संसद का बजट सत्र 28 जनवरी से शुरू होगा। 30 जनवरी को आर्थिक सर्वेक्षण और 1 फरवरी को केंद्रीय बजट पेश होगा। पूरा शेड्यूल यहां पढ़ें।
Parliament Budget Session 2026 Starts January 28
परिचय
हर साल जब संसद का बजट सत्र शुरू होता है, तब पूरा देश आने वाले आर्थिक वर्ष की दिशा को लेकर उत्सुक हो जाता है। यह सत्र केवल सांसदों की बहस तक सीमित नहीं होता, बल्कि इसमें देश की आर्थिक सेहत, आम नागरिक की जेब, व्यापार, निवेश और रोजगार जैसे अहम विषयों का भविष्य तय होता है। इस बार संसद का बजट सत्र 28 जनवरी से शुरू होने जा रहा है और 1 फरवरी को केंद्रीय बजट पेश किया जाएगा। इससे पहले 30 जनवरी को आर्थिक सर्वेक्षण रखा जाएगा, जो देश की मौजूदा आर्थिक स्थिति की झलक देगा। इस पूरे कार्यक्रम को लेकर सरकार, उद्योग जगत और आम जनता सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
संसद के बजट सत्र की शुरुआत और राष्ट्रपति का संबोधन
28 जनवरी को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करेंगी। यह संबोधन सरकार की नीतियों और प्राथमिकताओं का औपचारिक परिचय होता है। इसमें बताया जाता है कि सरकार ने पिछले साल क्या हासिल किया और आगे किन क्षेत्रों पर फोकस रहेगा। इस भाषण के बाद लोकसभा और राज्यसभा में धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा होती है। यह चर्चा लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अहम हिस्सा है, क्योंकि विपक्ष इसी मंच पर सरकार से सवाल पूछता है और अपनी आलोचना सामने रखता है।
29 जनवरी को कार्यवाही क्यों नहीं होगी
29 जनवरी को बीटिंग रिट्रीट समारोह आयोजित होता है, जो गणतंत्र दिवस समारोहों का औपचारिक समापन होता है। इसी कारण इस दिन संसद के दोनों सदनों की बैठक नहीं होगी। हालांकि यह एक दिन का अवकाश है, लेकिन इसके बाद बजट सत्र अपनी पूरी गति पकड़ लेता है।
आर्थिक सर्वेक्षण: बजट से पहले देश की आर्थिक तस्वीर
आर्थिक सर्वेक्षण क्या बताता है
30 जनवरी को आर्थिक सर्वेक्षण पेश किए जाने की संभावना है। यह एक विस्तृत रिपोर्ट होती है, जिसमें देश की अर्थव्यवस्था के हर पहलू पर नजर डाली जाती है। इसमें सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि, महंगाई, निर्यात-आयात, रोजगार और सरकारी खर्च जैसे आंकड़े शामिल होते हैं।
बजट से इसका क्या संबंध है
Economic Survey India को बजट की नींव माना जाता है। सरकार इसी रिपोर्ट के आधार पर यह तय करती है कि किन क्षेत्रों में ज्यादा खर्च करना है और कहां सुधार की जरूरत है। उदाहरण के तौर पर अगर सर्वेक्षण में यह सामने आता है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था कमजोर है, तो बजट में किसानों और ग्रामीण विकास के लिए अधिक धन आवंटित किया जा सकता है।
1 फरवरी को पेश होगा केंद्रीय बजट
31 जनवरी को संसद की बैठक नहीं होगी, क्योंकि अगले दिन वित्त मंत्री लोकसभा में केंद्रीय बजट प्रस्तुत करेंगी। Union Budget 2026 में सरकार आने वाले वित्तीय वर्ष के लिए अपनी आय और खर्च का पूरा ब्यौरा रखेगी। इसमें टैक्स से लेकर सब्सिडी तक और रक्षा से लेकर शिक्षा तक हर क्षेत्र के लिए राशि तय की जाएगी।
केंद्रीय बजट का असर सीधा आम आदमी पर पड़ता है। आयकर में बदलाव, जीएसटी की दरें, पेट्रोल-डीजल पर टैक्स, किसानों की सहायता और छात्रों के लिए योजनाएं, ये सभी बजट के जरिए तय होती हैं। इसलिए हर परिवार इस दिन टीवी और मोबाइल पर बजट से जुड़ी खबरें ध्यान से देखता है।
13 फरवरी से अवकाश और 9 मार्च से दूसरा चरण
राष्ट्रपति के अभिभाषण और बजट पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के बाद संसद 13 फरवरी को लगभग एक महीने के अवकाश पर चली जाएगी। इस दौरान सरकार को विभिन्न दलों से मिले सुझावों और आलोचनाओं पर विचार करने का समय मिलता है। इसके बाद संसद 9 मार्च को फिर से शुरू होगी और 2 अप्रैल को सत्र समाप्त होगा। इसी अवधि में बजट से जुड़े सभी विधेयकों को पारित किया जाएगा ताकि नई वित्तीय व्यवस्था लागू हो सके।
लोकसभा और राज्यसभा की भूमिका
लोकसभा में बजट की अहमियत
बजट लोकसभा में पेश किया जाता है और वहीं से सरकारी खर्च को मंजूरी मिलती है। वित्त मंत्री का बजट भाषण लोकसभा के माध्यम से पूरे देश तक पहुंचता है।
राज्यसभा का योगदान
राज्यसभा बजट पर गहन चर्चा करती है और अपने सुझाव देती है। हालांकि वह सीधे खर्च से जुड़े विधेयकों को रोक नहीं सकती, लेकिन उसकी सलाह नीति निर्धारण में अहम भूमिका निभाती है। Lok Sabha Rajya Sabha के बीच यह संतुलन भारतीय लोकतंत्र की मजबूती को दर्शाता है।
विपक्ष और सरकार के बीच टकराव
हर बजट सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिलती है। विपक्ष महंगाई, बेरोजगारी और सामाजिक असमानता जैसे मुद्दों को उठाता है, जबकि सरकार अपने विकास कार्यों और आर्थिक सुधारों को गिनाती है। यही बहस लोकतंत्र की खूबसूरती है, क्योंकि इससे नीतियों पर पारदर्शी चर्चा होती है।
बजट सत्र का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
बजट सत्र का असर सिर्फ संसद तक सीमित नहीं रहता। शेयर बाजार, उद्योग, छोटे व्यापारी और विदेशी निवेशक सभी सरकार की घोषणाओं पर नजर रखते हैं। अगर सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर और उद्योगों में निवेश बढ़ाने की घोषणा करती है, तो इससे रोजगार के अवसर बढ़ते हैं और आर्थिक गतिविधियां तेज होती हैं।
राज्यों और आम जनता के लिए बजट का महत्व
Indian Parliament Budget में राज्यों को मिलने वाली वित्तीय मदद और करों का बंटवारा भी तय होता है। इससे राज्यों की विकास योजनाएं प्रभावित होती हैं। आम जनता के लिए बजट का मतलब होता है उनकी आमदनी, खर्च और बचत पर सीधा असर। अगर टैक्स में राहत मिलती है तो लोगों के पास खर्च करने के लिए ज्यादा पैसा होता है, जिससे बाजार में रौनक बढ़ती है।
इस बार बजट से क्या उम्मीदें हैं
इस साल लोगों को उम्मीद है कि सरकार रोजगार सृजन, महंगाई पर नियंत्रण और मध्यम वर्ग को राहत देने के लिए बड़े कदम उठाएगी। साथ ही डिजिटल इंडिया, हरित ऊर्जा और स्टार्टअप जैसे क्षेत्रों के लिए भी नई योजनाओं की घोषणा हो सकती है। सरकार का लक्ष्य है कि आर्थिक विकास को तेज करते हुए समाज के हर वर्ग तक लाभ पहुंचाया जाए।
निष्कर्ष
28 जनवरी से शुरू होने वाला संसद का बजट सत्र देश की आर्थिक दिशा तय करने का सबसे बड़ा मंच है। 30 जनवरी को आर्थिक सर्वेक्षण और 1 फरवरी को केंद्रीय बजट के साथ आने वाले साल की नीतियों की तस्वीर साफ हो जाएगी। इसके बाद 9 मार्च से 2 अप्रैल तक चलने वाले दूसरे चरण में इन नीतियों को कानून का रूप दिया जाएगा। इसलिए Parliament Budget Session केवल संसद की कार्यवाही नहीं, बल्कि हर भारतीय के भविष्य से जुड़ा एक महत्वपूर्ण अवसर है।
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Author: AK
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