सोम, अप्रैल 6, 2026

द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती नहीं रहे, आजादी की लड़ाई में गए थे जेल

Hindu religion top most Saint Shankaracharya Swaroopanand Saraswati Maharaj passed away today after prolonged illness
JOIN OUR WHATSAPP GROUP

द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का आज दोपहर करीब 3:30 बजे निधन हो गया । उन्होंने नरसिंहपुर के झोतेश्वर स्थित परमहंसी गंगा आश्रम में साढ़े तीन बजे 99 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली। जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का अंतिम संस्कार कल झोतेश्वर में ही साढ़े तीन बजे होगा। शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। कुछ दिनों पहले ही उन्होंने अपना 99वां जन्मदिवस मनाया था‌। स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती आजादी की लड़ाई में भाग लेकर जेल भी गए थे। उन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए भी लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी थी। उनके निधन पर यूपी के सीएम योगी ने दुख जताया है। सीएम ने ट्वीट किया कि, “श्री द्वारका-शारदा पीठ व ज्योतिर्मठ पीठ के जगतगुरु शंकराचार्य श्रद्धेय स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज का ब्रह्मलीन होना संत समाज की अपूरणीय क्षति है। प्रभु श्री राम दिवंगत पुण्यात्मा को अपने परमधाम में स्थान व शोकाकुल हिंदू समाज को यह दुख सहने की शक्ति दें। ॐ शांति । शंकराचार्य स्वामी स्वरुपानंद का जन्म 2 सितंबर 1924 को मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के दिघोरी गांव में एक ब्राह्मण परिवार के घर हुआ था। माता-पिता ने इनका नाम पोथीराम उपाध्याय रखा। महज नौ वर्ष की उम्र में ही उन्होंने घर छोड़ कर धर्म यात्राएं प्रारम्भ कर दी थीं। इस दौरान वह काशी पहुंचे और यहां उन्होंने ब्रह्मलीन श्री स्वामी करपात्री महाराज से वेद-वेदांग, शास्त्रों की शिक्षा ली। भारत को अंग्रेजों से मुक्त करवाने की लड़ाई चल रही थी। जब सन 1942 में अंग्रेजों भारत छोड़ो का नारा लगा तो वह भी स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े और 19 साल की उम्र में वह ‘क्रांतिकारी साधु’ के रूप में प्रसिद्ध हुए। इसी दौरान उन्होंने वाराणसी की जेल में नौ और मध्यप्रदेश की जेल में छह महीने की सजा भी काटी। आजादी की लड़ाई में बतौर सन्यासी उनका योगदान अहम माना जाता है। ज्योर्तिमठ पीठ के ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वामी ब्रह्मानन्द सरस्वती से दण्ड सन्यास की दीक्षा ली और स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती नाम से जाने जाने लगे। स्वामी स्वरूपानंद 1950 में दंडी संन्यासी बनाए गए थे। उन्हें 1981 में शंकराचार्य की उपाधि मिली।

AK
Author: AK

! Let us live and strive for freedom ! Freelance Journalist ! Politics ! News Junky !

Relates News