बुध, फ़रवरी 4, 2026

Haridwar Mansa Devi Stampede: हरिद्वार मनसा देवी मंदिर हादसा, भीड़ में मची भगदड़, 6 श्रद्धालुओं की मौत

Haridwar Mansa Devi Stampede 6 Pilgrims Killed in Tragic Incident

हरिद्वार के मनसा देवी मंदिर में रविवार को भारी भीड़ के कारण भगदड़ मच गई, जिसमें 6 श्रद्धालुओं की मौत और कई घायल हो गए।


Haridwar Mansa Devi Stampede: 6 Pilgrims Killed in Tragic Incident


दर्शन की तैयारी, मातम में बदली

रविवार को हरिद्वार के प्रतिष्ठित मनसा देवी मंदिर में उस समय त्रासदी घट गई जब अत्यधिक भीड़ के कारण भगदड़ मच गई। इस घटना में 6 श्रद्धालुओं की जान चली गई और कई अन्य घायल हुए। यह हादसा मंदिर के सीढ़ियों वाले रास्ते पर हुआ, जहां श्रद्धालु दर्शन के लिए ऊपर की ओर जा रहे थे।

क्या हुआ हादसे वाले दिन?

यह घटना रविवार सुबह लगभग 9 बजे की है। सप्ताहांत और अवकाश होने के कारण मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी थी। दर्शन के लिए सीढ़ियों की ओर बढ़ते समय धक्का-मुक्की शुरू हो गई और कई श्रद्धालु नीचे गिर पड़े। अफरा-तफरी के बीच कुछ श्रद्धालु कुचल गए, जिससे मौतें हुईं।

स्थानीय चश्मदीदों के अनुसार, प्रशासन की ओर से भीड़ नियंत्रण के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। न तो बैरिकेडिंग थी और न ही श्रद्धालुओं की संख्या सीमित की गई थी।

प्रशासन की प्रतिक्रिया

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, एसडीआरएफ और प्रशासनिक टीमें तुरंत मौके पर पहुंच गईं। रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। हरिद्वार के जिला प्रशासन ने बताया कि भीड़ के दबाव और प्रबंधन की कमी हादसे का कारण बनी।

गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पांडे ने कहा कि घटना की विस्तृत जांच की जा रही है और एक रिपोर्ट जल्द ही तैयार की जाएगी। प्रारंभिक जांच में भीड़ प्रबंधन में चूक सामने आई है।

मुख्यमंत्री धामी का शोक संदेश

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हादसे पर गहरा दुख प्रकट करते हुए कहा कि वह प्रशासन के लगातार संपर्क में हैं और राहत कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा कि माता रानी से सभी की सुरक्षा की प्रार्थना करता हूं। मुख्यमंत्री ने घायलों को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा देने के निर्देश भी दिए हैं।

धार्मिक स्थलों पर भीड़ नियंत्रण की पुरानी समस्या

यह कोई पहली घटना नहीं है जब भारत में किसी धार्मिक स्थल पर भगदड़ हुई हो। इसके पहले भी कई बार ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं:

  • 2013 में इलाहाबाद कुंभ मेले में 36 लोगों की मौत
  • 2005 में मांडहर देवी मंदिर, महाराष्ट्र में 300 से अधिक श्रद्धालु मारे गए
  • 2008 में नंदेड़ साहिब में भगदड़ से कई मौतें

इन घटनाओं से एक स्पष्ट संदेश मिलता है कि धार्मिक स्थलों पर भीड़ नियंत्रण एक गंभीर और बार-बार दोहराई जाने वाली समस्या है।

संभावित समाधान क्या हो सकते हैं?

धार्मिक स्थलों पर भीड़ नियंत्रण के लिए निम्नलिखित कदम जरूरी हैं:

  • समय-सीमा आधारित ई-पास प्रणाली जिससे श्रद्धालु स्लॉट में दर्शन कर सकें
  • CCTV कैमरे और कंट्रोल रूम से निगरानी
  • प्रशिक्षित स्वयंसेवकों की तैनाती
  • स्पष्ट प्रवेश और निकास मार्ग
  • आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए ट्रेंड रेस्क्यू टीम

इन उपायों को लागू करने से ऐसी घटनाओं को भविष्य में रोका जा सकता है।

श्रद्धालुओं की सुरक्षा सबसे पहले

हरिद्वार के मनसा देवी मंदिर जैसी आस्था की जगहों पर सुरक्षा और व्यवस्था सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। श्रद्धा और भक्ति के साथ-साथ प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि श्रद्धालु पूरी तरह सुरक्षित रहें और किसी भी स्थिति में उनका जीवन खतरे में न पड़े।

सरकार, मंदिर प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन को मिलकर ऐसी योजनाएं बनानी होंगी जिससे भीड़ को नियंत्रित किया जा सके और भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं से बचा जा सके।

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AK
Author: AK

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