
राज्यसभा चुनाव भले ही खत्म हो गए हैं लेकिन हिमाचल प्रदेश में सियासी उथल-पुथल मचा गए। हिमाचल में सरकार बचाने के लिए कांग्रेस की जद्दोजहद जारी है वहीं दूसरी ओर भाजपा भी अभी हार मानने के लिए तैयार नहीं है। राज्यसभा के चुनाव में मंगलवार, 27 फरवरी को पार्टी के छह कांग्रेस के विधायक बागी हो गए, जिन्होंने बीजेपी प्रत्याशी को वोट दिया। उसके बाद अब सुक्खू सरकार में शामिल वीरभद्र सिंह के बेटे विक्रमादित्य सिंह ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। वहीं कांग्रेस की ओर से सरकार को बचाने के लिए डैमेज कंट्रोल किया जा रहा है। इसको लेकर कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार और हरियाणा के पूर्व सीएम बीएस हुड्डा को पर्यवेक्षक बनाकर हिमाचल भेजा गया है । हालांकि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह ने अपनी सरकार बचाने की पहली बाधा पार कर ली है। मुख्यमंत्री सुखविंदर ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है। सीएम ने कहा कि उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया है। भाजपा अफवाह फैला रही है। सुक्खू ने कहा कि जिन विधायकों ने राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग की, वो भी हमारे संपर्क में हैं। भाजपा पार्टी को तोड़ना चाहती है, लेकिन कांग्रेस संगठित है। इसके अलावा सियासी गहमागहमी के बीच सरकार ने विधानसभा में बजट पास करा लिया है। सदन में विपक्षी दल बीजेपी के सभी विधायक गैर हाजिर रहे। दरअसल बीजेपी के 15 विधायकों को सस्पेंड किया गया था, जिसके बाद 10 विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया था। वहीं बजट पास करने के बाद स्पीकर ने सदन की कार्यवाही अनिश्चितकालीन स्थगित हो गई है। वहीं कांग्रेस के जो विधायक बागी हुए थे, वो विधायक शिमला में नहीं रहेंगे। वो वापस हरियाणा के पंचकूला वापस जा रहे हैं, जहां वो राज्यसभा चुनाव के बाद गए थे। बता दें कि हिमाचल प्रदेश के जिन विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की, उनमें सुधीर शर्मा, राजेंद्र राणा, इंद्र दत्त लखनपाल, चैतन्य शर्मा, रवि ठाकुर और देवेंद्र भुट्टो के नाम शामिल हैं। इन विधायकों ने विधानसभा में जयराम ठाकुर से मुलाकात भी की है। विधायकों में से दो कांग्रेस विधायक राजेंद्र राणा और इंद्रदत्त लखनपाल का संबंध मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के गृहजिला हमीरपुर से है। जिन तीन निर्दलीय विधायकों ने भाजपा के समर्थन में मतदान किया उनके नाम आशीष शर्मा, केएल ठाकुर और होशियार सिंह हैं।
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Author: AK
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