
आज महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उनके समूह के 16 विधायकों की अयोग्यता के मामले में विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर फैसला सुनाने जा रहे हैं। ये फैसला सभी 40 विधायकों पर लागू होगा जो शिंदे गुट के साथ हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक विधानसभा स्पीकर ने सुनवाई पूरी कर ली है अब आज शाम तक फैसला आ जाएगा। फैसला सुनाने के पहले विधानसभा अध्यक्ष नार्वेकर ने मुख्यमंत्री शिंदे के साथ बैठक की थी, जिसको लेकर उद्धव ठाकरे गुट ने विरोध भी किया था। उद्धव ठाकरे ने मातोश्री पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए मुलाकात पर कटाक्ष किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि अगर न्यायाधीश ही आरोपी से मिलेंगे तो न्यायाधीश से क्या ही उम्मीद कर सकते हैं। ठाकरे ने कहा कि नार्वेकर की शिंदे से मुलाकात एक न्यायधीश की अपराधी से मुलाकात की तरह है। ऐसे में हम किस तरह के न्याय की उम्मीद करें। नार्वेकर का फैसला ही अब तय करेगा कि देश में लोकतंत्र है या नहीं। फैसले के बाद साफ हो जाएगा कि क्या दोनों नेता मिलकर लोकतंत्र की हत्या करेंगे या नहीं। उद्धव गुट का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि ये फैसला शिंदे गुट के पक्ष में ही जाएगा, जिसके खिलाफ वो सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में हैं। वहीं शरद पवार ने भी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में फैसले से पहले स्पीकर और मुख्यमंत्री के बीच हुई गुप्त मुलाकात पर अपत्ति जताई। पवार ने कहा, साधारण सी बात है, जिनके खिलाफ केस है और जिनको फैसला सुनाना है, उनका उनके घर जाना शक तो पैदा करता ही है। शरद पवार ने कहा कि पद की गरिमा बनाए रखने की जिम्मेदारी स्पीकर की है। वे इस मुलाकात को फैसले तक टाल सकते थे।उद्धव ठाकरे और शरद पवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद विधानसभा स्पीकर राहुल नार्वेकर ने इसका जवाब दिया। उन्होंने कहा, ‘इस तरह के आरोप केवल दबाव बनाने के लिए लगाए जा रहे हैं। स्पीकर किस काम के लिए मुख्यमंत्री से मिल सकते हैं, एक पूर्व मुख्यमंत्री को यह पता होना चाहिए। फिर भी वह आरोप लगा रहे हैं, इसके पीछे का मकसद स्पष्ट है। एक विधायक के रूप में मेरे विधानसभा क्षेत्र के भी काम होते हैं। मुख्यमंत्री के साथ मेरी बैठक 3 तारीख को निर्धारित थी। लेकिन मैं कोरोना से संक्रमित था, इसलिए नहीं मिल सका। मुझे कोलाबा पुल के बारे में चर्चा करनी थी। दक्षिण मुंबई की आठ सड़कों का मुद्दा था। मैंने इन सभी मुद्दों को लेकर मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी। गौरतलब है कि जून 2022 में शिवसेना में बगावत हुई थी। 56 विधायकों में से उस वक्त शिवसेना के पहले 16 फिर 24 विधायक एकनाथ शिंदे के साथ चले गए। उद्धव गुट के पास केवल 16 विधायक बचे हैं। एकनाथ शिंदे सीएम बने और बीजेपी के समर्थन से सरकार बना ली। उसी वक्त से ये मामला विधानसभा स्पीकर और सुप्रीम कोर्ट दोनों जगह चल रहा है। चुनाव आयोग ने शिंदे गुट को नाम और शिवसेना का चुनाव चिन्ह दे दिया है। शिंदे को उम्मीद है कि आज भी फैसला उनके हक में ही आएगा।
यह भी पढ़े: घने कोहरे और कड़ाके की ठंड ने उत्तर भारत का जनजीवन किया अस्त-व्यस्त, तीन दिन कोल्ड डे की बनी रहेगी स्थित
यह भी पढ़े: गौतम अडानी मुकेश अंबानी को पछाड़कर एक बार फिर भारत के सबसे रईस और विश्व में 12वें नंबर के बिजनेसमैन बने
Author: AK
! Let us live and strive for freedom ! Freelance Journalist ! Politics ! News Junky !












