
एक बार फिर खतरनाक महामारी मंकीपॉक्स भारत समेत दुनिया के लिए तनाव बढ़ा रही है। इस महामारी को रोकने के लिए कई देश अलर्ट मोड पर आ गए हैं। पड़ोसी देश पाकिस्तान में मंकीपॉक्स अभी चार मामलों की पुष्टि हो चुकी है। हालांकि अभी भारत में एक भी संक्रमित मरीज नहीं पाया गया है। मध्य और पूर्वी अफ्रीका से शुरू हुआ यह संक्रमण अब भारत के करीब तक पहुंच गया है। पाकिस्तान में पहला मामला सऊदी अरब से वापस आए एक शख्स में पाया गया है। वहीं मामलों को देखते हुए अब भारत सरकार भी सख्ती में आ गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने देश के सभी हवाई अड्डों के साथ-साथ बांग्लादेश और पाकिस्तान की सीमाओं के पास मौजूद बंदरगाहों के अधिकारियों को मंकीपॉक्स के चलते अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के प्रति सतर्क रहने को कहा है।स्वास्थ्य मंत्रालय ने दिल्ली में केंद्र के तीन बड़े अस्पतालों- राम मनोहर लोहिया, सफदरजंग और लेडी हार्डिंग में नोडल सेंटर्स बनाए हैं। इन अस्पतालों में मंकीपॉक्स के मरीजों के इलाज और देखभाल के लिए आइसोलेशन वार्ड बनाए गए हैं। केंद्र ने सभी राज्य सरकारों को भी उनके राज्य के अस्पतालों में मंकीपॉक्स के मरीजों के लिए जरूरी व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं।






विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 14 अगस्त को मंकीपॉक्स को ग्लोबल पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया है। यह दो साल में दूसरी बार है, जब इस बीमारी को हेल्थ इमरजेंसी बताया गया है।मंकीपॉक्स की शुरुआत अफ्रीकी देश कांगो से हुई थी। अफ्रीका के दस देश इसकी गंभीर चपेट में हैं। इसके बाद ये तेजी से पड़ोसी देशों में फैली। आशंका है कि यह दुनिया के दूसरे देशों में भी फैल सकती है। कोरोना की तरह यह विमान यात्रा और ट्रैवलिंग के दूसरे साधनों से दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में फैल रही है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन इसलिए भी चिंतित है क्योंकि मंकीपॉक्स के अलग-अलग प्रकोप में मृत्यु दर अलग-अलग देखी गई है। कई बार तो यह 10% से भी अधिक रही है।मंकीपॉक्स चेचक जैसी एक वायरल बीमारी है। आमतौर इस वायरस से संक्रमण के ज्यादा दुष्प्रभाव नहीं होते हैं, लेकिन कुछ मामलों में यह घातक हो सकता है। इसके चलते फ्लू जैसे लक्षण दिखते हैं और शरीर पर मवाद से भरे घाव हो जाते हैं। यह वायरस ऑर्थोपॉक्सवायरस जीनस फैमिली का ही मेंबर है, जो चेचक (स्मालपॉक्स) के लिए भी जिम्मेदार है।मंकीपॉक्स किसी संक्रमित व्यक्ति या जानवर के निकट संपर्क के माध्यम से या वायरस से दूषित सामग्री के माध्यम से मनुष्यों में फैलता है। ऐसा माना जाता है कि यह चूहों, चूहियों और गिलहरियों जैसे जानवरों से फैलता है। यह रोग घावों, शरीर के तरल पदार्थ, श्वसन बूंदों और दूषित सामग्री जैसे बिस्तर के माध्यम से फैलता है। यह वायरस चेचक की तुलना में कम संक्रामक है और कम गंभीर बीमारी का कारण बनता है। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि इनमें से कुछ संक्रमण यौन संपर्क के माध्यम से संचरित हो सकते हैं। डब्ल्यूएचओ ने कहा कि वह समलैंगिक या उभयलिंगी लोगों से संबंधित कई मामलों की भी जांच कर रहा है।
Author: AK
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