
बुरा ना मानो होली है…
बिहार के मुख्य पर्व में से होली भी एक खास पर्व है लेकिन इस वर्ष की होली बिहार के शिक्षकों के लिए कुछ अलग ही रही है। क्योंकि इस वर्ष होली के दिन भी शिक्षकों को अपने घर परिवार को छोड़कर विद्यालय में उपस्थित रहना पड़ा है। यह ताजा उदाहरण बिहार के अपर मुख्य सचिव के पाठक का शिक्षकों पर तानाशाही का है। इससे पहले भी शिक्षकों के आने जाने के समय में बदलाव के साथ-साथ कई तरह के नए कारनामे के के पाठक दिखा चुके हैं। और तो और हद तो तब हो गई जब केके पाठक ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की बात तक अनसुनी कर दी थी।
वहीं पहले शिक्षकों की होली की छुट्टियां रद्द करने के बाद होली के दौरान हीं ट्रेनिंग का फरमान जारी करने के के पाठक ने नए आदेश जारी किए हैं। जिसके अनुसार अब विशेष ट्रेनिंग कार्यक्रम से गायब रहने वाले टीचर्स के वेतन पर कैंची चलाई जाएगी। केके पाठक के एक और आदेश ने शिक्षकों की मुश्किलें बढ़ा दी है। जिसमें कहा गया है कि 25 से 30 मार्च तक सरकारी स्कूलों के कक्षा 1 से 5 तक के करीब 20 हजार शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। और इस ट्रेनिंग प्रोग्राम से गायब रहने वाले शिक्षकों का एक हफ्ते का वेतन काट दिया जाएगा।


#बिहार में #होली के दिन भी स्कूल खुले रहे। मास्साब हैप्पी नहीं दिखे, बुरा मान गये
बताते चलें कि राज्य में कक्षा एक से 5 तक के करीब 20 हजार टीचर्स को विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है। जिसके तहत सभी उपस्थिति अनिवार्य है। और ट्रेनिंग में शामिल नहीं होने पर शिक्षकों की सैलरी पर कैंची चला दी जाएगी। इस ट्रेनिंग के लिए सभी शिक्षकों की छुट्टियां भी रद्द की गई हैं। होली के दिन शुरू हुए इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में त्योहार के चलते कई ट्रेनिंग सेंटर पर शिक्षक हाजिर नहीं हो सके। जिनका एक हफ्ते का वेतन कटना तय माना जा रहा है।
केके पाठक के इस फैसले क्या शिक्षक संघ भी विरोध कर रहा है। और इस पर सियासत भी तेज हो गई है। शिक्षक संघ का कहना है कि होली के त्योहार के दौरान शिक्षकों को प्रशिक्षण देने का निर्णय गलत है। शिक्षकों को अपने परिवार के साथ त्योहार मनाने का अधिकार है। शिक्षक संघों ने शिक्षा विभाग से मांग की है कि वे वेतन कटौती का फैसला वापस लें।

बता दें कि इस वर्ष बिहार में होली में छुट्टी नहीं दी गई है। राज्य में होली के दिन ट्रेनिंग सेंटर कर पर पहुंचे टीचर्स का बुरा हाल हुआ है और इसके तस्वीर भी सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुए हैं। तस्वीरो में शिक्षक कीचड़ और गोबर में सने दिख रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि विभाग की जिद के कारण होली के दिन शिक्षकों को स्कूल पहुंचने के लिए अपमान सहना पड़ा है।
गौरतलब बात यह है कि अपर सचिव के के पाठक के होली के दौरान सभी स्कूलों को खोलने के निर्णय का फायदा क्या है वह बतलाया जाए? क्योंकि होली के दौरान कोई भी विद्यालय में शायद ही कोई विद्यार्थी किताब कॉपी के साथ पहुंचे होंगे। खैर लगता है हमारे अपर सचिव के के पाठक जिस विद्यालय में पढ़े होंगे वहां होली के दौरान भी पढ़ाई होती होगी….
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Author: AK
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