न्यूयॉर्क में एस. जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की मुलाकात में व्यापार, रक्षा, ऊर्जा और हिंद-प्रशांत सहयोग पर गहन चर्चा हुई।
India-US Ties Strengthen After Jaishankar-Rubio Meeting
Met with Indian External Affairs Minister @DrSJaishankar at UNGA. We discussed key areas of our bilateral relationship, including trade, energy, pharmaceuticals, and critical minerals and more to generate prosperity for India and the United States. pic.twitter.com/5dZJAd85Za
— Secretary Marco Rubio (@SecRubio) September 22, 2025
परिचय
भारत और अमेरिका के संबंध आज की वैश्विक राजनीति में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। दोनों देश न केवल दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक शक्तियां हैं, बल्कि रक्षा, व्यापार और तकनीक जैसे क्षेत्रों में भी एक-दूसरे के प्राकृतिक साझेदार माने जाते हैं। हाल ही में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 80वें सत्र के दौरान भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की मुलाकात ने इस साझेदारी को और गहराई दी। इस बैठक में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने पर जोर दिया गया और भविष्य के सहयोग की दिशा तय की गई।
रणनीतिक साझेदारी पर जोर
हिंद-प्रशांत क्षेत्र का महत्व
भारत और अमेरिका दोनों का मानना है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र वैश्विक राजनीति और सुरक्षा के लिहाज से निर्णायक है। मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने इस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने और क्वाड (Quad) जैसे बहुपक्षीय मंचों पर मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई।
अमेरिका की दृष्टि
अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत अमेरिका के लिए “बेहद महत्वपूर्ण” है। रुबियो ने कहा कि दोनों देश मिलकर एक स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत को बढ़ावा देंगे, जिससे क्षेत्रीय शांति और स्थिरता बनी रहे।
व्यापार और आर्थिक सहयोग
बढ़ते व्यापारिक संबंध
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है। हालांकि हाल के वर्षों में कुछ मुद्दों पर मतभेद देखने को मिले हैं, फिर भी दोनों देश इस साझेदारी को नई दिशा देने के लिए प्रयासरत हैं।
- फार्मास्यूटिकल्स में सहयोग से वैश्विक स्वास्थ्य क्षेत्र में सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
- महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) की सप्लाई चेन को सुरक्षित करने पर भी चर्चा हुई।
- ऊर्जा क्षेत्र में नए अवसर तलाशने की सहमति बनी।
निवेश और तकनीकी सहयोग
बैठक में यह भी माना गया कि दोनों देशों के बीच निवेश और टेक्नोलॉजिकल पार्टनरशिप बढ़ाकर आर्थिक विकास को नई गति दी जा सकती है।

रक्षा और सुरक्षा सहयोग
रक्षा साझेदारी का विस्तार
भारत और अमेरिका पहले से ही रक्षा क्षेत्र में सहयोगी हैं। दोनों देश संयुक्त अभ्यास, रक्षा उपकरणों की आपूर्ति और तकनीकी साझेदारी के जरिए अपनी रणनीतिक मजबूती बढ़ा रहे हैं।
- समुद्री सुरक्षा (Maritime Security) पर विशेष ध्यान दिया गया।
- साइबर सुरक्षा और आतंकवाद-निरोधक सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति बनी।
क्वाड और क्षेत्रीय स्थिरता
रुबियो और जयशंकर ने माना कि क्वाड गठबंधन हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन और सहयोग को बढ़ाने का प्रभावी माध्यम है।
ऊर्जा और सतत विकास
स्वच्छ ऊर्जा में सहयोग
भारत की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं और अमेरिका की तकनीकी विशेषज्ञता को ध्यान में रखते हुए स्वच्छ ऊर्जा और नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) में साझेदारी पर जोर दिया गया।
- सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश की संभावना।
- ऊर्जा दक्षता और कार्बन उत्सर्जन कम करने पर संयुक्त पहल।
जलवायु परिवर्तन से निपटना
दोनों देशों ने यह भी स्वीकार किया कि जलवायु परिवर्तन एक साझा चुनौती है, जिसके समाधान के लिए भारत और अमेरिका मिलकर काम करेंगे।
वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा
बहुपक्षीय सहयोग
मुलाकात के दौरान भारत और अमेरिका ने बहुपक्षीय मंचों जैसे संयुक्त राष्ट्र, G20 और क्वाड में मिलकर काम करने पर जोर दिया।
- वैश्विक स्वास्थ्य संकट से निपटने में सहयोग।
- यूक्रेन संकट और मध्य पूर्व की अस्थिरता जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श।
अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा
भारत और अमेरिका दोनों ने आतंकवाद, साइबर अपराध और समुद्री डकैती जैसी चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।
सोशल मीडिया पर संदेश
मुलाकात के बाद दोनों नेताओं ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने विचार साझा किए।
- मार्को रुबियो ने लिखा कि उन्होंने व्यापार, ऊर्जा, फार्मास्यूटिकल्स और खनिजों पर रचनात्मक चर्चा की, जिससे दोनों देशों की समृद्धि और बढ़ेगी।
- जयशंकर ने भी पोस्ट कर इस मुलाकात को “रचनात्मक और सार्थक” बताया तथा प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में प्रगति के लिए निरंतर संवाद पर सहमति जताई।
भारत-अमेरिका संबंधों की अहमियत
लोकतंत्र और साझा मूल्य
भारत और अमेरिका दोनों लोकतंत्र, स्वतंत्रता और मानवाधिकार जैसे मूल्यों पर आधारित देश हैं। यही साझा मूल्य उनके रणनीतिक सहयोग की नींव को मजबूत बनाते हैं।
भविष्य की संभावनाएं
- डिजिटल अर्थव्यवस्था और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे नए क्षेत्रों में सहयोग।
- रक्षा उत्पादन में साझेदारी से भारत की “मेक इन इंडिया” पहल को बल।
- अंतरिक्ष अनुसंधान और तकनीकी साझेदारी में नई उपलब्धियां।
निष्कर्ष
जयशंकर और मार्को रुबियो की मुलाकात ने भारत-अमेरिका संबंधों में नई ऊर्जा और विश्वास भर दिया है। व्यापार, रक्षा, ऊर्जा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग पर चर्चा से स्पष्ट है कि दोनों देश अपनी रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
यह मुलाकात केवल एक कूटनीतिक औपचारिकता नहीं थी, बल्कि आने वाले समय में भारत-अमेरिका संबंधों की नई दिशा तय करने वाला कदम है। वैश्विक चुनौतियों से निपटने और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए दोनों देशों का एकजुट होना न केवल उनके लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए सकारात्मक संदेश है।
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Author: AK
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