गया।उत्तर बिहार में रविवार को छह अन्य तटबंध भी टूट गए। इनमें सीतामढ़ी के तीन, पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण और शिवहर में एक-एक शामिल हैं। पश्चिम चंपारण में एक सुरक्षा बांध भी ध्वस्त हो गया। सैकड़ों गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है, जबकि हजारों एकड़ में लगी फसल डूब गई है। लाखों की आबादी प्रभावित है और हजारों की संख्या में लोग सुरक्षित स्थान की तलाश में पलायन कर रहे हैं। वाल्मीकिनगर बराज से 3.61 लाख व मधुबनी में कोसी बराज से 6.68 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया।
पूर्व बिहार, कोसी व सीमांचल में रविवार को पांच लोग डूब गए। पटना में गांधीघाट पर गंगा रविवार की शाम खतरे के निशान के ऊपर बहने लगी है। इधर, भागलपुर को कहलगांव से जोड़ने वाले पुल का एप्रोच स्लैब बाढ़ के पानी के दबाव के कारण रविवार को तीन सेंटीमीटर धंस गया। इससे पुल और स्लैब के बीच दरार हो गई है। वहीं दूसरी ओर नेपाल में बारिश के कारण बाढ़ और भूस्खलन में मरने वालों की संख्या बढ़कर रविवार को 170 हो गई, जबकि 42 लापता हैं। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। शुक्रवार से पूर्वी और मध्य नेपाल के बड़े हिस्से जलमग्न हो गए हैं और देश के कई हिस्सों में अचानक बाढ़ आ गई है। पुलिस के अनुसार, नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन के कारण अब तक 170 लोग मारे गए हैं। गृह मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, बाढ़ और भूस्खलन की वजह से 42 लोग लापता हैं। गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ऋषिराम पोखरेल ने बताया कि बाढ़ से संबंधित घटनाओं में 111 लोग घायल हुए हैं। पोखरेल ने बताया कि सभी सुरक्षा एजेंसियों की मदद से खोज एवं बचाव अभियान जारी है। उन्होंने कहा कि नेपाली सेना ने देशभर में फंसे 162 लोगों को हवाई मार्ग से निकाला है। वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण पूरे एशिया में बारिश की मात्रा और समय में बदलाव आ रहा है। बाढ़ और भूस्खलन के कारण नेपाल के कई हिस्सों में जनजीवन ठप हो गया है। कई राजमार्ग और सड़कें अवरुद्ध हैं, सैकड़ों मकान और पुल बह गए हैं तथा सैकड़ों परिवार विस्थापित हो गए हैं। सड़क अवरुद्ध होने के कारण विभिन्न स्थानों पर हजारों यात्री फंसे हुए हैं।
Author: AK
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