जहानाबाद में निबंधन विभाग ने 43 मौजा चिह्नित किए, जहां बिना भौतिक जांच के जमीन रजिस्ट्री नहीं होगी। राजस्व लक्ष्य 62.94 करोड़ तय।
No Land Registration Without Inspection in 43 Maujas of Jehanabad
जहानाबाद में 43 मौजों की जमीन रजिस्ट्री से पहले होगी भौतिक जांच
भूमि रजिस्ट्री में नई सख्ती
बिहार के जहानाबाद जिले में निबंधन विभाग ने एक बड़ा कदम उठाया है। अब जिले के 43 चिह्नित मौजों में जमीन की रजिस्ट्री केवल भौतिक जांच के बाद ही होगी। इस निर्णय का उद्देश्य न केवल जमीन की हेराफेरी पर रोक लगाना है, बल्कि सरकार के राजस्व में वृद्धि करना भी है।
सरकार ने इस वित्तीय वर्ष में 62.94 करोड़ रुपये का राजस्व लक्ष्य तय किया है। पिछले वर्ष विभाग ने 106% लक्ष्य हासिल कर रिकॉर्ड बनाया था।
क्यों जरूरी हुई यह जांच प्रक्रिया?
पहले इन मौजों में रजिस्ट्री जमीन मालिक और वासिका नवीस के कथन के आधार पर होती थी। इसका फायदा उठाकर कई लोगों ने आवासीय जमीन को कृषि या व्यावसायिक दिखाकर स्टांप शुल्क में हेराफेरी की।
अब यह प्रक्रिया बदली गई है—
- टीम का गठन: प्रत्येक रजिस्ट्री से पहले टीम मौके पर जाकर भौगोलिक और भौतिक स्थिति की जांच करेगी।
- भौगोलिक मूल्यांकन: जमीन का उपयोग और श्रेणी तय की जाएगी, ताकि सही राजस्व लिया जा सके।
किन अंचलों में लागू होगा नया नियम?
सरकार ने 43 मौजों को अलग-अलग अंचलों में चिह्नित किया है:
- जहानाबाद अंचल: 13 मौजा
- काको अंचल: 27 मौजा
- मखदुमपुर अंचल: 1 मौजा
- रतनी फरीदपुर अंचल: 2 मौजा
स्टांप शुल्क का निर्धारण
राजस्व निर्धारण के लिए स्टांप शुल्क पहले से ही तय है।
- आवासीय भूमि के लिए शुल्क ज्यादा होता है।
- 10 डिसमिल से अधिक भूमि अगर आवासीय क्षेत्र में है लेकिन कृषि के लिए उपयोग हो रही है, तो शुल्क के अनुसार बदलाव होगा।
इस सख्ती का मतलब है कि अब जमीन के सही उपयोग और श्रेणी के आधार पर ही शुल्क लिया जाएगा, जिससे राजस्व चोरी रुक सके।
पिछले वर्ष का प्रदर्शन और सफलता
वित्तीय वर्ष 2024-25 में निबंधन विभाग ने 57.22 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा था, लेकिन अधिकारियों की सक्रियता और रणनीति से 61.14 करोड़ रुपये की वसूली की गई।
- रिकॉर्ड वसूली: यह पिछले पांच वर्षों का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा।
- हेराफेरी पकड़ने में सफलता: 2.96 करोड़ रुपये की वसूली केवल उन मामलों से हुई, जहां आवासीय जमीन को गलत श्रेणी में दिखाकर शुल्क चोरी की जा रही थी।
कैसे पकड़ी गई हेराफेरी?
निबंधन पदाधिकारी और उनकी टीम ने रजिस्ट्री के दस्तावेजों में शक होने पर सीधे स्थल निरीक्षण किया।
उदाहरण:
- दो या तीन मंजिला मकान को एक मंजिला दिखाना
- व्यावसायिक भूमि को कृषि भूमि बताना
- आवासीय भूमि पर कृषि उपयोग का दावा करना
इन सभी मामलों में पकड़े जाने पर न केवल बकाया शुल्क वसूला गया, बल्कि 10% अतिरिक्त दंड भी लगाया गया।
सरकार का नजरिया
सरकार का स्पष्ट कहना है कि भूमि रजिस्ट्री की पारदर्शिता और राजस्व वृद्धि दोनों ही प्राथमिक लक्ष्य हैं।
- भ्रष्टाचार पर रोक: गलत जानकारी देकर रजिस्ट्री करने वालों पर अब सख्त कार्रवाई होगी।
- सटीक आंकड़े: जांच रिपोर्ट से हर जमीन का सही वर्गीकरण संभव होगा।
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
जहानाबाद और आसपास के ग्रामीण इलाकों में इस निर्णय को मिश्रित प्रतिक्रिया मिली है—
- समर्थन: पारदर्शिता और भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए यह सही कदम माना जा रहा है।
- आलोचना: कुछ लोग मानते हैं कि इससे रजिस्ट्री की प्रक्रिया लंबी और जटिल हो जाएगी।
विशेषज्ञों की राय
भूमि कानून विशेषज्ञों के अनुसार—
- फायदा: इससे भूमि विवाद और धोखाधड़ी के मामले कम होंगे।
- चुनौती: टीम की संख्या और क्षमता पर्याप्त होनी चाहिए, ताकि जांच समय पर पूरी हो सके।
आगे की योजना
निबंधन विभाग का इरादा आने वाले वर्षों में इस जांच प्रक्रिया को अन्य जिलों में भी लागू करने का है।
- डिजिटल मॉनिटरिंग: भौतिक सत्यापन के साथ-साथ डिजिटल रिकॉर्ड भी तैयार होंगे।
- ऑनलाइन पारदर्शिता: जांच रिपोर्ट ऑनलाइन उपलब्ध कराने की योजना है, ताकि खरीदार और विक्रेता दोनों ही देख सकें।
निष्कर्ष
जहानाबाद के 43 मौजों में जमीन रजिस्ट्री से पहले भौतिक जांच का निर्णय न केवल राजस्व वृद्धि में मदद करेगा, बल्कि रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता भी लाएगा। यह कदम उन लोगों के लिए चेतावनी है जो जमीन की गलत श्रेणी दिखाकर राजस्व चोरी करते हैं।
यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो आने वाले समय में यह पूरे बिहार में लागू हो सकता है, जिससे भूमि लेन-देन और भी सुरक्षित और निष्पक्ष बन जाएगा।
बिहार भूमि, जहानाबाद जमीन रजिस्ट्री, भूमि जांच, निबंधन विभाग, राजस्व वसूली
Author: AK
! Let us live and strive for freedom ! Freelance Journalist ! Politics ! News Junky !












