वैसे किसी भी फ़न में तो कमतर नहीं हूँ मैं
लेकिन तुम्हारे बाप का नौकर नहीं हूँ मैं
जो भी मिला है सब मुझे श्रीराम से मिला
तुम पर किसी भी तौर से निर्भर नहीं हूँ मैं
भारी पड़ेगा मुझको यूँ हल्के में लेना दोस्त
मंजिल हूँ कोई मील का पत्थर नहीं हूँ मैं
मुझको तो प्यार के लिए इक दिल भी कम पड़े
नफ़रत की दुनिया के लिए जौ-भर नहीं हूँ मैं
हिस्से में पानी कम रहा,हल भी नहीं मिला
सूरत से थोड़ा सख़्त हूँ बंजर नहीं हूँ मैं
शिकवे शिकायतें सभी झगड़े बिसार कर
देखो जरा सा सोंच के पल भर नहीं हूँ मैं
इक शेर में उतार के सारा मेरा गुरूर
कहता हूँ अपने आप से पर्वर नहीं हूँ मैं
मैं बादशाह – ए- दिल हूँ मेरा सल्तनत है दिल
हर दिल में घर है मेरा सो बेघर नहीं हूँ मैं
टूटे न डोर रिश्तों की डरता हूँ इसलिए
उल्टा जवाब देता भी अक्सर नहीं हूँ मैं
– अमृतेश
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Author: AK
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