वियतनाम ने 20 सालों में गरीबी को लगभग खत्म कर दिया है। जानिए कैसे आर्थिक सुधार, अनुशासन और नीतियों ने इस देश को भारत से आगे पहुँचा दिया।
How Vietnam Ended Poverty in Just 20 Years

20 सालों में गरीबी से संपन्नता तक: वियतनाम का चमत्कारिक सफर
(How Vietnam Ended Poverty in Just 20 Years)
परिचय: कभी सबसे गरीब, आज सफलता की मिसाल
1990 के दशक तक वियतनाम एशिया के सबसे गरीब देशों में था। यह देश लंबे अमेरिकी युद्ध से तबाह था, लाखों लोग मारे गए थे और खेती से लेकर उद्योग तक सबकुछ बर्बाद हो चुका था। उस समय इसकी 80% से अधिक आबादी गरीबी रेखा से नीचे थी।
मगर आज तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। साफ-सुथरी सड़कें, आधुनिक शहर, पक्के घर, महंगी कारें, और अनुशासित जीवनशैली वियतनाम को एक विकसित राष्ट्र की पहचान देती हैं। केवल दो दशकों में इस देश ने ऐसा विकास कर दिखाया कि अब इसकी प्रति व्यक्ति आय भारत से तीन गुना हो चुकी है।

वियतनाम की आर्थिक तबाही से नई शुरुआत तक का सफर
युद्ध के बाद बर्बाद देश की कहानी
1975 में वियतनाम युद्ध खत्म हुआ, लेकिन पीछे छोड़ गया तबाही का मंजर। खेत बंजर हो गए, उद्योग तबाह हो गए और जनता भूख से जूझने लगी। अमेरिका द्वारा उपयोग किए गए “ऑरेंज एजेंट” जैसे रासायनिक हथियारों ने भूमि को लंबे समय तक अनुपजाऊ बना दिया।
1980 के दशक के मध्य तक वियतनाम पूरी तरह आर्थिक संकट में फंसा था। खाद्य कमी, बेरोजगारी, कुपोषण और संसाधनों की कमी आम थी। 1985 तक यहां की औसत प्रति व्यक्ति वार्षिक आय मात्र 20,000 रुपये के बराबर थी।
“डोई मोई” – जिसने बदल दी वियतनाम की तकदीर
आर्थिक सुधार की ऐतिहासिक शुरुआत
1986 में वियतनाम की कम्युनिस्ट सरकार ने “Đổi Mới” (डोई मोई) नामक सुधार कार्यक्रम शुरू किया। इसका अर्थ था “नवाचार” या “पुनरुत्थान”।
इस नीति के तहत वियतनाम ने अपने समाजवादी ढांचे में बाज़ार आधारित अर्थव्यवस्था की अवधारणा जोड़ी।
सुधारों के मुख्य स्तंभ थे:
- कृषि को निजी नियंत्रण में देना
- विदेशी निवेश के लिए दरवाजे खोलना
- निर्यात-आधारित औद्योगिकीकरण को बढ़ावा
- रोजगार और बुनियादी ढांचे में निवेश
- शिक्षा व स्वास्थ्य पर सार्वजनिक खर्च बढ़ाना
इन सुधारों के कारण वियतनाम की GDP में 1990 से 2020 तक औसतन 6-7% की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई।

गरीबी घटाने में वियतनाम की अद्भुत सफलता
आंकड़ों में वियतनाम का आर्थिक चमत्कार
1993 में जहां गरीबी दर 58–61% थी, वहीं 2019 तक यह घटकर 3.75% रह गई।
2023 की सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, गरीबी अब 1.5% से भी नीचे आ चुकी है।
संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, पिछले 20 वर्षों में करीब 4 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं — यानी पूरी आबादी का लगभग 40%।
प्रमुख उपलब्धियाँ:
- 1990 में प्रति व्यक्ति आय: लगभग ₹20,000 प्रति वर्ष
- 2024 में प्रति व्यक्ति आय: ₹4.38 लाख प्रति वर्ष
- ग्रामीण गरीबी 1993 में 80% → 2024 में घटकर 4%
- निर्यात वृद्धि दर: 15% वार्षिक
वियतनाम का “गरीबी उन्मूलन मॉडल”
तीन चरणों में हुआ गरीबी का अंत
पहला चरण (1986–1995): आधारभूत सुधार
कृषि क्षेत्र को उत्पादक बनाया गया। किसानों को भूमि अधिकार मिले। खाद्यान्न उत्पादन बढ़ा और देश आत्मनिर्भर हुआ।
दूसरा चरण (1996–2010): औद्योगिक विस्तार
सरकार ने SEZ (Special Economic Zones) बनाए जहाँ कर में छूट और लाइसेंसिंग को आसान किया गया।
इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़ा, और मछली निर्यात उद्योगों ने लाखों रोजगार दिए।
तीसरा चरण (2011–2025): सामाजिक सुरक्षा और कौशल विकास
शिक्षा, स्वास्थ्य, तकनीकी प्रशिक्षण और महिला सशक्तिकरण पर जोर दिया गया।
ग्रामीण विकास योजनाओं के तहत बुनियादी ढांचे में बड़े पैमाने पर निवेश हुआ।

सामाजिक सुधार और महिला भागीदारी
वियतनाम की एक बड़ी ताकत उसकी महिला कार्यबल है। यहां की लगभग 50% वर्कफोर्स महिलाएं हैं।
सरकार ने गरीबी उन्मूलन के साथ-साथ महिला शिक्षा, सूक्ष्म उद्यमिता और रोजगार योजनाओं को जोड़ा।
गांवों में सहकारी समितियों ने लाखों महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया।
अनुशासन और प्रशासन: सफलता की रीढ़
वियतनाम की नीति थी कि “नीतियाँ ऊपर से नहीं, गांव के स्तर से लागू हों।”
इससे स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ी और सरकारी योजनाएँ धरातल पर असर दिखाने लगीं।
देश में सफाई, अनुशासन, राष्ट्रभक्ति और ईमानदारी जैसे गुण रोजमर्रा की आदत बन गए।
आज हनोई से लेकर हो ची मिन्ह तक हर शहर साफ-सुथरा और व्यवस्थित दिखता है।

उद्योग और निर्यात में वियतनाम की छलांग
आज वियतनाम एशिया के सबसे बड़े इलेक्ट्रॉनिक्स और वस्त्र निर्यातक देशों में से एक है।
सैमसंग, LG, Nike जैसी कंपनियों ने वियतनाम में अपने बड़े उत्पादन केंद्र स्थापित किए हैं।
यह देश अब “चीन प्लस वन रणनीति” का सबसे बड़ा लाभार्थी बन गया है, जहाँ कंपनियाँ चीन के बाहर अपने उत्पादन केंद्र स्थापित कर रही हैं।
मुख्य निर्यात क्षेत्र:
- वस्त्र उद्योग (Textile)
- इलेक्ट्रॉनिक्स (Electronics)
- समुद्री खाद्य उत्पाद (Seafood Exports)
- फर्नीचर और मशीनरी उपकरण
भारत और वियतनाम की तुलना
भारत और वियतनाम दोनों कृषि प्रधान देश हैं, लेकिन विकास की दिशा में दोनों की गति अलग रही।
भारत की प्रति व्यक्ति आय 2024 में लगभग ₹1.84 लाख है जबकि वियतनाम की ₹4.38 लाख।
भारत में जहां गरीबी दर लगभग 10% है, वहीं वियतनाम ने इसे 1–2% पर ला दिया है।
भारत को वियतनाम से सीख
- दीर्घकालिक नीति और स्थिर प्रशासन
- स्थानीय स्तर पर नीति क्रियान्वयन
- शिक्षा और स्वास्थ्य पर प्राथमिक ध्यान
- निर्यात-आधारित औद्योगिकीकरण
- अनुशासन और भ्रष्टाचार नियंत्रण
निष्कर्ष: एक अनुशासित राष्ट्र की सफलता की कहानी
वियतनाम की कहानी यह साबित करती है कि गरीबी को खत्म करना “संभव” है, बशर्ते राजनीतिक इच्छाशक्ति, नीति निरंतरता और सामाजिक अनुशासन हो।
जिस देश ने 40 लाख लोगों की जान गंवाने वाला युद्ध झेला, वही आज गरीबी उन्मूलन का वैश्विक उदाहरण बन चुका है।
भारत जैसे देशों के लिए वियतनाम का यह मॉडल प्रेरणा है —
गरीबी का अंत केवल विकास से नहीं, बल्कि नीति, अनुशासन और सहभागिता से होता है।
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Author: AK
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