नेपाल में चुनाव से पहले अपदस्थ शाह परिवार के समर्थकों ने रैली निकालकर राजशाही बहाल करने की मांग की, ‘राजा को वापस लाओ’ के नारे लगे।
Nepal Monarch Restoration: “Bring Back the King” Rally
🚨𝗡𝗘𝗣𝗔𝗟 𝗗𝗘𝗠𝗢𝗡𝗦𝗧𝗥𝗔𝗧𝗜𝗢𝗡𝗦 | 𝗣𝗿𝗼-𝗠𝗼𝗻𝗮𝗿𝗰𝗵𝘆 𝗣𝗿𝗼𝘁𝗲𝘀𝘁𝘀 𝗶𝗻 𝗞𝗮𝘁𝗵𝗺𝗮𝗻𝗱𝘂.
— Resonant News🌍 (@Resonant_News) January 11, 2026
🔹 🇳🇵 Thousands march in Kathmandu waving Nepali flags, holding red banners and photos of former King Gyanendra Shah.
🔹 📅 The marches coincide with Prithvi Jayanti &… pic.twitter.com/8fGcXueSyJ
नेपाल में चुनाव से पहले शाह परिवार के समर्थक कर रहे राजशाही बहाली की मांग
नेपाल के राजनीतिक परिदृश्य में एक बार फिर राजशाही बहाल करने की मांग उठने लगी है। आगामी मार्च 2026 में होने वाले चुनावों से पहले काठमांडू में अपदस्थ शाह परिवार के समर्थकों ने एक बड़ी रैली निकाली। इस रैली में उन्होंने ‘राजा को वापस लाओ’ जैसे नारे लगाए और देश में राजशाही को बहाल करने की जोरदार अपील की।
2008 में नेपाल में राजशाही खत्म कर दी गई थी, लेकिन शाह परिवार को अब भी राजनीतिक और सामाजिक समर्थन प्राप्त है। सितंबर 2025 में हुए युवाओं के हिंसक प्रदर्शन के बाद यह पहली शांति पूर्ण रैली मानी जा रही है।
‘राजा को वापस लाओ’ – रैली के मुख्य नारे
राजशाही के समर्थक रैली में जोर-शोर से नारे लगा रहे थे, जिसमें प्रमुख नारा था, “हम अपने राजा से प्यार करते हैं, राजा को वापस लाओ।”
समर्थकों ने राजा पृथ्वी नारायण शाह की मूर्ति के पास इस प्रदर्शन को केंद्रित किया। राजा पृथ्वी नारायण शाह ने 18वीं सदी में शाह वंश की स्थापना की थी और इसे नेपाल के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ माना जाता है।
रैली के दौरान शाही समर्थकों का यह तर्क था कि देश की मौजूदा समस्याओं का स्थायी समाधान केवल राजशाही की वापसी से ही संभव है।
शाही परिवार का वर्तमान समर्थन
नेपाल के शाही परिवार को अब भी काफी समर्थन प्राप्त है। खासकर ग्रामीण और पुराने पीढ़ी के लोग शाह वंश से जुड़े हुए हैं और उन्हें देश की स्थिरता के प्रतीक के रूप में मानते हैं।
रैली में शामिल सम्राट थापा ने कहा, “इस देश के लिए आखिरी और एकमात्र विकल्प राजा और राजशाही ही है। वर्तमान संदर्भ में और Gen Z आंदोलन के बाद, देश ने जो रास्ता अपनाया है, स्थिति को संभालने के लिए राजशाही को बहाल करने की आवश्यकता है।”
पृथ्वी नारायण शाह की जयंती पर आयोजित इस शांतिपूर्ण रैली ने साबित कर दिया कि राजशाही का राजनीतिक आकर्षण अभी भी नेपाल में कायम है।
नेपाल में पिछले वर्षों की राजनीतिक स्थिति
नेपाल की राजनीतिक स्थिति लंबे समय से अस्थिर रही है। 2008 में शाह परिवार को राजशाही से हटाकर नेपाल को गणराज्य घोषित किया गया। इसके बाद से नेपाल में कई सरकारें आईं और गईं, लेकिन राजनीतिक स्थिरता स्थापित नहीं हो पाई।
पिछले कुछ वर्षों में युवाओं ने भ्रष्टाचार, रोजगार की कमी और अवसरों की कमी को लेकर कई विरोध प्रदर्शन किए। 2025 में Gen Z कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन इस असंतोष का मुख्य उदाहरण हैं।
Gen Z आंदोलन और युवाओं की नाराजगी
Gen Z आंदोलन के तहत युवा कार्यकर्ता सामाजिक और राजनीतिक समस्याओं के खिलाफ सड़कों पर उतरे। उनका मुख्य मुद्दा था:
- भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अनियमितताएं
- रोजगार की कमी और अवसरों का अभाव
- सामाजिक न्याय और शिक्षा के अवसरों में असमानता
इस आंदोलन के बाद नेपाल की अंतरिम सरकार ने Gen Z कार्यकर्ताओं की मांगों पर ध्यान देते हुए सत्ता संभाली।
राजनीति और राजशाही बहाली की मांग
राजशाही समर्थकों का मानना है कि नेपाल में राजशाही की वापसी से राजनीतिक स्थिरता आएगी और देश के विकास में तेजी आएगी। उनका तर्क है कि गणराज्य बनने के बाद से नेपाल लगातार राजनीतिक अस्थिरता और प्रशासनिक समस्याओं का सामना कर रहा है।
राजशाही समर्थकों का यह भी कहना है कि वर्तमान लोकतांत्रिक प्रणाली में देश की समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं निकाला जा सका। इसलिए शाह परिवार और राजा ज्ञानेंद्र की वापसी ही एकमात्र विकल्प है।
शाही समर्थकों की रणनीति
शाही समर्थक अपनी मांगों को व्यापक स्तर पर फैलाने के लिए रैली और सार्वजनिक सभाओं का आयोजन कर रहे हैं। उनका उद्देश्य है:
- आगामी चुनावों में राजशाही समर्थक उम्मीदवारों का समर्थन बढ़ाना।
- शाही परिवार की लोकप्रियता और राजनीतिक प्रभाव को जनता तक पहुंचाना।
- युवा वर्ग को भी राजशाही की वापसी के लिए प्रेरित करना।
शाही समर्थक विश्वास करते हैं कि यदि युवा वर्ग को राजशाही के फायदे समझाए जाएं, तो उनकी मांग अधिक व्यापक समर्थन हासिल कर सकती है।
नेपाल की वर्तमान सरकार और राजशाही विरोध
नेपाल की वर्तमान सरकार, जो महिला प्रधानमंत्री सुशीला कार्की के नेतृत्व में है, ने Gen Z आंदोलन के बाद सत्ता संभाली। सरकार ने शाही परिवार की वापसी के लिए किसी भी पहल को फिलहाल खारिज किया है।
सरकार का तर्क है कि नेपाल में लोकतांत्रिक प्रणाली मजबूत करने की आवश्यकता है और राजशाही की वापसी से देश में लोकतंत्र कमजोर हो सकता है।
चुनाव और राजनीतिक प्रभाव
आगामी मार्च 2026 के चुनावों से पहले राजशाही समर्थक रैली राजनीतिक माहौल को प्रभावित कर सकती है। शाही समर्थक अपनी मांगों को चुनावी एजेंडा का हिस्सा बनाने का प्रयास कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राजशाही समर्थक व्यापक जनसमर्थन हासिल कर लेते हैं, तो यह नेपाल के राजनीतिक परिदृश्य में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है।
निष्कर्ष
नेपाल में राजशाही बहाल करने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ रही है। काठमांडू में आयोजित ‘राजा को वापस लाओ’ रैली ने यह संकेत दिया कि शाह परिवार का प्रभाव अभी भी देश में कायम है।
राजशाही समर्थक तर्क देते हैं कि देश की मौजूदा समस्याओं का समाधान केवल राजशाही की वापसी से ही संभव है, जबकि सरकार इसे लोकतंत्र और स्थिरता के लिए खतरा मानती है।
आगामी मार्च 2026 के चुनावों के परिणाम इस बहस का निर्णायक बिंदु साबित हो सकते हैं। नेपाल की राजनीति अब इस सवाल के इर्द-गिर्द घूम रही है कि क्या गणराज्य में बने रहना देश के हित में है या राजशाही की वापसी आवश्यक है।
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Author: AK
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