बिहार में 10 लाख रुपये से अधिक की प्रॉपर्टी खरीद-बिक्री में PAN अनिवार्य, रजिस्ट्री रुकने का खतरा, टैक्स चोरी रोकने का फैसला।
PAN Mandatory for Property Deals Above ₹10 Lakh in Bihar
बिहार में 10 लाख रुपये से अधिक प्रॉपर्टी लेन-देन में PAN अनिवार्य
बिहार सरकार ने प्रॉपर्टी लेन-देन में पारदर्शिता बढ़ाने और टैक्स चोरी रोकने के लिए बड़ा कदम उठाया है। अब 10 लाख रुपये या उससे अधिक मूल्य की अचल संपत्ति (जमीन, मकान आदि) खरीद-बिक्री में PAN (Permanent Account Number) अनिवार्य कर दिया गया है। यह नियम पटना स्थित आयकर निदेशक के निर्देश के तहत लागू किया गया है।
उप निबंधक महानिरीक्षक ने स्पष्ट किया कि सभी जिला अवर निबंधकों को निर्देशित किया गया है कि ऐसे लेन-देन में खरीदार और विक्रेता का पैन जरूर लिया जाए और उसका सत्यापन भी किया जाए। यदि पैन उपलब्ध नहीं हो, तो फॉर्म-60 भरना अनिवार्य होगा।
PAN अनिवार्य होने के पीछे की वजह
बिहार के कई निबंधन कार्यालयों में अभी तक ITDRIN (Income Tax Department Reporting Identification Number) प्राप्त नहीं हुआ है। इसके कारण कई बड़े मूल्य के प्रॉपर्टी लेन-देन बिना पैन के हो रहे थे। यह टैक्स चोरी का मार्ग खोल सकता था।
- 10 से 30 लाख रुपये तक के प्रॉपर्टी लेन-देन में कई बार पैन की जानकारी नहीं दी गई।
- बिना पैन के लेन-देन की रिपोर्टिंग फॉर्म-61 के माध्यम से आयकर विभाग को नहीं की जा रही थी।
- अपर आयकर निदेशक रूपेश अग्रवाल ने चेतावनी दी कि नियमों का पालन न करने वाले निबंधन कार्यालयों की जवाबदेही तय की जाएगी।
इस कदम का उद्देश्य है:
- टैक्स चोरी रोकना
- काले धन पर नियंत्रण
- प्रॉपर्टी लेन-देन में पारदर्शिता बढ़ाना
फॉर्म-60 और फॉर्म-61 क्या हैं?
फॉर्म-60:
यदि किसी खरीदार या विक्रेता के पास PAN नहीं है, तो उन्हें फॉर्म-60 भरना अनिवार्य होगा। इसमें उनकी पहचान और संपत्ति के विवरण का प्रमाण देना होता है।
फॉर्म-61:
अर्धवार्षिक रिपोर्ट के रूप में फॉर्म-61 को आयकर विभाग को भेजा जाता है। इसमें सभी गैर-पैन लेन-देन का विवरण देना होता है। फॉर्म-61 हर साल 31 अक्टूबर और 30 अप्रैल तक दाखिल करना जरूरी है।
बिहार के प्रॉपर्टी बाजार पर असर
इस नई पॉलिसी के लागू होने से प्रॉपर्टी बाजार में कई बदलाव आने वाले हैं:
- 10 लाख से अधिक मूल्य वाली संपत्तियों के लेन-देन में पूरी पारदर्शिता होगी।
- खरीदार और विक्रेता दोनों को पैन तैयार रखना होगा।
- रजिस्ट्री रुकने का खतरा उन लेन-देन में रहेगा जहां पैन या फॉर्म-60 उपलब्ध नहीं होगा।
- टैक्स चोरी रोकने के साथ ही काले धन का प्रवाह नियंत्रित होगा।
अपर आयकर निदेशक ने कहा कि सभी निबंधन कार्यालयों में इस नियम की सख्ती से निगरानी की जाएगी। इसका मुख्य लक्ष्य संपत्ति लेन-देन में ट्रांसपेरेंसी और कानून का पालन सुनिश्चित करना है।
खरीदारों और विक्रेताओं के लिए सुझाव
- PAN तैयार रखें: 10 लाख से ऊपर की प्रॉपर्टी डील में पैन अवश्य तैयार रखें।
- फॉर्म-60 भरें: अगर पैन नहीं है तो फॉर्म-60 भरना न भूलें।
- रजिस्ट्री में देरी: पैन न होने पर रजिस्ट्री प्रक्रिया रुक सकती है।
- कानूनी कार्रवाई: नियम न पालन करने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
- डॉक्यूमेंट सत्यापन: निबंधन अधिकारी द्वारा सभी दस्तावेजों का सत्यापन सुनिश्चित करें।
विशेषज्ञों का नजरिया
रियल एस्टेट विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम बिहार में प्रॉपर्टी बाजार की विश्वसनीयता बढ़ाने वाला है। इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और आवासीय-संपत्ति में निवेश में पारदर्शिता आएगी।
कर विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम न केवल टैक्स चोरी रोकने में मदद करेगा बल्कि प्रॉपर्टी की वास्तविक कीमत का पता लगाने में भी सहायक होगा।
अन्य राज्यों में भी लागू नियम
बिहार की यह पहल अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण है। महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में भी 10 लाख रुपये से अधिक प्रॉपर्टी के लेन-देन में पैन अनिवार्य करने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। इससे पूरे देश में संपत्ति बाजार में पारदर्शिता बढ़ रही है।
निष्कर्ष
बिहार में 10 लाख रुपये या उससे अधिक मूल्य की संपत्तियों के लिए PAN अनिवार्य करना एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे टैक्स चोरी पर अंकुश लगेगा और प्रॉपर्टी लेन-देन में पारदर्शिता आएगी।
खरीदार और विक्रेता दोनों को पैन तैयार रखना जरूरी है और यदि PAN नहीं है तो फॉर्म-60 भरना अनिवार्य है। फॉर्म-61 के माध्यम से सभी गैर-पैन लेन-देन की रिपोर्टिंग आयकर विभाग को करनी होगी।
इस नियम का पालन न करने पर रजिस्ट्री रुकने और कानूनी कार्रवाई का खतरा बना रहेगा। बिहार सरकार की यह पहल संपत्ति बाजार में भरोसा और पारदर्शिता बढ़ाने वाली है।
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Author: AK
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