उत्तराखंड में भारी बारिश से केदारनाथ यात्रा रोकी गई, श्रीनगर में घरों में पानी घुसा, यमुनोत्री मार्ग धंसा, प्रशासन अलर्ट पर।
Rain Havoc in Uttarakhand: Kedarnath Yatra Halted, Homes Flooded
उत्तराखंड में भारी बारिश से हाहाकार: केदारनाथ यात्रा रोकी गई, श्रीनगर में घरों तक घुसा पानी
भूमिका: जब आस्था की राह में प्रकृति बनी दीवार
हर साल लाखों श्रद्धालु उत्तराखंड के चार धामों की यात्रा पर निकलते हैं, लेकिन जुलाई 2025 की बारिश ने न सिर्फ आस्था के इस सफर को रोक दिया, बल्कि लोगों की ज़िंदगी को भी अस्त-व्यस्त कर दिया। इस बार मानसून ने विशेष रूप से केदारनाथ और यमुनोत्री यात्रा मार्गों को प्रभावित किया है।
बारिश ने उत्तराखंड के कई पर्वतीय जिलों को अपना निशाना बनाया है। प्रशासन अलर्ट मोड पर है और कई जगहों पर राहत व बचाव कार्य चलाए जा रहे हैं। मौसम विभाग की चेतावनियों के अनुसार, 31 जुलाई तक भारी वर्षा की संभावना है, जिससे स्थिति और गंभीर हो सकती है।
केदारनाथ यात्रा पर ब्रेक: श्रद्धालु फंसे, मार्ग बाधित
क्यों रोकी गई केदारनाथ यात्रा?
उत्तराखंड की सबसे प्रमुख तीर्थ यात्राओं में से एक केदारनाथ यात्रा को शुक्रवार देर रात से रोक दिया गया है। गौरीकुंड से केदारनाथ की ओर जाने वाले मार्ग पर लगातार मूसलधार बारिश हो रही है, जिससे रास्ते पर मलबा और पानी भर गया है।
प्रशासन ने एहतियात के तौर पर यात्रियों को गौरीकुंड और सोनप्रयाग में ही रोका है।
अधिकारियों का बयान
रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन ने बताया कि जब तक मौसम सामान्य नहीं होता, तब तक यात्रा को फिर से शुरू नहीं किया जाएगा। राहत कार्य जारी है और श्रद्धालुओं को भोजन और शरण दी जा रही है।
यमुनोत्री मार्ग बंद: फूलचट्टी के पास सड़क धंसी
आवाजाही पूरी तरह ठप
यमुनोत्री धाम को जोड़ने वाली प्रमुख सड़क फूलचट्टी-जानकीचट्टी मार्ग पर शुक्रवार रात भूस्खलन हुआ, जिससे सड़क पूरी तरह से धंस गई।
इस हादसे के कारण दोनों ओर कई वाहन फंस गए, जिनमें स्थानीय लोग और तीर्थयात्री शामिल हैं। रास्ता संकरा और पहाड़ी है, जिससे राहत कार्यों में बाधा आ रही है।
प्रशासन की तैयारी
पुलिस, एनडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन की टीम मौके पर पहुंच चुकी है। फिलहाल, वैकल्पिक मार्ग तैयार किया जा रहा है ताकि फंसे यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा सके।
श्रीनगर गढ़वाल: घरों तक पहुंचा बारिश का पानी
स्थानीय निवासियों की मुसीबत
श्रीनगर गढ़वाल में शुक्रवार रात भारी बारिश के कारण एनआईटी के पास के घरों में पानी घुस गया। विशेष रूप से वार्ड नंबर 29 भक्तियाना क्षेत्र में पानी घरों के कमरों तक भर गया।
स्थानीय निवासी बोले
भास्कर रतूड़ी ने बताया कि शनिवार सुबह 4 बजे उनकी पत्नी जब उठीं, तो देखा कि पूरे कमरे में पानी भरा है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग की नालियां चोक होने के कारण यह स्थिति बनी।
नगर निगम की लापरवाही?
स्थानीय लोगों ने नगर निगम पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि अगर नालियों की समय पर सफाई हुई होती, तो घरों में पानी नहीं घुसता।
मौसम विभाग का पूर्वानुमान: 31 जुलाई तक राहत की उम्मीद नहीं
भारी बारिश का दौर जारी रहेगा
देहरादून मौसम केंद्र के अनुसार, उत्तराखंड में अगले 5–6 दिन तक भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है। विशेषकर देहरादून, चम्पावत, नैनीताल, टिहरी और पौड़ी जिलों में येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।
संभावित खतरे
- भूस्खलन और सड़कों के टूटने की आशंका
- नदियों में जलस्तर तेजी से बढ़ने की संभावना
- बिजली आपूर्ति और संचार व्यवस्था पर असर
- पर्वतीय क्षेत्रों में यात्रियों और ग्रामीणों को सावधानी बरतने की सलाह
प्रशासन की चेतावनी और सुरक्षा उपाय
यात्रा पर निकलने से पहले क्या करें?
- यात्रा पर निकलने से पहले मौसम अपडेट जरूर चेक करें
- स्थानीय प्रशासन या यात्रा कंट्रोल रूम से संपर्क करें
- अनावश्यक यात्रा टालें, विशेषकर रात में
- मोबाइल, टॉर्च, दवाइयां और भोजन की व्यवस्था रखें
- प्रशासन के निर्देशों का पालन करें
हेल्पलाइन नंबर जारी
राज्य सरकार ने विशेष हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं ताकि आपातकाल में तीर्थयात्री और स्थानीय नागरिक मदद ले सकें।
पहले भी आ चुकी हैं ऐसी आपदाएं
2013 की केदारनाथ त्रासदी
केदारनाथ की बात आते ही 2013 की आपदा अब भी लोगों के मन में ताज़ा है, जिसमें हजारों लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। इस बार भी वही डर लोगों के चेहरे पर साफ नजर आ रहा है।
हालांकि इस बार राहत है कि प्रशासन पहले से सतर्क है और समय रहते यात्रा को रोका गया है।
निष्कर्ष: बारिश में सावधानी ही सुरक्षा है
उत्तराखंड की यह मानसूनी आपदा बताती है कि प्रकृति के सामने इंसान को हर पल सजग रहना चाहिए। चाहे वो केदारनाथ की यात्रा हो या यमुनोत्री का सफर, सुरक्षा सर्वोपरि है।
बारिश जरूरी है लेकिन जब वह प्राकृतिक आपदा का रूप ले ले, तो उससे निपटने के लिए जनता और प्रशासन – दोनों को मिलकर जिम्मेदारी निभानी होगी। आने वाले दिनों में स्थिति कैसी बनेगी, यह मौसम और मानवीय संवेदनशीलता पर निर्भर करेगा।
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Author: AK
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