गुरु, फ़रवरी 5, 2026

RBI ने रेपो रेट में 25 bps की कटौती कर इसे 5.25% किया: मज़बूत GDP ग्रोथ और रिकॉर्ड-लो महंगाई के बीच बड़ा फैसला

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा में मुख्य रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट (bps) की कटौती करते हुए इसे 5.50% से घटाकर 5.25% कर दिया है। यह निर्णय ऐसे समय आया है जब भारत की GDP ग्रोथ लगातार मज़बूत दिख रही है और मुद्रास्फीति (Inflation) कई सालों के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुँच चुकी है।

RBI का यह कदम अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, क्योंकि ब्याज दरों में कमी आमतौर पर निवेश, व्यवसायिक गतिविधियों और उपभोक्ता खर्च को बढ़ावा देती है।

क्यों की गई 25 bps की ब्याज दर कटौती?

1. GDP ग्रोथ बनी मजबूत

विभिन्न संस्थानों द्वारा हाल ही में जारी किये गए आँकड़ों के अनुसार भारत की GDP ग्रोथ अनुमान से अधिक रही है।

मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस सेक्टर और कृषि—तीनों में सकारात्मक रुझान ने आर्थिक गति को मजबूत रखा है।

RBI के अनुसार, अर्थव्यवस्था की मजबूत बुनियाद दर कटौती के लिए आवश्यक लचीलापन प्रदान करती है, जिससे भारत की इकोनॉमी अच्छी दिशा तय करती है।

2. महंगाई रिकॉर्ड निचले स्तर पर

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई दर कई महीनों से लक्षित दायरे (4%±2%) के भीतर बनी हुई है।

खाद्य और ईंधन कीमतों में स्थिरता ने inflation पर दबाव घटाया है।

कम महंगाई RBI को ब्याज दरों में कटौती करने की गुंजाइश देती है।

इस फैसले का क्या अर्थ है?

1. आम लोगों पर प्रभाव

रेपो दर कम होने से होम लोन, ऑटो लोन और पर्सनल लोन सस्ते हो सकते हैं।

EMI में भी  कमी आने की संभावना है।

कम दर की वजह से कर्ज लेने की क्षमता बढ़ेगी और उपभोग में वृद्धि होगी।

2. उद्योग जगत को मिलेगी नई ताकत

कारोबारों को सस्ता लोन मिलेगा जिससे निवेश तेज़ हो सकता है, और निवेश में वृद्धि का असर रोजगार के अवसर के रूप में देखा जा सकता है।

MSME सेक्टर को विशेष रूप से राहत मिलेगी और छोटे उद्योगों में बेहतरी के अंदेशा होगा

रोजगार सृजन में भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

3. शेयर बाज़ार पर भी होगा असर

बैंकिंग, रियल एस्टेट, ऑटो और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में तेजी देखने को मिल सकती है।

निवेशकों की भावना पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।

RBI आगे क्या कर सकता है?

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर महंगाई नियंत्रित रहती है, तो आगे भी मामूली कटौती की संभावना बनी रह सकती है।

लेकिन वैश्विक आर्थिक परिस्थितियाँ—जैसे अमेरिकी व्यापार नीति के निर्णय, कच्चे तेल की कीमतें और भू-राजनीतिक तनाव—भविष्य की नीतियों को प्रभावित कर सकते हैं। वहीं RBI महंगाई को प्राथमिकता देते हुए संतुलित रुख बनाए रख सकता है।

निष्कर्ष

RBI का रेपो रेट को 25 bps कम कर 5.25% करना भारतीय अर्थव्यवस्था की सकारात्मक दिशा को दर्शाता है। यह कदम मजबूत GDP ग्रोथ, स्थिर महंगाई और निवेश को बढ़ावा देने की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।
आम उपभोक्ता से लेकर उद्योग जगत—सभी पर इसका सकारात्मक प्रभाव दिख सकता है।

भारत का मौद्रिक माहौल अब अधिक अनुकूल है, और आने वाले महीनों में इसका असर आर्थिक गतिविधियों पर स्पष्ट रूप से देखने को मिल सकता है।

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Abhishek Kumar
Author: Abhishek Kumar

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