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विपक्षी गठबंधन दलों को कई दिनों से मणिपुर मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जवाब का इंतजार है। बुधवार को अविश्वास प्रस्ताव में लोकसभा में जोरदार चर्चा हुई। पहले सांसद राहुल गांधी ने मोदी सरकार को घेरा, तो शाम को गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्षी गठबंधन इंडिया पर करारा प्रहार किया। इससे पहले स्मृति ईरानी ने राहुल के आरोपों पर पलटवार किया। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बारी है। विपक्ष के लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर जारी चर्चा में पीएम मोदी आज सदन में जवाब देंगे। मानसून सत्र का कल (11 अगस्त) आखिरी दिन है। पिछले महीने 19 जुलाई से शुरू हुए हैं मानसून सत्र में मणिपुर मुद्दे पर सदन में पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस जारी है। बुधवार को राहुल गांधी ने लोकसभा में बोलते हुए मणिपुर मुद्दे पर भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर ताबड़तोड़ प्रहार किए। राहुल गांधी ने यहां तक कहा कि मणिपुर में हिंदुस्तान की हत्या की गई। हिंदुस्तान में भारत माता की हत्या की गई। मणिपुर को दो हिस्सों में बांट दिया गया। वहीं, राहुल के आरोपों पर केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और इसके बाद अमित शाह ने जवाब दिया। ईरानी ने कश्मीरी पंडितों पर अत्याचार और 1984 के सिख दंगों की घटनाओं का जिक्र कर कहा कि इनका इतिहास खून से सना है। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने मणिपुर पर राहुल के आरोपों पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि सबसे पहले आपकी पीठ पर, आपके आसन पर जिस तरह का आक्रामक व्यवहार देखा, उसका मैं खंडन करती हूं। मणिपुर खंडित नहीं। यह मेरे देश का अभिन्न अंग है। साथ ही उन्होंने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस का इतिहास खून से सना हुआ है। उन्होंने कहा कि पहली बार राष्ट्र के इतिहास में भारत माता की हत्या की बात कही गई। कांग्रेस पार्टी यहां पर तालियां बजाती रही। अविश्वास प्रस्ताव पर गृह मंत्री अमित शाह ने भी जवाब दिया। इस दौरान उन्होंने विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A. पर करारा प्रहार किया। शाह ने अपने संबोधन में कहा कि विपक्षी गठबंधन को सरकार में अविश्वास हो सकता है, लेकिन देश की जनता को पीएम मोदी में पूरा विश्वास है।
अमित शाह ने कहा, ‘मैं विपक्ष की इस बात से सहमत हूं कि मणिपुर में हिंसा का तांडव हुआ है। हमें भी दुख है। जो घटनाएं वहां हुई वो शर्मनाक है, लेकिन उस पर राजनीति करना और भी ज्यादा शर्मनाक। ये भ्रम फैलाया गया कि सरकार मणिपुर पर चर्चा नहीं करना चाहती। हम पहले दिन से चर्चा पर तैयार थे, लेकिन विपक्ष चर्चा नहीं हंगामा चाहता था। बता दें कि विपक्ष ने 26 जुलाई को मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था, जिसे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्वीकार कर लिया था। हालांकि भाजपा और उसके सहयोगियों के पास लोकसभा में पर्याप्त बहुमत है।
Author: AK
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