सोम, अप्रैल 6, 2026

गुरु पूर्णिमा विशेष: गुरु का ज्ञान और मार्गदर्शक शिष्यों के लिए जीवन भर आगे बढ़ने के लिए देते हैं प्रेरणा

Guru Purnima 2023 Special: Time, Date and significance

एक ऐसा रिश्ता जो जीवन के आखिरी समय तक भी नहीं मिटता है। कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की राह दिखाता है। आज हम बात करेंगे गुरु और शिष्य के पवित्र रिश्तों की। ‘गुरु बिन ज्ञान नहीं, ज्ञान बिन आत्मा नहीं, ध्यान-ज्ञान-धैर्य और कर्म सब गुरु की ही देन हैं’। इन चंद लाइनों के बिना गुरु पूर्णिमा की बात अधूरी है।

वैसे तो पूर्णिमा हर महीने आती है लेकिन इसका महत्व तब और बढ़ जाता है जब इसके आगे ‘गुरु’ लग जाता है। तब यह हो जाती है ‘गुरु पूर्णिमा’। आज गुरु पूर्णिमा (Guru Purnima)का शुभ मुहूर्त शुरू हो गया है। बता दें कि हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक साल आषाढ़ महीने की पूर्णिमा तिथि को गुरु पूर्णिमा के तौर पर मनाया जाता हैै। इस बार गुरु पूर्णिमा सोमवार के दिन मनाई जाएगी। पूर्णिमा की तिथि 2 जुलाई, रात 8 बजकर 21 मिनट से शुरू हो गई है जिसका समापन 3 जुलाई को शाम 5 बजकर 8 मिनट पर होगा ऐसे में गुरु पूर्णिमा का पर्व 3 जुलाई को मनाया जाएगा, क्योंकि इस दिन ही उदया तिथि है। सनातन परंपरा में कोई भी उत्सव सूर्य निकलने के साथ होने वाली तिथि को मनाए जाने का विधान है। बहुत जगह यह पर्व आज भी मनाया जा रहा है। गुरु पूर्णिमा एक ऐसा त्योहार है जिसमें गुरु और शिष्य के पवित्र रिश्तों की हजारों कहानियां हैं। गुरु पूर्णिमा के दिन दान-पुण्य के साथ गुरुओं का आशीर्वाद लेने की पुरानी परंपरा रही है। बिना गुरु के जीवन अधूरा माना जाता है। शिष्यों के लिए गुरु का आशीर्वाद जीवन में सरल और सुगम बन जाता है। सही मायने में यह दिन गुरु को समर्पित है। बिना गुरु के कोई ज्ञान प्राप्‍त नहीं कर सकता। जब किसी को सच्‍चा गुरु मिल जाता हैं, तो उसके जीवन के सारे अंधकार मिट जाते हैं। यह दिन इसलिए काफी अहम है कि इस दिन आपने जिससे भी कुछ ज्ञान हासिल किया हो उनके प्रति सम्मान प्रकट किया जाता है।

आपको बता दें कि इसी दिन महाभारत के रचयिता महर्षि वेद व्यास का जन्मदिवस भी मनाया जाता है। वेदव्यास ने सभी 18 पुराणों की रचना की थी। यही कारण है कि कुछ स्‍थानों पर गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। वे संस्कृत के प्रकांड विद्वान थे और उन्होंने चारों वेदों की भी रचना की थी। इस कारण उनका एक नाम वेद व्यास भी है। उन्हें आदिगुरु कहा जाता है । गुरु तथा देवता में समानता के लिए एक श्लोक में कहा गया है कि जैसी भक्ति की आवश्यकता देवता के लिए है वैसी ही गुरु के लिए भी। ‘जिस प्रकार आषाढ़ मास के समय आकाश बादलों से घिर जाता है तो उस अंधकार को दूर करने के लिए सूर्य के प्रकाश की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार जीवन के अंधकार को दूर करने के लिए किसी गुरु का होना अत्यंत आवश्यक होता है’। ‘गु’ शब्द का वास्तविक अर्थ है अंधकार और ‘रु’ का मतलब है निरोधक। अर्थात जो अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाता है उसे गुरु कहते हैं। गुरु शिष्यों को हर संकट से बचाने के लिए प्रेरणा देते रहते हैं, इसलिए हमारे जीवन में गुरु का अत्यधिक महत्व है।

वेदव्यासजी बने प्रथम गुरु:

आषाढ़ पूर्णिमा के दिन वेद व्यासजी का जन्म हुआ था इसलिए गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा और वेद व्यास जयंती के नाम से भी जाना जाता है वेद व्यास महर्षि पराशर और सत्यवती के पुत्र हैं महर्षि वेद व्यासजी ने मानव जाति को पहली बार चार वेदों का ज्ञान दिया था इसलिए उनको मानव जाति का प्रथम गुरु भी माना जाता है शास्त्रों के अनुसार, व्यासजी को तीनों काल का ज्ञाता भी माना जाता है और उन्होंने महाभारत ग्रंथ, ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद, अट्ठारह पुराण, श्रीमद्भागवत और मानव जाती को अनगिनत रचनाओं का भंडार दिया है वेद व्यास का पूरा नाम कृष्णद्वैपायन है लेकिन वेदों की रचना करने के बाद वेदों में उन्हें वेद व्यास के नाम से ही जाना जाने लगा गुरु पूर्णिमा की शुरुआत वेद व्यासजी के पांच शिष्यों ने शुरुआत की थी.

देश में सदियों से चली आ रही गुरु-शिष्य की परंपरा आज भी कायम है:

गुरु पूर्णिमा 2023

बता दें कि सनातन परंपरा में गुरु का नाम ईश्वर से पहले आता है, क्योंकि गुरु ही होता है जो आपको गोविंद से साक्षात्कार करवाता है, उसके मायने बतलाता है। गुरु की शिक्षा शिष्यों के जीवन भर काम आती है बल्कि उन्हें आगे बढ़ने और हर कठिन रास्तों से गुजरने के लिए आसान बनाती है ।‌ शिक्षक की बातें, नैतिकता ही ऐसी है जिसे शिष्य जीवन भर भूल नहीं पाता है।‌ हमारे देश में सदियों से चली आ रही गुरु शिष्य की परंपरा आज भी कायम है। गुरु की सीख हमें जीवन में आत्मबल प्रदान करती है। गुरु की कृपा के अभाव में कुछ भी संभव नहीं है। जीवन में उनका स्वरूप किसी भी रूप में प्राप्त हो सकता है। यह शिक्षा देते शिक्षक का हो सकता है, माता-पिता हो सकते हैं, या कोई भी जो हमें ज्ञान के पथ का प्रकाश देते हुए हमारे जीवन के अधंकार को दूर कर सकता है। गुरु के पास पहुंचकर ही व्यक्ति को शांति, भक्ति और शक्ति प्राप्त होती है। गुरु पूर्णिमा गुरु को प्रणाम करने का अवसर है और यह भारतीय संस्कृति और परंपरा का अहम त्योहार है। भारतीय सभ्यता के हजारों सालों के इतिहास ने पूरी दुनिया पर अपनी जो छाप छोड़ी है उसमें गुरु शिष्य परंपरा एक अहम पहलू है। वैसे ही गुरु-चरणों में उपस्थित साधकों को ज्ञान, शांति, भक्ति और योग शक्ति प्राप्त करने की शक्ति मिलती है। वहीं अगर हम बात करें कि गुरु पूर्णिमा धार्मिक दृष्टि से भी बहुत महत्व रखती है।‌ इसी दिन दान और स्नान करने से बहुत ही पुण्य मिलता है। गुरु पूर्णिमा के बाद से ही सावन मास भी शुरू हो जाता है। ये चार महीने मौसम की दृष्टि से भी सर्वश्रेष्ठ होते हैं। न अधिक गर्मी और न अधिक सर्दी। जैसे सूर्य के ताप से तप्त भूमि को वर्षा से शीतलता एवं फसल पैदा करने की शक्ति मिलती है। बता दें कि आषाढ़ पक्ष की पूर्णिमा को ही गुरु पूर्णिमा के तौर पर उत्साह के साथ मनाया जाता है।

Guru Purnima 2023

गुरु पूर्णिमा 2023 शुभ मुहूर्त:

गुरु पूर्णिमा पर गुरु की पूजा, स्नान, दान का शुभ मुहूर्त 3 जुलाई सुबह 5 बजकर 27 मिनट से 7 बजकर 12 मिनट तक है। इसके बाद सुबह 8 बजकर 56 मिनट से 10 बजकर 41 मिनट तक रहेगा। फिर दोपहर में 2 बजकर 10 मिनट से शुरू होकर 3 बजकर 54 मिनट तक रहेगा

गुरु पूर्णिमा 2023 शुभ योग:

गुरु पूर्णिमा वाले दिन कई शुभ योग बन रहे हैं। इस दिन ब्रह्म योग, इंद्र योग और सूर्य व बुध की युति से बुधादित्य राजयोग भी बन रहा है.

गुरु पूर्णिमा पूजा विधि:

गुरु पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने का विधान है। सुबह स्नानादि से निवृत होकर स्वच्छ वस्त्र पहनें और घर के पूजाघर में पूजा अर्चना कर गुरुओं की प्रतिमा पर माला अर्पित करें इसके बाद गुरु के घर जाएं और उनकी पूजा कर उपहार देते हुए आशीर्वाद लें जिन लोगों के गुरु इस दुनिया में नहीं रहे, वे गुरु की चरण पादुका का पूजन करें गुरु पूर्णिमा का दिन गुरुओं के प्रति समर्पित होता है शिष्य अपने गुरु देव की पूजा करते हैं जिन लोगों के गुरु नहीं होते, वे अपने नए गुरु बनाते हैं.

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Author: AK

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