
मोदी सरकार ने गुरुवार को केंद्र के सरकारी कर्मचारियों को बड़ा तोहफा दिया है। सरकार ने आठवें वेतन आयोग को मंजूरी दे दी है। केंद्र सरकार के इस फैसले के बाद से देशभर में लाखों-करोड़ों सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में इजाफा हो सकता है।
केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 16 जनवरी को केंद्र सरकार ने खुशखबरी सुना दी। देश के 1 करोड़ केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए बड़ी खबर है। दिल्ली विधानसभा चुनाव के बीच केंद्र ने केंद्रीय कर्मचारियों के लिए गुरुवार को आठवें वेतन आयोग के गठन को मंजूरी दे दी है। गुरुवार को केंद्रीय कैबिनेट की बैठक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास पर हुई और पीएम मोदी की अध्यक्षता में इस फैसले पर मंजूरी दे दी गई। आयोग की सिफारिशें 2026 से लागू होंगी। इस फैसले का चुनावी माहौल में बीजेपी के लिए अहम माना जा रहा है, खासकर नई दिल्ली सीट पर जहां सरकारी कर्मचारियों की बड़ी संख्या है।
बता दें कि 7वें वेतन आयोग का कार्यकाल 31 दिसंबर 2025 को खत्म हो जाएगा। कैबिनेट बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री अश्वनी वैष्णव ने दी। उन्होंने कहा- सातवां वेतन आयोग 2016 में लागू हुआ था, इसकी सिफारिशें 2026 तक जारी रहेंगी। 7वां वेतन आयोग (पे-कमीशन) 1 जनवरी, 2016 से लागू हुआ था। इससे करीब 1 करोड़ लोगों को फायदा हुआ था। वेतन आयोग हर 10 साल में लागू किया जाता है।
उम्मीद है कि मोदी सरकार 1 जनवरी, 2026 से 8वां वेतन आयोग लागू कर देगी। इससे केंद्रीय कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन और पेंशन बढ़ेगी। केंद्रीय कर्मचारियों के संगठनों ने इसके लिए कैबिनेट सचिव से मिलकर 8वें वेतन आयोग का गठन करने की मांग की थी और लगातार ये संगठन सरकार के सामने 8वें वेतन आयोग के गठन का दबाव बना रहे थे।परंपरागत रूप से, केंद्रीय वेतन आयोग का गठन हर 10 साल में केंद्र सरकार के कर्मचारियों के वेतनमान, भत्ते और लाभों में बदलाव की समीक्षा और सिफारिश करने के लिए किया जाता है। यह आयोग महंगाई और आर्थिक स्थितियों जैसे कारकों को ध्यान में रखकर फैसला लेता है। सातवें वेतन आयोग का गठन पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल में 28 फरवरी 2014 को किया गया था। सातवें वेतन आयोग ने अपनी सिफारिशें उसके करीब डेढ़ साल बाद नवंबर 2015 में केंद्र सरकार को सौंप दी थी। उसके बाद 1 जनवरी 2016 से 7वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू हो गईं, जो अभी तक लागू हैं। आ

ठवां वेतनमान लागू होने के बाद केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी में बंपर इजाफा हो सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बार फिटमेंट फैक्टर कम से कम 2.86 तय किया जा सकता है। ऐसा होने पर कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी में भी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। यह 51,480 रुपये हो सकती है। अभी मिनिमम बेसिक सैलरी 18,000 रुपये है। पेंशनभोगियों को भी इसी तरह फायदा मिलेगा। उनकी मिनिमम पेंशन अभी 9,000 रुपये से बढ़कर 25,740 रुपये हो सकती है। 7वें वेतन आयोग के गठन के बाद केंद्रीय कर्मचारियों की न्यूनतम सैलरी में सबसे कम बढ़ोतरी हुई थी। इसमें सैलरी को फिटमेंट फैक्टर के हिसाब से बढ़ाया गया, जिसे 2.57 गुना रखा गया था। इससे बेसिक सैलरी 18,000 रुपये हो गई। अगर इसी फॉर्मूले को आधार माना जाता है, तो 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर की अधिकमत रेंज के तहत न्यूनतम सैलरी 26,000 रुपये हो जाएगी। फिटमेंट फैक्टर दरअसल सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन और पेंशन को बढ़ाने के लिए इस्तेमाल वाला फॉर्मूला है। इसके आधार पर अलग-अलग लेवल पर सैलरी में बढ़ोतरी की जाती है। हालांकि, इसमें भत्ते को नहीं जोड़ा जाता है।
8वां वेतन आयोग केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। यह आयोग कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और अन्य लाभों की समीक्षा करता है और अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपता है। इन सिफारिशों के आधार पर कर्मचारियों के वेतन में संशोधन किया जाता है।
8वें वेतन आयोग की प्रमुख विशेषताएं
- वेतन वृद्धि: आयोग की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि की सिफारिश करना है। यह वृद्धि महंगाई, आर्थिक स्थिति और अन्य कारकों को ध्यान में रखकर की जाती है।
- भत्ते: आयोग कर्मचारियों को मिलने वाले विभिन्न भत्तों जैसे महंगाई भत्ता, घर किराया भत्ता आदि की समीक्षा करता है और इनमें बदलाव की सिफारिश कर सकता है।
- पेंशन: आयोग पेंशनभोगियों के लिए भी महत्वपूर्ण सिफारिशें करता है। इसमें पेंशन की दर में वृद्धि, पेंशन योजनाओं में बदलाव आदि शामिल हो सकते हैं।
- कार्यभार: आयोग कर्मचारियों के कार्यभार का भी आकलन करता है और उनके कार्यभार के अनुसार वेतन और भत्तों में बदलाव की सिफारिश कर सकता है।

8वें वेतन आयोग का महत्व
- कर्मचारियों का मनोबल: वेतन वृद्धि से कर्मचारियों का मनोबल बढ़ता है और वे अधिक कुशलता से काम करते हैं।
- आर्थिक स्थिति: आयोग की सिफारिशें देश की समग्र आर्थिक स्थिति को भी प्रभावित करती हैं।
- सरकार का खर्च: आयोग की सिफारिशों को लागू करने के लिए सरकार को अधिक धनराशि खर्च करनी पड़ती है।
आयोग से कर्मचारियों का वेतन बढ़ेगा, भत्ते में सुधार होगा और पेंशनभोगियों को भी लाभ होगा।
यह भी पढ़े: अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति जिमी कार्टर का निधन, शांति और लोकतंत्र के लिए मिला था नोबेल शांति पुरस्कार…
यह भी पढ़े: कल से बिहार में कई ट्रेनों का समय बदल जाएगा, देखिए कौन-कौन रेलगाड़ियों के टाइम में किया गया बदलाव
Author: AK
! Let us live and strive for freedom ! Freelance Journalist ! Politics ! News Junky !












