
महाराष्ट्र में मंगलवार 26 नवंबर तक अगर सरकार का गठन नहीं हुआ तो राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू हो सकता है। लेकिन अभी तक महायुति एनडीए में मुख्यमंत्री पद को लेकर एक राय नहीं बन पाई है। वहीं राजधानी दिल्ली में पिछले 24 घंटे से महाराष्ट्र सियासी घटनाक्रम को लेकर भाजपा खेमे में जबरदस्त मंथन जारी है। मुख्यमंत्री पद को लेकर खींचतान चल रही है। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में महायुति की प्रचंड जीत के बाद अभी सीएम पद पर सहमति नहीं बन पाई है। देवेंद्र फडणवीस, एकनाथ शिंदे और अजित पवार दिल्ली पहुंचे हुए हैं। दिल्ली में इसे लेकर एक बड़ी बैठक होने वाली है। देवेंद्र फडणवीस, एकनाथ शिंदे और अजित पवार की अमित शाह से मुलाकात होगी। इस बैठक पर सबकी नजर है। उम्मीद की जा रही है आज रात तक या कल सुबह तक महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री को लेकर एलान कर दिया जाएगा। इस बीच एकनाथ शिंदे की नेतृत्व वाली शिवसेना ने बिहार मॉडल महाराष्ट्र में अपनाने की मांग उठाई है। शिवसेना प्रवक्ता नरेश म्हास्के ने सोमवार को कहा कि एकनाथ शिंदे को मुख्यमंत्री बने रहना चाहिए। उधर भाजपा एमएलसी प्रवीण दारकेकर ने सीएम पद के लिए देवेंद्र फडणवीस की वकालत की। 23 नवंबर को महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजे जारी हुए। महायुति ने प्रचंड जीत दर्ज करके विपक्षी महा विकास अघाड़ी गठबंधन को चारों खाने चित कर दिया। महा विकास अघाड़ी को सिर्फ 48 सीटों पर जीत मिली है। महायुति ने 236 सीटों पर अपना कब्जा जमाया है। सबसे अधिक 132 सीटों पर भाजपा ने जीत हासिल की। एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने 57 और अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के खाते में 41 सीटें आई हैं। अजित पवार ने सोमवार को कहा कि राज्य में नई सरकार के गठन के फार्मूले को अंतिम रूप देने के लिए महायुति सहयोगियों के बीच चर्चा जारी है। सतारा जिले के कराड में पत्रकारों से बातचीत में अजित पवार ने स्वीकार किया कि विधानसभा चुनावों में महायुति की जीत में सरकार की ‘लाडकी बहिन योजना’ की महत्वपूर्ण भूमिका रही। यह योजना महिलाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करती है। एनसीपी नेता ने यह भी आश्वासन दिया कि राज्य विधानसभा चुनावों में शानदार जीत के बाद गठबंधन एकजुट होकर काम कर रहा है। वहीं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले ने इस्तीफे की पेशकश की है। हालांकि, पार्टी ने उन्हें फिलहाल पद पर बने रहने के लिए कहा है। विधानसभा चुनाव में नाना पटोले ने ही कांग्रेस की टिकट बांटी थीं। उनकी लीडरशिप में कांग्रेस ने 16 सीटें जीतीं। पिछले चुनाव में कांग्रेस का वोट शेयर 16.1% था, जो अब घटकर 12.42% रह गया है।
Author: AK
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