
भारतीय रिजर्व बैंक आरबीआई ने 5 साल बाद राहत भरी खबर सुनाई। भारतीय रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी ने रेपो रेट में कटौती तो की है लेकिन इस पर रुख में बदलाव न करते हुए इसे ‘न्यूट्रल’ पर ही बरकरार रखा है। तीन दिन तक चली बैठक के बाद रेपो रेट में 0.25 फीसदी की कटौती का एलान किया गया है। इस कटौती के बाद रेपो रेट 6.50 फीसदी से घटकर 6.25 फीसदी हो गया है। इससे होम लोन, ऑटो लोन और पर्सनल लोन सहित सभी खुदरा कर्ज सस्ते हो जाएंगे और ईएमआई भी घटेगी। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने सुबह 10 बजे मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी में लिए फैसलों की जानकारी दी। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है, लेकिन वैश्विक चुनौतियों से अछूती नहीं है। हमारा प्रयास हितधारकों के साथ परामर्श करना और उन्हें महत्व देना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि नई फसल की आवक के साथ खाद्य मुद्रास्फीति में नरमी आने की संभावना है। बढ़ती महंगाई और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के कारण आरबीआई ने लंबे समय तक ब्याज दरें ऊंची बनाए रखीं। लेकिन अब जब अर्थव्यवस्था स्थिर हो रही है तो रेपो रेट में कटौती कर लोगों को राहत देने का फैसला किया गया है। मार्च 2022 में में आरबीआई ने रूस- यूक्रेन से वैश्विक भू-राजनीति हालात विकट होने और महंगाई बढने के कारण अचानक रेपो रेट बढाने का फैसला लिया। तब आरबीआई को 01 अगस्त 2018 के बाद पहली बार ब्याज दरें बढ़ाने का निर्णय लेना पड़ा।
भारतीय रिजर्व बैंक ने मई 2020 में रेपो रेट में कमी की थी:
आरबीआई ने करीब 5 साल बाद रेपो रेट में कमी की है। पिछली बार मई 2020 में रेपो रेट में 0.40% की कमी की गई थी। हालांकि इसके बाद मई 2022 में रेपो रेट को बढ़ाया था। आखिरी बार रेपो रेट में फरवरी 2023 में बदलाव किया गया था। उस समय इसमें बढ़ोतरी कर इसे 6.50% किया गया था। तब से लेकर पिछली एमपीसी मीटिंग तक इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया था। पिछली मीटिंग दिसंबर 2024 में हुई थी। रेपो रेट वह दर होती है जिस पर रिजर्व बैंक दूसरे बैंकों को पैसा उधार देता है। अगर रिजर्व बैंक कम दर पर पैसा उधार देगा तो बैंक भी ग्राहकों को कम दर पर लोन मुहैया कराते हैं। इसमें होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन आदि शामिल हैं। रेपो रेट कम होने से मिडिल क्लास को बड़ा फायदा होता है, क्योंकि इससे ईएमआई का बोझ कम हो जाता है। वहीं दूसरी ओर बाजार में लिक्विडिटी भी बढ़ती है। जब इकनॉमी बुरे दौर से गुजर रही होती है तो मनी फ्लो बढ़ाकर इसकी रिकवरी करनी होती है। ऐसे में रिजर्व बैंक ब्याज दरों में कमी करते हैं। ब्याज दरों में कमी होने से लोन सस्ता होता है और ईएमआई को बोझ हल्का होता है। वहीं जब महंगाई ज्यादा बढ़ती है तो रिजर्व बैंक रेपो रेट बढ़ाकर मनी फ्लो को कम करता है।
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Author: AK
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