जहानाबाद शिक्षा के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुके, चर्चित शिक्षाविद एवं राष्ट्रपति से सम्मानित एस.के. सुनील ने नव वर्ष के अवसर पर एक भावुक और प्रेरणादायी पहल की। अपने पूज्य पिताजी के हाल ही में हुए स्वर्गवास की स्मृति में उन्होंने जहानाबाद स्थित वृद्धश्रम पहुंचकर वहां रह रहे बुजुर्गों के बीच कंबल और मिठाइयों का वितरण किया तथा उनके साथ नव वर्ष मनाया। इस अवसर पर एस.के. सुनील ने कहा कि कुछ दिन पहले ही उनके पिताजी का देहांत हुआ है। ऐसे में उन्होंने अपने पिता की आत्मा की शांति और स्मृति को नमन करने के उद्देश्य से यह सेवा कार्य किया। उन्होंने भावुक शब्दों में कहा, “यहां मौजूद हर बुजुर्ग में मुझे अपने पिताजी का चेहरा नजर आता है। कोई किसी का पिता है, तो कोई किसी की मां। इनकी सेवा कर मुझे ऐसा लगता है मानो मैं अपने पिताजी की ही सेवा कर रहा हूं। जहां भी मेरे पिताजी होंगे, वे यह देखकर अवश्य प्रसन्न होंगे।” उन्होंने आगे कहा कि बुजुर्गों का सान्निध्य जीवन का अमूल्य अनुभव देता है और घरों व समाज में उनका सम्मान व संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। अपने पिताजी को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उनके न रहने की कमी आज भी खलती है, लेकिन उनकी सीख यही थी कि जरूरतमंदों और बुजुर्गों की सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं। एस.के. सुनील ने यह भी संकल्प लिया कि आने वाले समय में हर पर्व, जन्मदिन या खुशी के अवसर पर वे वृद्धश्रम आकर बुजुर्गों के साथ समय बिताने और अपनी खुशियां बांटने का प्रयास करेंगे, ताकि उनका आशीर्वाद हमेशा बना रहे। वहीं वृद्धश्रम के संचालक एवं कर्मचारियों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे मानवीय कार्य समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने आम लोगों से भी अपील की कि यदि वे अपने जीवन के किसी खास अवसर को सार्थक बनाना चाहते हैं, तो वृद्धश्रम आकर बुजुर्गों के साथ अपनी खुशियां साझा करें। नव वर्ष के दिन बुजुर्गों के बीच कंबल और मिठाइयों का वितरण कर एस.के. सुनील ने न केवल अपने पिता की पुण्य स्मृति को सच्ची श्रद्धांजलि दी, बल्कि समाज को यह संदेश भी दिया कि बुजुर्गों की सेवा ही सच्चा सम्मान और मानवता की पहचान है।
Jehanabad News: In memory of his revered father, S.K. Sunil celebrated New Year with the elderly at an old age home.
Author: AK
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