
संसद के बजट सत्र में इसी महीने 1 फरवरी को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सदन में बजट पेश किया था। बजट के दौरान सीतारमण ने एलान किया था कि जल्द ही केंद्र सरकार नया इनकम टैक्स विधेयक लाएगी। आखिरकार आज मोदी सरकार नए आयकर विधेयक पर मुहर लगाने जा रही है। राजधानी दिल्ली में शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक होने जा रही है । इस बैठक में देश में इनकम टैक्स से जुड़े नियमों में करीब 6 दशक के बाद बदलाव होने जा रहा है।

सरकार अगले सप्ताह संसद में नया आयकर विधेयक पेश करने की तैयारी में है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में इसकी घोषणा की थी। इसमें कोई नया टैक्स नहीं होगा। विधेयक सरल और संक्षिप्त होगा। इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के नियम और प्रावधान 60 साल से ज्यादा पुराने हो चुके है। तब से अब तक सरकार ने कई नियम और प्रावधान इसमें शामिल किए हैं। इससे ये काफी जटिल हो गए हैं। सरकार नए इनकम टैक्स बिल के जरिए ऐसे नियम और कानून लागू करना चाहती है जो पढ़ने और समझने में आसान होंगे। वित्त सचिव तुहिन कांत पांडेय के मुताबिक, अगले सप्ताह संसद में पेश किए जाने वाले नए आयकर विधेयक में लंबे वाक्य, प्रावधान और स्पष्टीकरण नहीं होंगे। यह नया विधेयक 60 साल पुराने आयकर अधिनियम, 1961 की जगह लेने के लिए तैयार किया गया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक के दौरान नए नए आयकर विधेयक पर चर्चा होने की संभावना है। उम्मीद है कि आज नए आयकर विधेयक को मंजूरी दी जा सकती है। नए आयकर विधेयक की घोषणा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को अपने बजट भाषण में की थी। इस विधेयक में 2025-26 के बजट में आयकर दरों, स्लैब और स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) संबंधी प्रावधानों में किए गए बदलावों को भी शामिल किया जाएगा।
वित्त सचिव ने तुहिन कांत पांडेय कहा, ‘कानून केवल कानूनी पेशेवरों के ही लिए नहीं होते हैं। इसे नागरिकों को भी समझ में आना चाहिए।’ इसका मतलब है कि सरकार टैक्स सिस्टम को सिर्फ आसान बना रही है, उसमें कोई बड़ा बदलाव नहीं कर रही है। केंद्र सरकार ने हाल के वर्षों में कर प्रणाली को अधिक पारदर्शी और करदाताओं के अनुकूल बनाने के प्रयास किए हैं। इस नए आयकर विधेयक के तहत विश्वास पहले, जांच बाद में की नीति को बढ़ावा दिया जाएगा। नई कर संहिता के लागू होने से यह अनुमान लगाया जा रहा है कि करदाताओं को पहले से अधिक स्पष्टता मिलेगी, जिससे उन्हें कर नियमों को समझने और अनुपालन में आसानी होगी। सरकार का मानना है कि इससे कर चोरी के मामलों में कमी आएगी और कर संग्रहण प्रणाली अधिक प्रभावी होगी। बजट सत्र 31 जनवरी से शुरू हो चुका है और इसका पहला चरण 13 फरवरी तक चलेगा। दूसरा चरण 10 मार्च से 4 अप्रैल तक होगा। माना जा रहा है कि सरकार पहले चरण में ही इस विधेयक को पेश करना चाहती है ताकि इसे बजट सत्र के दौरान पारित किया जा सके। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार का यह कदम कर प्रणाली में पारदर्शिता और करदाताओं के लिए आसानी सुनिश्चित करेगा। नए कर संहिता से करदाताओं को कर नियमों को समझने में आसानी होगी और विवाद कम होंगे। इससे सरकार को कर संग्रह में भी सुधार देखने को मिलेगा। उल्लेखनीय है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल के पहले पूर्ण बजट में मिडिल क्लास को बड़ी राहत दी है। न्यू टैक्स रिजीम के तहत अभी तक सात लाख रुपये तक की सालाना आमदनी वालो को इनकम टैक्स से राहत थी, अब इसके तहत 12 लाख रुपये तक की आय वाले को कोई टैक्स नहीं देना होगा। सैलरीड क्लास व्यक्ति को इसके ऊपर 75,000 रुपये के स्टैंडर्ड डिडक्शन का भी फायदा मिलेगा और इस तरह 12.75 लाख रुपये तक कमाने वाले वेतनभोगी को इनकम टैक्स नहीं देना होगा। हालांकि सालभर में इससे अधिक कमाई करने वाले टैक्स के दायरे में आएंगे।
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Author: AK
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