प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाइयों से विपक्ष काफी समय से परेशान है। अब केंद्र के गिरफ्तारी वाले नए कानून को लेकर विपक्षी नेताओं की टेंशन बढ़ा दी है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा पेश किया गया नया गिरफ्तारी बिल विपक्ष के लिए नई चुनौती बन गया है। बिल में किए गए प्रावधानों को लेकर विपक्षी सांसदों में बेचैनी साफ झलक रही है। विपक्ष का आरोप है कि इस कानून के जरिये सत्ता पक्ष राजनीतिक दबाव बनाने का हथियार तैयार कर रहा है, वहीं सरकार का कहना है कि यह कदम राजनीति नहीं बल्कि जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का गिरफ्तारी बिल विपक्षी नेताओं के लिए नई सिरदर्दी बन गया है। बुधवार को लोकसभा में गृहमंत्री अमित शाह ने यह अहम बिल पेश किया और बहस के बाद इसे पारित भी करा लिया। शाह ने सदन में साफ कहा कि इस कानून का मकसद भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग पर लगाम लगाना है, किसी भी नेता या पार्टी को निशाना बनाना नहीं। वहीं, विपक्षी सांसदों ने बिल का जोरदार विरोध करते हुए आरोप लगाया कि ईडी की कार्रवाइयों से पहले ही 95% विपक्षी नेता निशाने पर हैं और अब इस गिरफ्तारी बिल के जरिये सरकार उन्हें और ज्यादा डराने का काम करना चाहती है। विपक्ष ने यह भी कहा कि बिल लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करेगा और राजनीतिक प्रतिशोध की राह आसान बनाएगा। लोकसभा में बिल पारित होने के दौरान सदन में तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। सत्ता पक्ष के सांसदों ने इसे भ्रष्टाचार पर प्रहार बताया, जबकि विपक्ष ने इसे लोकतंत्र और विपक्ष की आवाज दबाने की साजिश करार दिया।
विपक्षी दलों ने सरकार पर तीखा हमला बोला और एक सुर में इसे लोकतंत्र पर हमला बताया
लोकसभा में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा गिरफ्तारी बिल पारित कराए जाने के बाद विपक्षी दलों ने सरकार पर तीखा हमला बोला और एक सुर में इसे लोकतंत्र पर हमला बताया। कांग्रेस ने इस विधेयक को ड्रेकोनियन और असंवैधानिक” करार दिया और कहा कि असली मकसद विपक्षी राज्यों को अस्थिर करना है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी ट्वीट कर आरोप लगाया कि यह कानून भ्रष्टाचार खत्म करने के नाम पर विपक्ष की आवाज खत्म करने की साजिश है। टीएमसी सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने कहा, यह बिल सिर्फ और सिर्फ राजनीतिक प्रतिशोध का औजार है। तृणमूल की महुआ मोइत्रा ने टिप्पणी की कि सरकार लोकतंत्र को तानाशाही में बदलने की ओर बढ़ रही है। आरजेडी के मनोज झा ने कहा, 95% ईडी की कार्रवाई विपक्ष पर होती है, अब गिरफ्तारी बिल विपक्ष को पूरी तरह खत्म करने का हथियार बनेगा। बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने कहा, यह बिल देश के लोकतंत्र को कमजोर कर सकता है, केंद्र को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए। झारखंड मुक्ति मोर्चा ने इसे विरोधी दलों को निशाना बनाने की कोशिश बताते हुए पूरे राज्य में सड़क पर उतरकर आंदोलन का ऐलान किया। शिवसेना (उद्धव गुट) के संजय राउत ने कहा, यह विपक्ष की आवाज दबाने की साजिश है। आम आदमी पार्टी के संजय सिंह ने आरोप लगाया, सरकार आलोचकों और विपक्षी नेताओं को जेल में रखने की तैयारी कर रही है। वहीं गृहमंत्री अमित शाह ने सदन में कहा, यह कानून किसी पार्टी या नेता के खिलाफ नहीं है, बल्कि भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग पर लगाम लगाने के लिए है। भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा, निर्दोष को डरने की जरूरत नहीं, केवल भ्रष्टाचारियों को ही इस कानून से सजा मिलेगी। भाजपा के भूपेंद्र यादव ने कहा, विपक्ष इसलिए डर रहा है क्योंकि उसे अपने नेताओं के भ्रष्टाचार की चिंता है।
Author: AK
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