जहानाबाद: रतनी ब्रेन ट्यूमर के इलाज के दौरान निधन होने वाले सेना के जेसीओ (जूनियर कमीशंड ऑफिसर) नरेंद्र कुमार का पार्थिव शरीर जैसे ही उनके पैतृक गांव बोध बिगहा (थाना शकूराबाद) पहुंचा, पूरे गांव में सन्नाटा पसर गया। परिजनों के करुण क्रंदन से माहौल गमगीन हो उठा। अंतिम दर्शन के लिए ग्रामीणों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
जानकारी के अनुसार, नरेंद्र कुमार भारतीय सेना में हवलदार (जेसीओ) पद पर लखनऊ में तैनात थे। ब्रेन ट्यूमर की शिकायत के बाद उनका 16 मई को सेना के अस्पताल में ऑपरेशन हुआ था, लेकिन वे होश में नहीं आ सके और 5 जून की सुबह 9 बजे उनका निधन हो गया।
निधन की खबर मिलते ही परिजनों पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा। उनके गांव में शोक की लहर दौड़ पड़ी। शुक्रवार सुबह करीब 7 बजे जब पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, तो अंतिम दर्शन के लिए ग्रामीणों का हुजूम उमड़ पड़ा। सेना की ओर से गए अधिकारी प्रेम सिंह ने सैन्य परंपराओं के अनुसार पुष्पांजलि अर्पित की और जवानों ने सलामी दी।
सेना के जवान नरेंद्र कुमार के ज्येष्ठ पुत्र ने उन्हें मुखाग्नि दी। इस दौरान सेना ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी।
यह उल्लेखनीय है कि नरेंद्र कुमार के पिता, सेवा-निवृत्त प्रधानाध्यापक स्व. महेंद्र प्रसाद का भी हाल ही में, 20 मई को निधन हो गया था। बताया जा रहा है कि जब उन्हें बेटे की गंभीर स्थिति की सूचना मिली, तो वे सदमे में आ गए और कुछ ही समय बाद उनका भी निधन हो गया।
ग्रामीणों ने बताया कि एक महीने के भीतर पिता-पुत्र दोनों की मौत से पूरा गांव शोकग्रस्त है। स्व. महेंद्र प्रसाद एक समाजसेवी और नेकदिल इंसान के रूप में जाने जाते थे। वहीं नरेंद्र भी हंसमुख और मिलनसार स्वभाव के थे।
नरेंद्र कुमार अपने पीछे पत्नी, दो पुत्र और एक पुत्री को छोड़ गए हैं। उनके बड़े भाई उमेश कुमार भी सेना से सेवानिवृत्त हैं, जबकि छोटे भाई पुकार कुमार रेलवे में ड्राइवर के पद पर कार्यरत हैं। गांववालों ने बताया कि नरेंद्र की यादें हमेशा उन्हें भावुक करती रहेंगी।
Jehanabad News: As soon as the body of army soldier Narendra Kumar reached the village, mourning spread, final farewell was given with state honors
Author: AK
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